अभिजीत दिपके (तस्वीर क्रेडिट@Nargis_Bano78)

जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर भड़के सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके, बोले- तिरंगा फहराना कब से उल्लंघन हो गया?

हिंगोली,13 अक्टूबर (युआईटीवी)- दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान सीजेपी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराना आखिर कब से नियमों का उल्लंघन हो गया। दिपके ने हिरासत में लिए गए नेताओं के खिलाफ कार्रवाई किए जाने पर आपत्ति जताते हुए उनकी रिहाई की माँग की। साथ ही उन्होंने कहा कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तब तक उनका संगठन जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराता रहेगा।

मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान अभिजीत दिपके ने बताया कि उनकी टीम का नेतृत्व आशुतोष रांका,सौरव दास और अजिंक्य शिंदे कर रहे थे। उनकी टीम मंगलवार सुबह जंतर-मंतर पहुँची थी,जहाँ कार्यकर्ताओं ने तिरंगा लहराया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने वहाँ मौजूद कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए लोगों में सीजेपी के नेता आशुतोष रांका और सौरव दास भी शामिल हैं।

दिपके ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने को उल्लंघन बताना उचित नहीं है। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि जो लोग जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने को उल्लंघन मानते हैं, वे देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी को नहीं समझते। उन्होंने कहा कि आशुतोष रांका,सौरव दास और अजिंक्य शिंदे को हिरासत में लिए जाने के मामले में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने जंतर-मंतर को देश की संपत्ति बताते हुए कहा कि उनका संगठन वहाँ अपना विरोध जारी रखेगा। दिपके के मुताबिक,मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा है और जब तक यह माँग पूरी नहीं होती,तब तक तिरंगा फहराने का सिलसिला जारी रहेगा।

जंतर-मंतर पर हुई इस कार्रवाई के बाद प्रदर्शन और पुलिस की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन स्थल से कुछ लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें सीजेपी के नेता आशुतोष रांका और सौरव दास के नाम भी शामिल हैं। संगठन के संस्थापक ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे विरोध की आवाज दबाने वाला कदम बताया है। हालाँकि,हिरासत में लिए गए लोगों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई का अंतिम परिणाम और आगे की कानूनी प्रक्रिया अलग विषय हैं।

इस घटनाक्रम के बीच पुलिस सूत्रों ने बताया कि 12 अक्टूबर को नई दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के संबंध में कुल चार प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। ये मामले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के कथित उल्लंघन और अन्य संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किए गए हैं।

पुलिस सूत्रों के अनुसार,कनॉट प्लेस इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के प्रावधानों के उल्लंघन को लेकर भी प्राथमिकी दर्ज की गई है। दर्ज चार मामलों में से दो तिलक मार्ग थाने में,एक मंदिर मार्ग थाने में और एक बाराखंभा थाने में दर्ज की गई है।

धारा 163 के तहत सक्षम प्रशासनिक अधिकारी किसी क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर सकते हैं। ऐसे आदेशों का उल्लंघन होने की स्थिति में संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। हालाँकि, इस मामले में दर्ज प्रत्येक प्राथमिकी के आरोपों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का निर्धारण कानूनी प्रक्रिया के दौरान ही होगा।

हिरासत में लिए गए सीजेपी नेता सौरव दास ने सोशल मीडिया मंच इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में उनके साथ आशुतोष रांका भी दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में आशुतोष रांका मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग करते हुए कहते नजर आते हैं कि उनका इस्तीफा जंतर-मंतर पर भी होगा।

वीडियो में सौरव दास अपने साथ संविधान की एक प्रति रखे हुए दिखाई देते हैं। इसके अलावा,हिरासत में लिए गए कुछ लोग बस में भारत माता की जय और जय भीम के नारे लगाते हुए नजर आते हैं। वीडियो सामने आने के बाद प्रदर्शनकारियों के विरोध का तरीका और उनकी मांगें फिर चर्चा में आ गई हैं।

प्रदर्शनकारियों की ओर से तिरंगा और संविधान का उल्लेख करते हुए अपनी बात रखी जा रही है। वहीं, पुलिस की ओर से दर्ज की गई प्राथमिकी और प्रतिबंधात्मक आदेशों के कथित उल्लंघन का मामला कानूनी पहलुओं से जुड़ा हुआ है। इस वजह से पूरे घटनाक्रम में प्रदर्शनकारियों के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई से संबंधित तथ्यों को अलग-अलग समझना महत्वपूर्ण है।

जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम का केंद्र मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने स्पष्ट किया है कि उनका संगठन इस माँग को लेकर पीछे हटने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराकर विरोध जारी रखा जाएगा।

दूसरी ओर,दिल्ली पुलिस ने 12 अक्टूबर के प्रदर्शन से संबंधित चार प्राथमिकी दर्ज किए जाने की जानकारी दी है। ऐसे में अब इस मामले में पुलिस की आगे की कार्रवाई और हिरासत में लिए गए लोगों के संबंध में होने वाली कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

फिलहाल,जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने को लेकर उठे सवाल,सीजेपी नेताओं की हिरासत और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग ने इस घटनाक्रम को राजनीतिक और कानूनी चर्चा का विषय बना दिया है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि संगठन अपना प्रदर्शन किस तरह आगे बढ़ाता है और पुलिस द्वारा दर्ज मामलों में आगे क्या कार्रवाई होती है।