रणजी ट्रॉफी में जम्मू-कश्मीर ने पहली बार फाइनल में बनाई जगह (तस्वीर क्रेडिट@ShashiTharoor)

रणजी ट्रॉफी फाइनल में गरमाया माहौल: पारस डोगरा पर 50 प्रतिशत मैच फीस का जुर्माना,हेडबट विवाद ने खींचा ध्यान

हुबली,26 फरवरी (युआईटीवी)- रणजी ट्रॉफी फाइनल के दूसरे दिन जम्मू-कश्मीर और कर्नाटक के बीच मुकाबला सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं रहा,बल्कि मैदान पर हुए टकराव ने इसे विवादों में ला दिया। जम्मू-कश्मीर के अनुभवी कप्तान पारस डोगरा पर कथित तौर पर उनकी मैच फीस का 50 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया है। यह कार्रवाई उस घटना के बाद हुई,जब उन्होंने कर्नाटक के सब्स्टीट्यूट फील्डर केवी अनीश के साथ कहासुनी के दौरान कथित रूप से हेडबट कर दिया।

यह विवाद जम्मू-कश्मीर की पहली पारी के 101वें ओवर में हुआ। उस समय डोगरा शानदार लय में बल्लेबाजी कर रहे थे और उनके साथ कन्हैया वाधावन क्रीज पर मौजूद थे। कर्नाटक के तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा की एक गेंद पर डोगरा ने जोरदार बाउंड्री लगाई। शॉट के बाद माहौल अचानक बदल गया। फॉरवर्ड शॉर्ट लेग पर खड़े अनीश और डोगरा के बीच कुछ शब्दों का आदान-प्रदान हुआ,जो देखते ही देखते तीखी बहस में बदल गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार,बहस के दौरान डोगरा अनीश की ओर बढ़े और ऐसा लगा कि उन्होंने सिर से संपर्क किया। अनीश ने हेलमेट पहन रखा था,लेकिन इस संपर्क के बाद वह असहज दिखाई दिए। मैदान पर मौजूद खिलाड़ियों और अंपायरों ने तुरंत हस्तक्षेप किया। कर्नाटक के कप्तान मयंक अग्रवाल मौके पर पहुँचे और स्थिति को शांत करने की कोशिश की। अंपायरों ने भी दोनों टीमों को अलग कर मामला आगे बढ़ने से रोका।

मैच के दौरान तनाव यहीं खत्म नहीं हुआ। ओवर समाप्त होने के बाद डोगरा ने कथित तौर पर अनीश से माफी माँगी,लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक अनीश ने इसे स्वीकार नहीं किया। इस घटना पर कर्नाटक के कुछ वरिष्ठ खिलाड़ियों ने भी नाराजगी जताई। फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में इस तरह की घटना ने क्रिकेट प्रेमियों को चौंका दिया,खासकर इसलिए क्योंकि डोगरा जैसे अनुभवी खिलाड़ी से संयम की अपेक्षा की जाती है।

मैदान पर तनाव की लहर इसके बाद भी जारी रही। रन लेते समय हुए एक अन्य संपर्क के बाद कर्नाटक के तेज गेंदबाज विजयकुमार वैशाख और कन्हैया वाधावन के बीच भी तीखी नोकझोंक हो गई। हालाँकि,इस बार भी अंपायरों और खिलाड़ियों के हस्तक्षेप से मामला बढ़ने से पहले ही सँभाल लिया गया।

बुधवार का खेल समाप्त होने के बाद डोगरा ने ‘क्रिकबज’ से बातचीत में घटना को ज्यादा गंभीर न बताते हुए कहा कि यह सब जोश में हुआ। उन्होंने कहा, “यह कोई बड़ी बात नहीं थी,फाइनल में इस तरह की नोकझोंक हो जाती है। हमने वहीं पर मामला शांत कर दिया था। बाद में हम सामान्य बातचीत भी करने लगे।” डोगरा का यह बयान विवाद को हल्का करने की कोशिश माना जा रहा है,लेकिन क्रिकेट प्रशंसकों और विशेषज्ञों के बीच इस घटना को लेकर चर्चा जारी है।

41 वर्षीय पारस डोगरा भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे सम्मानित खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। उन्होंने हाल ही में रणजी ट्रॉफी में 10,000 रनों का आँकड़ा पार किया है,जो उनके लंबे और सफल करियर का प्रमाण है। फाइनल की पहली पारी में उन्होंने कर्नाटक के खिलाफ 70 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली,जिसने जम्मू-कश्मीर को मजबूत स्थिति में पहुँचाया। दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक जम्मू-कश्मीर की टीम छह विकेट पर 527 रन बना चुकी थी,जो फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में एक मजबूत स्कोर माना जा रहा है।

रणजी ट्रॉफी,जिसे भारत की सबसे प्रतिष्ठित घरेलू प्रथम श्रेणी क्रिकेट प्रतियोगिता माना जाता है,में खिलाड़ियों से अनुशासन और खेल भावना की अपेक्षा की जाती है। इस टूर्नामेंट का आयोजन रणजी ट्रॉफी के तहत होता है और यहाँ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम के दरवाजे तक पहुँचते हैं। ऐसे में मैदान पर इस तरह की घटनाएँ न केवल खिलाड़ियों की छवि पर असर डालती हैं,बल्कि टूर्नामेंट की गरिमा पर भी सवाल खड़े करती हैं।

हालाँकि,क्रिकेट में प्रतिस्पर्धा और भावनाओं का उबाल कोई नई बात नहीं है। खासकर फाइनल जैसे मुकाबलों में दबाव अपने चरम पर होता है। कई बार खिलाड़ी अपनी भावनाओं पर नियंत्रण खो बैठते हैं। फिर भी,वरिष्ठ खिलाड़ियों से यह उम्मीद की जाती है कि वे युवा खिलाड़ियों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करें।

डोगरा के खिलाफ 50 प्रतिशत मैच फीस का जुर्माना लगाए जाने की खबर ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि अनुशासनहीनता पर सख्त रुख अपनाया जा रहा है। बोर्ड की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार है,लेकिन सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई मैच रेफरी की रिपोर्ट के आधार पर की गई है।

इस पूरे घटनाक्रम के बावजूद मुकाबला बेहद रोमांचक स्थिति में पहुँच चुका है। जम्मू-कश्मीर की ऐतिहासिक पहली रणजी ट्रॉफी जीत की उम्मीदें अभी बरकरार हैं,जबकि कर्नाटक जैसी मजबूत टीम वापसी के लिए पूरी कोशिश कर रही है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि क्या मैदान पर हुई यह तनातनी टीमों के प्रदर्शन पर असर डालेगी या खिलाड़ी इसे पीछे छोड़कर केवल खेल पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

रणजी ट्रॉफी फाइनल का यह अध्याय लंबे समय तक चर्चा में रहेगा। जहाँ एक ओर डोगरा की बल्लेबाजी ने टीम को मजबूत आधार दिया,वहीं मैदान पर हुई इस घटना ने उनके करियर के एक और पहलू को उजागर कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस विवाद का क्या असर पड़ता है और क्या दोनों टीमें खेल भावना के साथ इस मुकाबले को यादगार बना पाती हैं।