अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती

ड्रग्स केस में रिया चक्रवर्ती को बड़ी राहत,अदालत ने बैंक खाते अनफ्रीज करने का दिया आदेश

मुंबई,28 अप्रैल (युआईटीवी)- सुशांत सिंह राजपूत से जुड़े बहुचर्चित ड्रग्स मामले में अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को बड़ी कानूनी राहत मिली है। नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) मामलों की विशेष अदालत ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए रिया चक्रवर्ती, उनके भाई शोविक चक्रवर्ती और उनकी माँ संध्या चक्रवर्ती के बैंक खातों को अनफ्रीज करने का निर्देश दिया है। इस फैसले के बाद अब परिवार को अपने विभिन्न बैंक खातों तक फिर से पहुँच मिल सकेगी।

अदालत का यह आदेश 25 अप्रैल 2026 को सुनाया गया,जिसमें साफ कहा गया कि जाँच एजेंसी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने बैंक खातों को फ्रीज करते समय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। अदालत ने अपने फैसले में यह भी उल्लेख किया कि एनडीपीएस अधिनियम की धारा 68एफ के तहत जो अनिवार्य प्रक्रिया तय की गई है,उसका पालन इस मामले में नहीं हुआ।

कानून के अनुसार,किसी भी व्यक्ति की संपत्ति या बैंक खाते को फ्रीज करने के बाद 30 दिनों के भीतर सक्षम प्राधिकारी से इसकी मंजूरी लेना जरूरी होता है। यह प्रक्रिया इसलिए बनाई गई है,ताकि जाँच एजेंसियों की कार्रवाई कानूनी दायरे में रहे और किसी भी व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन न हो। हालाँकि,अदालत ने पाया कि इस मामले में निर्धारित समयसीमा के भीतर आवश्यक स्वीकृति नहीं ली गई,जिससे फ्रीजिंग आदेश कानूनी रूप से अमान्य हो गया।

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जब किसी कार्रवाई में तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता,तो वह स्वतः ही अवैध हो जाती है। इसी आधार पर अदालत ने बैंक खातों को अनफ्रीज करने का आदेश दिया। इस फैसले को रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है,क्योंकि लंबे समय से उनके वित्तीय लेनदेन पर रोक लगी हुई थी।

इस पूरे मामले की शुरुआत वर्ष 2020 में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद हुई थी। उस समय इस मामले की जाँच के दौरान ड्रग्स एंगल सामने आया,जिसमें रिया चक्रवर्ती और उनके भाई का नाम जुड़ा। इसके बाद नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने जाँच के तहत उनके बैंक खातों को फ्रीज कर दिया था। एजेंसी का तर्क था कि वित्तीय लेनदेन पर रोक लगाने से सबूतों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ को रोका जा सकता है।

हालाँकि,रिया चक्रवर्ती की ओर से इस कार्रवाई को अदालत में चुनौती दी गई। उनके वकीलों का कहना था कि जाँच एजेंसी ने बैंक खातों को फ्रीज करते समय आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया और बिना उचित अनुमति के यह कदम उठाया गया। उन्होंने अदालत से इस कार्रवाई को रद्द करने की मांग की थी।

लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अब अदालत ने इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए रिया चक्रवर्ती के पक्ष में निर्णय दिया है। यह फैसला न केवल इस केस में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है,बल्कि यह भी दर्शाता है कि जाँच एजेंसियों को भी कानून के दायरे में रहकर ही कार्रवाई करनी होती है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक मिसाल बन सकता है,जहाँ जाँच एजेंसियों द्वारा प्रक्रिया का पालन किए बिना कठोर कदम उठाए जाते हैं। अदालत के इस आदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कानून के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

फिलहाल,इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है,लेकिन बैंक खातों के अनफ्रीज होने से रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार को एक बड़ी राहत जरूर मिली है। यह फैसला एक बार फिर यह साबित करता है कि न्यायिक प्रक्रिया में कानूनी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन सबसे महत्वपूर्ण होता है और किसी भी चूक के परिणाम गंभीर हो सकते हैं।