कोलंबिया के नए राष्ट्रपति अबेलार्दो डे ला एस्प्रिएला (तस्वीर क्रेडिट@osint42)

कोलंबिया में सत्ता परिवर्तन के साथ बदले अमेरिका से रिश्ते,नए राष्ट्रपति अबेलार्दो डे ला एस्प्रिएला को ट्रंप का समर्थन,1 अरब डॉलर की सुरक्षा सहायता का ऐलान

वाशिंगटन/बोगोटा,8 अगस्त (युआईटीवी)- कोलंबिया में अब नई सरकार ने सत्ता सँभाल ली है और इसके साथ ही देश की घरेलू नीतियों के साथ अमेरिका के साथ उसके संबंधों में भी बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। दक्षिणपंथी नेता अबेलार्दो डे ला एस्प्रिएला के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के तुरंत बाद अमेरिकी प्रशासन ने कोलंबिया को करीब एक अरब डॉलर की सुरक्षा सहायता देने की योजना का ऐलान किया है। अमेरिका की ओर से कहा गया है कि यह सहायता कोलंबिया की नई सरकार के साथ सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने और दोनों देशों के साझा रणनीतिक लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए दी जाएगी।

अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से सुरक्षा सहायता की घोषणा ऐसे समय की गई है,जब डे ला एस्प्रिएला ने शुक्रवार को कोलंबिया के राष्ट्रपति के रूप में पदभार सँभाला। उनके सत्ता में आने से कोलंबिया की सुरक्षा,मादक पदार्थों की तस्करी और सशस्त्र आपराधिक समूहों के खिलाफ सरकारी नीति में बड़ा बदलाव आने की संभावना है। नए राष्ट्रपति को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का करीबी और समर्थित नेता माना जाता है। ऐसे में उनकी सरकार के साथ वाशिंगटन के संबंधों को लेकर भी नई दिशा दिखाई दे रही है।

48 वर्षीय अबेलार्दो डे ला एस्प्रिएला ने स्थानीय समयानुसार शुक्रवार को कैली स्थित पिचिंचा बटालियन सैन्य अड्डे पर राष्ट्रपति पद की शपथ ली। शपथ लेने के बाद अपने पहले भाषण में उन्होंने देश में कानून-व्यवस्था बहाल करने को अपनी सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल बताया। उन्होंने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और सशस्त्र आपराधिक समूहों के विरुद्ध निर्णायक सैन्य अभियान चलाने का संकल्प लिया।

नए राष्ट्रपति ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आपराधिक गिरोहों और नार्को-टेररिस्ट संगठनों के सामने अब केवल दो विकल्प होंगे। या तो वे कानून के सामने आत्मसमर्पण करें या फिर राज्य की सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी कार्रवाई का सामना करें। डे ला एस्प्रिएला ने सशस्त्र समूहों के साथ शांति वार्ता की संभावना को भी लगभग पूरी तरह खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि देश की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को बहाल करने के लिए सरकार को निर्णायक तरीके से कार्रवाई करनी होगी।

डे ला एस्प्रिएला की सरकार का एक बड़ा लक्ष्य कोकीन के उत्पादन पर रोक लगाना है। उन्होंने कहा है कि कोका की अवैध खेती को खत्म करने के लिए हवाई छिड़काव की व्यवस्था दोबारा शुरू की जाएगी। कोका का पौधा कोकीन के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख कच्चा पदार्थ है। कोलंबिया लंबे समय से दुनिया में कोकीन उत्पादन और मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़ी चुनौतियों का सामना करता रहा है और इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ उसका सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा है।

नए राष्ट्रपति ने दावा किया है कि अवैध कोका की खेती को खत्म करने के लिए ऐसे हर्बीसाइड का इस्तेमाल किया जाएगा,जिससे मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को नुकसान न पहुँचे। इसके साथ ही उन्होंने सशस्त्र समूहों और ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज करने का संकेत दिया है। इससे साफ है कि नई सरकार मादक पदार्थों के खिलाफ नीति में कठोर सुरक्षा दृष्टिकोण अपनाने की तैयारी कर रही है।

अमेरिका और कोलंबिया के बीच सुरक्षा सहयोग पहले से ही महत्वपूर्ण रहा है,लेकिन नई सरकार के आने के बाद इसमें और तेजी आने की संभावना है। अमेरिकी प्रशासन की ओर से करीब एक अरब डॉलर की सुरक्षा सहायता का प्रस्ताव इसी दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार,सहायता का उद्देश्य कोलंबिया की नई सरकार के साथ सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना और दोनों देशों के साझा लक्ष्यों को हासिल करना है।

कोलंबिया की नई सरकार ने यह भी घोषणा की है कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू किए गए ‘शील्ड ऑफ द अमेरिकाज’ सुरक्षा कार्यक्रम में शामिल होगी। इस कार्यक्रम में शामिल होने का फैसला दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक और सुरक्षा सहयोग का संकेत माना जा रहा है। कोलंबिया के लिए यह कदम खास तौर पर मादक पदार्थों की तस्करी,संगठित अपराध और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अमेरिका के साथ करीबी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।

डे ला एस्प्रिएला के शपथ ग्रहण समारोह में अमेरिका ने भी उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजा। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने किया। नए राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में अमेरिकी प्रशासन की वरिष्ठ स्तर पर मौजूदगी को दोनों देशों के बीच संबंधों में बढ़ती निकटता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

सत्ता परिवर्तन के बाद कोलंबिया की आर्थिक नीतियों में भी बड़े बदलाव की संभावना है। डे ला एस्प्रिएला ने चुनाव प्रचार के दौरान सरकार के आकार को करीब 40 प्रतिशत तक कम करने का वादा किया था। उनका उद्देश्य सरकारी खर्च को नियंत्रित करना और प्रशासनिक ढाँचे को अधिक प्रभावी बनाना बताया गया है। इसके अलावा वह देश के तेल और गैस क्षेत्र को फिर से बढ़ावा देने के पक्ष में हैं। यह नीति उनके पूर्ववर्ती गुस्तावो पेट्रो की नीतियों से काफी अलग है।

हालाँकि,नए राष्ट्रपति के सामने अपने बड़े चुनावी वादों को लागू करने की राह आसान नहीं होगी। कोलंबिया की कांग्रेस में राजनीतिक विभाजन मौजूद है और सरकार को कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को लागू करने के लिए पर्याप्त समर्थन जुटाना होगा। सरकार के आकार में बड़ी कटौती,तेल और गैस क्षेत्र को बढ़ावा देने तथा सुरक्षा नीति में बदलाव जैसे फैसले राजनीतिक बहस का विषय बन सकते हैं।

डे ला एस्प्रिएला की नीतियाँ पूर्व राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो की सरकार से स्पष्ट रूप से अलग दिखाई दे रही हैं। पेट्रो ने अपने कार्यकाल में सशस्त्र समूहों के साथ बातचीत और ‘टोटल पीस’ नीति के माध्यम से देश में हिंसा कम करने का प्रयास किया था। उनकी सरकार ने विभिन्न सशस्त्र संगठनों के साथ बातचीत और शांति समझौते की दिशा में कदम उठाए थे। हालाँकि,इन प्रयासों को लेकर भी कई स्तरों पर आलोचना हुई और हिंसा तथा आपराधिक गतिविधियों को पूरी तरह नियंत्रित नहीं किया जा सका।

इसके विपरीत डे ला एस्प्रिएला ने सत्ता संभालते ही संकेत दिया है कि उनकी सरकार सशस्त्र समूहों के साथ बातचीत की नीति को प्राथमिकता नहीं देगी। उनका जोर सुरक्षा बलों के माध्यम से निर्णायक कार्रवाई करने और आपराधिक नेटवर्क को कमजोर करने पर होगा। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति पेट्रो पर सशस्त्र समूहों को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार होने का आरोप भी लगाया है।

राजनीतिक बदलाव का असर विपक्ष के रुख में भी दिखाई दे रहा है। पूर्व राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने नए राष्ट्रपति की जीत को मान्यता नहीं दी है। वहीं विपक्षी नेता इवान सेपेडा ने शुक्रवार को एक प्रदर्शन के दौरान कहा कि विपक्ष लोकतंत्र की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण सविनय अवज्ञा का रास्ता अपनाएगा। इससे संकेत मिलता है कि नई सरकार को संसद के साथ-साथ सड़क पर भी राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ सकता है।

कोलंबिया में सत्ता परिवर्तन ऐसे समय हुआ है जब लैटिन अमेरिका के कई देशों में राजनीति का झुकाव दक्षिणपंथ की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। पेरू,अर्जेंटीना,चिली, इक्वाडोर,बोलीविया और पनामा जैसे देशों में अपराध,कमजोर अर्थव्यवस्था,रोजगार और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे चुनावी राजनीति के केंद्र में रहे हैं। डे ला एस्प्रिएला का उदय भी इसी व्यापक क्षेत्रीय राजनीतिक बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन डे ला एस्प्रिएला के चुनाव अभियान के दौरान काफी महत्वपूर्ण माना गया था। अब उनके राष्ट्रपति बनने के तुरंत बाद अमेरिका की ओर से लगभग एक अरब डॉलर की सुरक्षा सहायता का ऐलान दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक और रणनीतिक निकटता को और मजबूत कर सकता है। वाशिंगटन के लिए कोलंबिया दक्षिण अमेरिका में एक महत्वपूर्ण साझेदार है,खासकर मादक पदार्थों की तस्करी, संगठित अपराध और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर।

नई सरकार के सामने हालांकि कई गंभीर चुनौतियाँ भी हैं। देश में सशस्त्र आपराधिक समूहों की मौजूदगी,मादक पदार्थों का उत्पादन और तस्करी,ग्रामीण इलाकों में हिंसा तथा आर्थिक असमानता जैसे मुद्दे लंबे समय से बने हुए हैं। केवल सैन्य कार्रवाई से इन समस्याओं का समाधान कितना संभव होगा,यह आने वाले समय में सबसे बड़ा सवाल रहेगा।

कोका की अवैध खेती पर हवाई छिड़काव दोबारा शुरू करने का फैसला भी विवाद पैदा कर सकता है। सरकार का कहना है कि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को नुकसान न पहुँचाने वाले रसायनों का इस्तेमाल किया जाएगा,लेकिन अतीत में ऐसी कार्रवाइयों को लेकर पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ उठती रही हैं। इसलिए नई सरकार को सुरक्षा लक्ष्यों के साथ पर्यावरणीय और मानवीय चिंताओं के बीच संतुलन कायम करना होगा।

अमेरिकी सुरक्षा सहायता से कोलंबिया की सुरक्षा एजेंसियों की क्षमता बढ़ सकती है और मादक पदार्थों तथा सशस्त्र समूहों के खिलाफ अभियान को संसाधन मिल सकते हैं। लेकिन इस सहायता के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि इसका इस्तेमाल किस तरह किया जाता है और क्या इससे देश में लंबे समय तक स्थिरता तथा कानून-व्यवस्था कायम करने में मदद मिलती है।

अबेलार्दो डे ला एस्प्रिएला ने अपने सोशल मीडिया संदेश में सत्ता सँभालने को कोलंबिया के लिए नए अध्याय की शुरुआत बताया है। उन्होंने लिखा कि आज कोलंबिया एक नया अध्याय लिख रहा है और ‘टाइगर आ गया है’। उनके इस बयान से उनकी सरकार के आक्रामक और निर्णायक राजनीतिक दृष्टिकोण का संकेत मिलता है।

कुल मिलाकर,कोलंबिया में नई सरकार के गठन के साथ अमेरिका और इस दक्षिण अमेरिकी देश के संबंधों में नई गर्माहट दिखाई दे रही है। करीब एक अरब डॉलर की अमेरिकी सुरक्षा सहायता, ‘शील्ड ऑफ द अमेरिकाज’ कार्यक्रम में कोलंबिया की भागीदारी और शपथ ग्रहण समारोह में अमेरिकी उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी इस बदलाव को रेखांकित करती है। दूसरी ओर,घरेलू स्तर पर डे ला एस्प्रिएला की कठोर सुरक्षा नीति और आर्थिक सुधारों की योजनाएँ उन्हें अपने पूर्ववर्ती से अलग पहचान देती हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई सरकार अपने वादों को कितनी तेजी से लागू करती है और क्या अमेरिका के साथ बढ़ता सहयोग कोलंबिया में अपराध तथा मादक पदार्थों की समस्या से निपटने में प्रभावी साबित होता है।