सैन डिएगो मस्जिद में गोलीबारी से दहला अमेरिका (तस्वीर क्रेडिट@boredpanda)

सैन डिएगो मस्जिद में गोलीबारी से दहला अमेरिका,सुरक्षा गार्ड समेत 3 की मौत,राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जताया दुख

वाशिंगटन,19 मई (युआईटीवी)- अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य के सैन डिएगो शहर में स्थित एक मस्जिद में सोमवार सुबह हुई भीषण गोलीबारी ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इस हमले में पाँच लोगों की मौत हो गई,जिनमें एक सिक्योरिटी गार्ड और दो संदिग्ध हमलावर भी शामिल हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और सुरक्षा एजेंसियाँ मामले की गंभीरता से जाँच कर रही हैं। शुरुआती जाँच में इस हमले को हेट क्राइम यानी नफरत से प्रेरित अपराध के तौर पर देखा जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए इसे बेहद भयावह बताया है।

पुलिस के मुताबिक यह हमला सैन डिएगो काउंटी की सबसे बड़ी मस्जिद मानी जाने वाली इस्लामिक सेंटर ऑफ सैन डिएगो में हुआ। यह केवल इबादत की जगह नहीं है,बल्कि यहाँ एक स्कूल भी संचालित होता है,जहाँ बच्चों को अरबी भाषा,इस्लामिक अध्ययन और कुरान की शिक्षा दी जाती है। घटना के समय परिसर में कई लोग मौजूद थे और गोलीबारी शुरू होते ही अफरा-तफरी मच गई।

स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गोलीबारी में मारे गए दो संदिग्ध किशोर थे। इनमें एक की उम्र 17 साल और दूसरे की 19 साल बताई गई है। दोनों के शव मस्जिद परिसर के पास खड़े एक वाहन में मिले। शुरुआती जाँच में आशंका जताई जा रही है कि दोनों ने खुद को गोली मार ली। हालाँकि,पुलिस अभी इस पूरे मामले की हर पहलू से जाँच कर रही है और हमले के पीछे की असली वजह का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार घटना में एक सिक्योरिटी गार्ड की भी मौत हुई,जिसने लोगों को बचाने की कोशिश की थी। इसके अलावा दो अन्य लोगों की भी जान गई। कई लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज स्थानीय अस्पतालों में चल रहा है। पुलिस ने अभी तक सभी मृतकों और घायलों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है।

घटना के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह बेहद गंभीर और दुखद स्थिति है। उन्होंने कहा, “मुझे शुरुआती जानकारी दी गई है,लेकिन हम इस मामले को बहुत गंभीरता से देखेंगे।” ट्रंप ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि संघीय एजेंसियाँ जाँच में स्थानीय प्रशासन की मदद कर रही हैं।

एफबीआई निदेशक काश पटेल ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संघीय जाँच एजेंसी मामले की गहराई से जाँच कर रही है। उन्होंने कहा कि एफबीआई सभी संभावित पहलुओं पर काम कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हमला किसी संगठित नफरत अभियान का हिस्सा था या नहीं।

कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसम ने मुस्लिम समुदाय के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि राज्य सरकार इस कठिन समय में उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा, “जहाँ परिवार और बच्चे जुटते हैं,जहाँ लोग शांति से इबादत करते हैं,वहाँ ऐसा हमला बेहद भयावह है। कैलिफोर्निया में नफरत की कोई जगह नहीं है।” गवर्नर ने बताया कि कैलिफोर्निया हाईवे पेट्रोल और गवर्नर ऑफिस ऑफ इमरजेंसी सर्विसेज की टीमें स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

घटना के बाद मस्जिद परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस ने इलाके को घेरकर जाँच शुरू कर दी है। कई प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अचानक गोलियों की आवाज सुनकर लोग इधर-उधर भागने लगे। कुछ लोगों ने बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश की,जबकि कई लोग मस्जिद के अंदर ही छिप गए थे।

अमेरिका में इस साल यह गोलीबारी की चौथी बड़ी घटना मानी जा रही है। लगातार बढ़ती ऐसी घटनाओं ने एक बार फिर देश में गन कल्चर और हथियारों की आसान उपलब्धता को लेकर बहस तेज कर दी है। पिछले कुछ महीनों में अमेरिका में कई ऐसी हिंसक घटनाएँ हुई हैं,जिन्होंने सुरक्षा व्यवस्था और हथियार नियंत्रण कानूनों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

ठीक एक महीने पहले 19 अप्रैल 2026 को अमेरिका के लुइसियाना राज्य के श्रेवेपोर्ट शहर में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई थी। वहाँ एक व्यक्ति ने आठ बच्चों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इनमें सात बच्चे उसके अपने थे। इस घटना ने पूरे अमेरिका को सदमे में डाल दिया था और मानसिक स्वास्थ्य तथा हथियारों की उपलब्धता पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई थी।

इसके अलावा 16 फरवरी 2026 को रोड आइलैंड में एक हाई स्कूल हॉकी मैच के दौरान भी गोलीबारी हुई थी। पुलिस के अनुसार उस हमले में तीन लोगों की मौत हो गई थी,जिनमें हमलावर भी शामिल था। खेल प्रतियोगिता के दौरान हुई इस हिंसा ने स्कूल और सार्वजनिक कार्यक्रमों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए थे।

साल की शुरुआत में ही 8 जनवरी 2026 को मिनियापोलिस शहर में भी एक विवादित गोलीबारी हुई थी। वहाँ इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट यानी आईसीई के एक एजेंट ने कार में सवार महिला पर गोली चला दी थी,जिससे उसकी मौत हो गई थी। महिला की पहचान 37 वर्षीय रेनी गुड के रूप में हुई थी,जो तीन बच्चों की माँ थीं। उस घटना को लेकर भी पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में लगातार बढ़ रही गोलीबारी की घटनाएँ सामाजिक तनाव,नस्लीय और धार्मिक नफरत तथा हथियारों की आसान उपलब्धता जैसे कई गंभीर मुद्दों की ओर इशारा करती हैं। खासकर धार्मिक स्थलों पर होने वाले हमले सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं।

सैन डिएगो मस्जिद में हुए इस हमले ने मुस्लिम समुदाय के भीतर डर और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। कई सामुदायिक संगठनों ने घटना की कड़ी निंदा की है और सरकार से धार्मिक स्थलों की सुरक्षा बढ़ाने की माँग की है। वहीं जाँच एजेंसियाँ यह पता लगाने में जुटी हैं कि हमलावरों का उद्देश्य क्या था और क्या उनके किसी कट्टरपंथी समूह से संबंध थे।

फिलहाल पूरा अमेरिका इस दर्दनाक घटना से स्तब्ध है। पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदनाएँ व्यक्त की जा रही हैं और देशभर में धार्मिक नेताओं तथा सामाजिक संगठनों ने शांति बनाए रखने की अपील की है। आने वाले दिनों में जाँच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस हमले के पीछे असली वजह क्या थी,लेकिन इस घटना ने एक बार फिर अमेरिका में गन वायलेंस की गंभीर समस्या को दुनिया के सामने ला दिया है।