वाशिंगटन,27 जनवरी (युआईटीवी)- अमेरिका में आव्रजन नीति को लेकर एक बार फिर सियासी और संवैधानिक टकराव खुलकर सामने आ गया है। व्हाइट हाउस ने तथाकथित ‘सैंक्चुरी पॉलिसी’ की कड़ी आलोचना करते हुए इसे सार्वजनिक सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बताया है। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप संघीय आव्रजन कानूनों को प्रभावी तरीके से लागू कराने के लिए राज्य और स्थानीय प्रशासन से कहीं अधिक मजबूत सहयोग की माँग कर रहे हैं। उनका कहना था कि जिन राज्यों और शहरों में संघीय आव्रजन प्रवर्तन एजेंसियों,खासकर इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (आईसीई),के काम में बाधा डाली जा रही है,वहाँ कानून व्यवस्था और आम नागरिकों की सुरक्षा सीधे तौर पर खतरे में पड़ रही है।
व्हाइट हाउस की नियमित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कैरोलिन लेविट ने डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले राज्यों और शहरों को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन राज्य और लोकल सरकारों की ओर से आईसीई के विरोध को महज राजनीतिक असहमति नहीं,बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा के खिलाफ एक गंभीर चुनौती मानता है। लेविट ने विशेष रूप से मिनेसोटा का जिक्र करते हुए वहाँ के डेमोक्रेटिक नेताओं पर संघीय आव्रजन कानूनों की खुलकर अवहेलना करने का आरोप लगाया। उनके मुताबिक,इन नेताओं ने न केवल संघीय अधिकारियों को अपना काम करने से रोका,बल्कि ऐसी नीतियाँ अपनाईं,जिनका खामियाजा आम लोगों को जान गंवाकर चुकाना पड़ा।
प्रेस सेक्रेटरी ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद मिनेसोटा के गवर्नर टिम वाल्ज से इस मुद्दे पर बातचीत की है। इस बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ने सहयोग के लिए तीन बेहद सरल और सामान्य समझ वाले बिंदु सामने रखे। लेविट के अनुसार,इन बिंदुओं का उद्देश्य आईसीई और स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बुनियादी तालमेल सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि इनमें स्थानीय पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए अवैध प्रवासियों को संघीय एजेंसियों को सौंपना,आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को कस्टडी में ट्रांसफर करना और संघीय अधिकारियों को बिना किसी रुकावट के अपना काम करने देना शामिल है। लेविट ने जोर देकर कहा कि इस तरह का सहयोग अमेरिका के ज्यादातर राज्यों में पहले से ही एक सामान्य और स्वाभाविक प्रक्रिया है।
व्हाइट हाउस ने यह भी चेतावनी दी कि इस सहयोग की कमी के गंभीर नतीजे सामने आ चुके हैं। कैरोलिन लेविट ने कहा कि मिनेसोटा में ऐसे मामलों में दुखद रूप से लोगों की जान गई है,जिन्हें प्रशासन सीधे तौर पर ‘सैंक्चुरी पॉलिसी’ और संघीय कानूनों के पालन में ढिलाई से जोड़ता है। उनके मुताबिक,जब खतरनाक आपराधिक प्रवासियों को समय रहते हिरासत में लेकर संघीय एजेंसियों को नहीं सौंपा जाता,तो इसका सीधा असर समुदाय की सुरक्षा पर पड़ता है।
इस मुद्दे को लेकर ट्रंप प्रशासन अब कांग्रेस पर भी दबाव बना रहा है। लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप कांग्रेस से अपील कर रहे हैं कि वह तुरंत ऐसा कानून पारित करे,जिससे ‘सैंक्चुरी सिटीज’ को हमेशा के लिए खत्म किया जा सके। उन्होंने साफ किया कि प्रशासन का मानना है कि संघीय कानूनों को लागू करने में बाधा डालने वाली नीतियों के लिए अब कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उनके शब्दों में,अमेरिका एक कानून आधारित देश है और यहाँ कानून का पालन करना सभी स्तरों की सरकारों की जिम्मेदारी है।
प्रेस सेक्रेटरी ने विरोध और नागरिक अधिकारों को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिकियों को शांतिपूर्ण विरोध करने का संवैधानिक अधिकार है,लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें कानूनी आव्रजन प्रवर्तन के ऑपरेशन्स में रुकावट डालने या बाधा पहुँचाने का अधिकार भी मिल जाता है। लेविट ने सख्त लहजे में कहा कि ऐसे कृत्य अपराध की श्रेणी में आते हैं और इससे कानून प्रवर्तन अधिकारियों की जान को सीधा खतरा होता है। उनके अनुसार, प्रशासन ऐसे किसी भी व्यवहार को बर्दाश्त नहीं करेगा,जो संघीय अधिकारियों की सुरक्षा और उनके काम में बाधा बने।
कैरोलिन लेविट ने ट्रंप प्रशासन की समग्र इमिग्रेशन रणनीति का बचाव करते हुए कहा कि राष्ट्रपति का मुख्य फोकस सबसे खतरनाक आपराधिक विदेशियों को देश से बाहर निकालने पर है। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में आईसीई ने कई ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया है,जिन पर हमला,घरेलू हिंसा,धोखाधड़ी और नशे में गाड़ी चलाने जैसे गंभीर अपराधों के आरोप हैं या जिनमें वे दोषी पाए गए हैं। लेविट के मुताबिक,इन कार्रवाइयों का मकसद किसी समुदाय को निशाना बनाना नहीं,बल्कि कानून का पालन सुनिश्चित करना और आम नागरिकों की सुरक्षा करना है।
नागरिक आजादी और हथियारों के अधिकारों से जुड़े सवालों पर भी प्रेस सेक्रेटरी ने प्रशासन का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप कानून का पालन करने वाले नागरिकों के दूसरे संशोधन के अधिकारों का समर्थन करते हैं,लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों का सामना करते समय हथियार ले जाना बेहद खतरनाक हो सकता है। लेविट के अनुसार,ऐसी स्थिति घातक परिणामों के जोखिम को कई गुना बढ़ा देती है और इससे बचना सभी के हित में है।
यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है,जब कई डेमोक्रेट नियंत्रित राज्य और शहर खुले तौर पर संघीय अथॉरिटी को चुनौती दे रहे हैं। इन राज्यों और नगर प्रशासन का तर्क है कि ‘सैंक्चुरी पॉलिसी’ का मकसद प्रवासी समुदायों में भरोसा बनाए रखना है,ताकि वे अपराधों की रिपोर्ट करने से न डरें। वहीं ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस तरह की नीतियाँ कानून के शासन को कमजोर करती हैं और खतरनाक अपराधियों को बच निकलने का मौका देती हैं।
‘सैंक्चुरी पॉलिसी’ को लेकर यह टकराव आने वाले समय में और तेज होने के संकेत दे रहा है। ट्रंप प्रशासन ने साफ कर दिया है कि आईसीई के साथ सहयोग को वह स्थानीय सुरक्षा एजेंडे का एक केंद्रीय हिस्सा मानता है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और क्या राज्यों व संघीय सरकार के बीच इस गहरे मतभेद का कोई व्यावहारिक समाधान निकल पाता है या नहीं।
