संजू सैमसन (तस्वीर क्रेडिट@JaikyYadav16)

संजू सैमसन की 97 रन की पारी बनी टी20 वर्ल्ड कप 2026 का टर्निंग प्वाइंट,कोच गौतम गंभीर ने बताया जीत का असली मोड़

नई दिल्ली,11 मार्च (युआईटीवी)- टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक जीत ने पूरे देश को गर्व से भर दिया। फाइनल मुकाबले में भारत ने न्यूजीलैंड को 96 रनों से हराकर खिताब अपने नाम किया और एक बार फिर दुनिया को दिखा दिया कि भारतीय क्रिकेट किस ऊँचाई पर खड़ा है। इस शानदार जीत के बाद भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर बात की और बताया कि आखिर वह कौन सा पल था,जिसने पूरे टूर्नामेंट की दिशा बदल दी। गंभीर के अनुसार वेस्टइंडीज के खिलाफ संजू सैमसन की 97 रन की नाबाद पारी इस पूरे अभियान का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुई।

टी20 वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में हर मैच अहम होता है,लेकिन कुछ मुकाबले ऐसे होते हैं जो पूरी टीम के आत्मविश्वास और मानसिकता को बदल देते हैं। भारतीय टीम के लिए वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला गया मुकाबला ऐसा ही एक मैच था। उस समय भारतीय टीम पर दबाव काफी ज्यादा था और मैच की स्थिति भी बेहद चुनौतीपूर्ण थी,लेकिन संजू सैमसन की शानदार पारी ने न केवल भारत को जीत दिलाई,बल्कि पूरे टूर्नामेंट में टीम के आत्मविश्वास को भी नई ऊँचाई पर पहुँचा दिया।

हेड कोच गौतम गंभीर ने जियोस्टार से बातचीत के दौरान कहा कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि एक दिन वह भारतीय टीम के हेड कोच के रूप में वर्ल्ड कप जीतेंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करना अपने आप में एक बहुत बड़ा सम्मान है और जब यह मौका कोच के रूप में मिलता है तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। गंभीर ने कहा कि भारत की जर्सी पहनना या देश के लिए कुछ खास करना हर खिलाड़ी और कोच के लिए सबसे बड़ा सपना होता है।

गंभीर ने इस उपलब्धि को अपने जीवन के सबसे भावनात्मक क्षणों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि जब परिवार और देश के लोग आपकी सफलता पर गर्व महसूस करते हैं,तब उस पल की खुशी शब्दों में बयान करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि जब उनकी माँ ने उन्हें फोन करके सिर्फ इतना कहा कि “बहुत बढ़िया”,तो वही उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि थी। गंभीर के अनुसार 140 करोड़ भारतीयों को गर्व महसूस कराना किसी भी खिलाड़ी या कोच के लिए सबसे बड़ा सम्मान होता है।

वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गए उस मुकाबले को याद करते हुए गंभीर ने कहा कि वह मैच किसी क्वार्टर फाइनल से कम नहीं था। वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में 195 रनों का लक्ष्य हासिल करना कभी भी आसान नहीं होता,चाहे मैदान कोई भी हो। उस दिन वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में चार विकेट के नुकसान पर 195 रन बनाए थे,जो कि एक मजबूत स्कोर था।

भारत जब लक्ष्य का पीछा करने उतरा तो शुरुआत अच्छी नहीं रही। टीम ने मात्र 41 रन के स्कोर पर अपने दो महत्वपूर्ण विकेट गंवा दिए थे। उस समय ड्रेसिंग रूम में भी दबाव साफ दिखाई दे रहा था और मैच किसी भी दिशा में जा सकता था,लेकिन इसी मुश्किल घड़ी में संजू सैमसन ने जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली और एक यादगार पारी खेली।

संजू सैमसन ने बेहद संयम और आत्मविश्वास के साथ बल्लेबाजी करते हुए 50 गेंदों में 97 रन की नाबाद पारी खेली। उनकी इस पारी में शानदार चौके और छक्के देखने को मिले,लेकिन उससे भी ज्यादा प्रभावशाली उनका धैर्य और मैच को समझने की क्षमता रही। उन्होंने एक छोर सँभालकर रखा और धीरे-धीरे भारतीय टीम को लक्ष्य के करीब पहुँचाते गए। अंततः उनकी शानदार बल्लेबाजी के दम पर भारत ने यह मुकाबला पाँच विकेट से जीत लिया।

गौतम गंभीर ने कहा कि उस पारी का प्रभाव सिर्फ स्कोरबोर्ड तक सीमित नहीं था। संजू की शांत और आत्मविश्वास से भरी बल्लेबाजी ने ड्रेसिंग रूम का पूरा माहौल बदल दिया। टीम के खिलाड़ियों को यह विश्वास हो गया कि वे किसी भी परिस्थिति में मैच जीत सकते हैं। यही आत्मविश्वास आगे के मुकाबलों में भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ी ताकत बन गया।

गंभीर ने इस दौरान विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन के योगदान की भी जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ईशान ने पूरे टूर्नामेंट में टीम के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और कई अहम मौकों पर टीम को मजबूत स्थिति में पहुँचाया। गंभीर के अनुसार किसी भी बड़े टूर्नामेंट में जीत केवल एक या दो खिलाड़ियों की वजह से नहीं मिलती,बल्कि पूरी टीम के सामूहिक प्रयास से यह संभव होता है।

वेस्टइंडीज के खिलाफ मिली उस जीत के बाद भारतीय टीम का आत्मविश्वास लगातार बढ़ता गया। सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ भी संजू सैमसन ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 42 गेंदों में 89 रन बनाए और भारत को फाइनल तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी यह पारी भी उतनी ही प्रभावशाली थी और इससे साफ हो गया था कि वह पूरे टूर्नामेंट में शानदार फॉर्म में हैं।

फाइनल मुकाबले में न्यूजीलैंड के खिलाफ भी संजू ने अपनी शानदार बल्लेबाजी जारी रखी। उन्होंने 46 गेंदों में 89 रन की दमदार पारी खेली और भारतीय टीम को मजबूत स्कोर तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी इस पारी की बदौलत भारत ने न्यूजीलैंड के सामने एक बड़ा लक्ष्य रखा,जिसे हासिल करना विपक्षी टीम के लिए बेहद मुश्किल साबित हुआ।

संजू सैमसन की यह पारी कई मायनों में ऐतिहासिक रही। वह टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास में खिताबी मुकाबले में सबसे बड़ी पारी खेलने वाले बल्लेबाज बन गए। इस उपलब्धि ने उनके करियर में एक नया अध्याय जोड़ दिया और यह साबित कर दिया कि बड़े मंच पर वह कितने प्रभावशाली खिलाड़ी हैं।

भारतीय टीम की इस जीत ने एक बार फिर दिखा दिया कि सही समय पर सही प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी किसी भी टीम की किस्मत बदल सकते हैं। संजू सैमसन की 97 रन की पारी सिर्फ एक शानदार बल्लेबाजी नहीं थी,बल्कि वह पल था जिसने पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम की सोच और आत्मविश्वास को नई दिशा दी।

गौतम गंभीर ने भी यही माना कि उस एक पारी ने टीम को विश्वास दिलाया कि वे किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं। यही विश्वास आगे चलकर भारत की खिताबी जीत की नींव बना। टी20 वर्ल्ड कप 2026 की यह जीत भारतीय क्रिकेट इतिहास में लंबे समय तक याद की जाएगी और जब भी इस अभियान की चर्चा होगी,संजू सैमसन की वह 97 रन की पारी हमेशा एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में याद की जाएगी।