मुंबई,11 मार्च (युआईटीवी)- बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री में डिजिटल दौर के साथ एक नई चुनौती तेजी से सामने आ रही है—सेलेब्रिटीज की पहचान,आवाज और तस्वीरों का बिना अनुमति इस्तेमाल। इसी मुद्दे को लेकर अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था,जिस पर अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा है कि किसी भी व्यक्ति की पहचान,नाम,आवाज,तस्वीर या छवि का गलत और अनधिकृत इस्तेमाल करना कानूनन गलत है। अदालत ने निर्देश दिया है कि शिल्पा शेट्टी की पहचान का दुरुपयोग करने वाले डिजिटल कंटेंट को तुरंत हटाया जाए और ऐसे मामलों पर तत्काल रोक लगाई जाए।
कोर्ट का यह आदेश ऐसे समय आया है,जब सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर डीपफेक तकनीक और मॉर्फ्ड कंटेंट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। कई बार मशहूर हस्तियों की तस्वीरों और वीडियो को एडिट करके ऐसे रूप में प्रस्तुत किया जाता है,जिससे उनकी छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँच सकता है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति की पर्सनैलिटी से जुड़े तत्व—जैसे नाम,आवाज,तस्वीर और पहचान उस व्यक्ति के अधिकारों के अंतर्गत आते हैं और इनका अनधिकृत उपयोग करना व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन है।
शिल्पा शेट्टी की ओर से अदालत में पेश हुईं उनकी वकील सना रईस खान ने फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि यह आदेश डिजिटल युग में बेहद महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इंटरनेट को डीपफेक और डिजिटल नकल का अड्डा नहीं बनने दिया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि तकनीक का इस्तेमाल किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने या उसकी पहचान का गलत फायदा उठाने के लिए नहीं किया जा सकता।
अदालत ने अपने आदेश में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और इंटरमीडियरीज को भी निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि यदि किसी प्लेटफॉर्म पर शिल्पा शेट्टी की पहचान का गलत इस्तेमाल करते हुए कोई वीडियो,फोटो या अन्य सामग्री पाई जाती है,तो उसे तुरंत हटाया जाना चाहिए। साथ ही ऐसे कंटेंट को फैलाने वाले स्रोतों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई भी की जानी चाहिए। अदालत का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की भी जिम्मेदारी है कि वे इस तरह के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएं।
यह मामला तब सामने आया,जब शिल्पा शेट्टी ने पाया कि सोशल मीडिया और कुछ वेबसाइट्स पर उनकी मॉर्फ्ड तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं। इन सामग्रियों में उनकी छवि को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया था,जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचने की आशंका थी। अभिनेत्री ने दावा किया कि उनके नाम,आवाज और तस्वीरों का बिना अनुमति इस्तेमाल किया जा रहा है और इससे उनके पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन हो रहा है। इसी कारण उन्होंने अदालत में याचिका दाखिल कर इस तरह के कंटेंट पर रोक लगाने की माँग की थी।
अदालत के आदेश को शिल्पा शेट्टी के लिए एक बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है। यह फैसला केवल उनके लिए ही नहीं,बल्कि उन सभी सार्वजनिक हस्तियों के लिए महत्वपूर्ण है,जो डिजिटल माध्यमों में अपनी पहचान के दुरुपयोग का सामना कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला आने वाले समय में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।
दरअसल,पिछले कुछ वर्षों में तकनीक के विकास के साथ डीपफेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एडिटिंग का इस्तेमाल बढ़ गया है। इसके जरिए किसी भी व्यक्ति की आवाज या चेहरा किसी दूसरे वीडियो में जोड़ना आसान हो गया है। कई बार यह तकनीक मनोरंजन के लिए इस्तेमाल की जाती है,लेकिन कई मामलों में इसका दुरुपयोग भी होता है। ऐसे में अदालत का यह आदेश इस बात पर जोर देता है कि तकनीक का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए।
शिल्पा शेट्टी से पहले भी कई बड़े सेलेब्रिटी अपने पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए अदालत का सहारा ले चुके हैं। इनमें ऐश्वर्या राय बच्चन, अभिषेक बच्चन, अमिताभ बच्चन, करण जौहर, रितिक रोशन और अक्किनेनी नागार्जुन जैसे नाम शामिल हैं। इन सभी मामलों में कलाकारों ने अपनी पहचान,नाम और छवि के अनधिकृत उपयोग पर रोक लगाने की माँग की थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का विस्तार हो रहा है,वैसे-वैसे पर्सनैलिटी राइट्स का मुद्दा भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है। सोशल मीडिया की दुनिया में किसी भी सामग्री का तेजी से वायरल होना आम बात है,जिससे कभी-कभी किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा पर गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसे में अदालतों की भूमिका इस बात को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण हो जाती है कि तकनीक का इस्तेमाल कानून और नैतिकता के दायरे में रहे।
कानूनी विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस तरह के फैसले से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। अब उनसे उम्मीद की जाएगी कि वे ऐसे कंटेंट को पहचानने और हटाने के लिए बेहतर तकनीकी व्यवस्था विकसित करें। इसके साथ ही उपयोगकर्ताओं को भी यह समझना होगा कि किसी भी व्यक्ति की तस्वीर या आवाज का गलत इस्तेमाल करना केवल नैतिक रूप से गलत नहीं,बल्कि कानूनन अपराध भी हो सकता है।
बॉम्बे हाईकोर्ट का यह आदेश केवल एक अभिनेत्री की व्यक्तिगत जीत नहीं,बल्कि डिजिटल युग में व्यक्तिगत अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह फैसला इस बात का संकेत देता है कि तकनीकी प्रगति के दौर में भी किसी व्यक्ति की पहचान और प्रतिष्ठा को कानूनी सुरक्षा प्राप्त है और यदि उसका दुरुपयोग होता है तो अदालतें हस्तक्षेप करने के लिए तैयार हैं।
