नई दिल्ली/कोलकाता,23 फरवरी (युआईटीवी)- पश्चिम बंगाल की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शुमार वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुकुल रॉय का सोमवार देर रात निधन हो गया। 73 वर्षीय मुकुल रॉय ने कोलकाता के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और पिछले कुछ समय से अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय ने पुष्टि की कि सोमवार रात करीब 1:30 बजे उनका निधन हुआ। उनके निधन की खबर सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई और विभिन्न दलों के नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री मुकुल रॉय के निधन से वे आहत हैं और उन्हें उनके राजनीतिक अनुभव तथा समाज सेवा के प्रयासों के लिए हमेशा याद किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने उनके परिवारजनों और समर्थकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए “ओम शांति” कहा। पीएम मोदी का यह संदेश इस बात का संकेत था कि मुकुल रॉय ने राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी पहचान बनाई थी और विभिन्न दलों में रहते हुए भी उनके अनुभव का सम्मान किया जाता था।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा विधायक सुवेंदु अधिकारी ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वरिष्ठ नेता के निधन की खबर बेहद दुखद है। उन्होंने अपने संदेश में मुकुल रॉय के परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। सुवेंदु अधिकारी और मुकुल रॉय के राजनीतिक संबंधों में उतार-चढ़ाव रहे,लेकिन इस कठिन समय में उन्होंने राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर श्रद्धांजलि दी।
तृणमूल कांग्रेस के सांसद और महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी भावुक शब्दों में श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि मुकुल रॉय के निधन से बंगाल की राजनीति के एक युग का अंत हो गया है। अभिषेक बनर्जी ने उन्हें अत्यंत अनुभवी और संगठन को मजबूत आधार देने वाला नेता बताया। उन्होंने याद दिलाया कि तृणमूल कांग्रेस के शुरुआती वर्षों में संगठन को खड़ा करने और विस्तार देने में मुकुल रॉय की भूमिका बेहद अहम रही। उनके अनुसार,सार्वजनिक जीवन के प्रति उनका समर्पण और रणनीतिक कौशल लंबे समय तक याद किया जाएगा।
मुकुल रॉय का राजनीतिक जीवन उतार-चढ़ाव और बदलावों से भरा रहा। वे अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी सहयोगियों में गिने जाते थे। पार्टी के शुरुआती दौर में उन्होंने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी रणनीतिक समझ और संगठन क्षमता के कारण वे लंबे समय तक पार्टी के प्रमुख स्तंभ बने रहे।
केंद्र की राजनीति में भी मुकुल रॉय ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार में रेल राज्य मंत्री रहे। इस पद पर रहते हुए उन्होंने कई प्रशासनिक निर्णयों और नीतिगत प्रक्रियाओं में भागीदारी निभाई। रेल मंत्रालय में उनका कार्यकाल भले ही लंबा न रहा हो,लेकिन इससे उनकी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मजबूत हुई।
हालाँकि,2017 में पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा मोड़ आया जब मुकुल रॉय ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। यह निर्णय उस समय राज्य की राजनीति में काफी चर्चा का विषय बना। भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने पार्टी संगठन को बंगाल में मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभाई। 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उन्होंने नादिया जिले के कृष्णानगर (उत्तर) विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की। उनकी जीत को भाजपा के लिए महत्वपूर्ण माना गया,क्योंकि उस समय राज्य में पार्टी अपना विस्तार कर रही थी।
लेकिन राजनीतिक यात्रा यहीं स्थिर नहीं रही। चुनाव के कुछ ही महीनों बाद मुकुल रॉय ने फिर से तृणमूल कांग्रेस में वापसी कर ली। उनकी यह वापसी राजनीतिक हलकों में चौंकाने वाली मानी गई। हालाँकि,स्वास्थ्य समस्याओं के कारण वे सक्रिय राजनीति से धीरे-धीरे दूर होते गए। करीबी सहयोगियों के अनुसार,पिछले कुछ समय से वे कई बीमारियों से जूझ रहे थे और इलाज का उन पर अपेक्षित असर नहीं हो रहा था।
मुकुल रॉय को एक कुशल रणनीतिकार और संगठनकर्ता के रूप में जाना जाता था। वे पर्दे के पीछे रहकर राजनीतिक समीकरण साधने में माहिर माने जाते थे। बंगाल की राजनीति में कई अहम मोड़ों पर उनकी भूमिका निर्णायक रही। चाहे तृणमूल कांग्रेस को शुरुआती मजबूती देना हो या भाजपा के लिए संगठनात्मक रणनीति तैयार करना,उन्होंने हर दौर में सक्रिय भूमिका निभाई।
उनके निधन से पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है। विभिन्न दलों के नेताओं द्वारा व्यक्त शोक संदेश इस बात का प्रमाण हैं कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद मुकुल रॉय को एक अनुभवी और प्रभावशाली नेता के रूप में सम्मान दिया जाता था। उनके समर्थक और कार्यकर्ता उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में याद कर रहे हैं,जिन्होंने दशकों तक सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहकर राज्य और देश की राजनीति को प्रभावित किया।
आज जब बंगाल की राजनीति नए दौर में प्रवेश कर रही है,मुकुल रॉय की विरासत,उनकी रणनीतिक समझ और संगठनात्मक कौशल को लंबे समय तक याद किया जाएगा। उनका जीवन भारतीय राजनीति के बदलते समीकरणों का साक्षी रहा और उनके योगदान को राजनीतिक इतिहास में विशेष स्थान मिलेगा।
