भारत के विदेश मंत्री एस.जयशंकर (तस्वीर क्रेडिट @epanchjanya)

दक्षिण कोरिया के नए विदेश मंत्री चो ह्यून को विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने बधाई दी,दक्षिण कोरिया के नए विदेश मंत्री ने शपथ ग्रहण के साथ माँगी माफी

नई दिल्ली,21 जुलाई (युआईटीवी)- भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को कोरिया गणराज्य के नए विदेश मंत्री के रूप में चो ह्यून की नियुक्ति पर बधाई दी और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की उम्मीद जताई। जयशंकर ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा, “कोरिया गणराज्य के विदेश मंत्री के रूप में नियुक्त होने पर राजदूत चो ह्यून को बधाई। हमारी विशेष रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए साथ मिलकर काम करने के लिए तत्पर हूँ।” यह बयान भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ते कूटनीतिक संबंधों की ओर संकेत करता है,जो हाल के वर्षों में रक्षा,प्रौद्योगिकी,व्यापार और सांस्कृतिक सहयोग के क्षेत्र में नए आयाम छू रहे हैं।

दक्षिण कोरिया के नए विदेश मंत्री चो ह्यून एक अनुभवी और प्रतिष्ठित राजनयिक माने जाते हैं। वे पहले संयुक्त राष्ट्र में दक्षिण कोरिया के स्थायी प्रतिनिधि के रूप में कार्य कर चुके हैं और उन्होंने दुनिया भर में कई महत्वपूर्ण राजनयिक भूमिकाएँ निभाई हैं। उनका कूटनीतिक अनुभव और वैश्विक मंचों पर मजबूत उपस्थिति उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त बनाती है। हालाँकि,शपथ ग्रहण के दिन ही उन्होंने ऐसा कदम उठाया,जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया।

चो ह्यून ने सोमवार को शपथ ग्रहण समारोह के दौरान अपने पिछले राजनयिक आचरण के लिए सार्वजनिक रूप से माफी माँगी। उन्होंने स्वीकार किया कि यून सुक येओल की पिछली सरकार के दौरान विदेश मंत्रालय का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग किया गया था। उन्होंने कहा, “पिछले कुछ वर्षों में राजनयिक मुद्दों का इस्तेमाल घरेलू राजनीतिक लाभ के लिए किया गया है। कूटनीति,जहाँ राष्ट्रीय हित और व्यावहारिकता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए,वहाँ अक्सर स्पष्ट रूप से राजनीतिक स्वार्थ हावी रहा है।”

उन्होंने आगे कहा, “विदेश मंत्री के रूप में,मैं जनता से तहे दिल से माफी माँगता हूँ। विदेश मंत्रालय पूरी प्रक्रिया के दौरान जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया है। मैं इस तरह की गलतियों की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए मंत्रालय में सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाने का संकल्प लेता हूँ।” उनका यह सार्वजनिक माफीनामा दक्षिण कोरियाई राजनीति में एक असामान्य घटना मानी जा रही है,क्योंकि अक्सर उच्च पदस्थ अधिकारी सार्वजनिक रूप से इस तरह अपनी गलती स्वीकार नहीं करते।

चो ह्यून ने अपने भाषण में कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और स्थिरता को दक्षिण कोरिया की सर्वोच्च कूटनीतिक प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में भू-राजनीतिक अस्थिरता बढ़ रही है और इस परिस्थिति में दक्षिण कोरिया को अत्यंत सावधानी से कूटनीतिक कदम उठाने होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर कोरिया के साथ तनाव कम करना और बातचीत के रास्ते खोलना उनकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर होगा।

योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार,चो ने कहा, “हमें प्रायद्वीप में तनाव कम करने और उत्तर कोरिया के साथ संवाद के रास्ते खोलने के लिए अमेरिका के साथ मिलकर काम करना चाहिए। उत्तर कोरिया के परमाणु मुद्दों को सुलझाने के प्रयासों में ठोस प्रगति की आवश्यकता है। केवल बयानबाजी या अस्थायी समझौतों से काम नहीं चलेगा,बल्कि एक स्थायी और व्यावहारिक समाधान की जरूरत है।”

चो का यह बयान ऐसे समय में आया है,जब कोरियाई प्रायद्वीप में लगातार सैन्य गतिविधियों और उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षणों ने क्षेत्र में अस्थिरता को बढ़ा दिया है। अमेरिका और दक्षिण कोरिया संयुक्त सैन्य अभ्यासों के जरिए उत्तर कोरिया पर दबाव बना रहे हैं,जबकि उत्तर कोरिया इन अभ्यासों को अपनी सुरक्षा के खिलाफ मानता है। इस परिस्थिति में चो ह्यून की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि वे शांति बहाली के लिए संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता देने की बात कर रहे हैं।

चो की नियुक्ति राष्ट्रपति ली जे म्युंग द्वारा की गई है,जिन्होंने पिछले महीने पदभार संभाला था। ली जे म्युंग ने दिसंबर में मार्शल लॉ लागू करने के बाद पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को पद से हटाया था। उनके सत्ता में आने के बाद से दक्षिण कोरिया की विदेश नीति में बदलाव की उम्मीद की जा रही थी और चो ह्यून की नियुक्ति इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चो ह्यून के नेतृत्व में दक्षिण कोरिया अपनी विदेश नीति में पारदर्शिता और व्यावहारिकता पर जोर देगा। उनका सार्वजनिक माफीनामा एक राजनीतिक संदेश भी है,जिससे यह संकेत मिलता है कि नई सरकार पिछली गलतियों को स्वीकार कर उन्हें सुधारने के लिए गंभीर है। साथ ही,चो ह्यून की कूटनीतिक कुशलता और अनुभव उत्तर कोरिया के साथ संभावित वार्ताओं को नई दिशा दे सकते हैं।

भारत के लिए भी चो ह्यून की नियुक्ति महत्वपूर्ण है। एस.जयशंकर का उन्हें बधाई संदेश इस ओर इशारा करता है कि भारत और दक्षिण कोरिया दोनों अपनी विशेष रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना चाहते हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा, अर्धचालक प्रौद्योगिकी,नवीकरणीय ऊर्जा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग की बड़ी संभावनाएँ हैं। चो ह्यून के नेतृत्व में दक्षिण कोरिया की विदेश नीति में स्थिरता और व्यावहारिकता आने की उम्मीद है,जो भारत के साथ उसके संबंधों के लिए भी सकारात्मक होगी।

चो ह्यून के इस माफीनामे और उनकी कूटनीतिक प्राथमिकताओं ने न केवल दक्षिण कोरिया की जनता का ध्यान खींचा है,बल्कि वैश्विक स्तर पर भी उनकी छवि एक ईमानदार और जिम्मेदार नेता की बन रही है। अब देखना यह होगा कि वे अपने वादों को कितनी तेजी से अमल में लाते हैं और कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और स्थिरता स्थापित करने की दिशा में कितनी सफलता हासिल करते हैं।