चेन्नई,20 अगस्त (युआईटीवी)- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार को तमिलनाडु के मामल्लापुरम के पास कोवलम स्थित एक होटल में 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। केंद्र और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच बेहतर समन्वय तथा अंतरराज्यीय मुद्दों के समाधान के लिहाज से इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में आंतरिक सुरक्षा,आर्थिक विकास,औद्योगिक निवेश,जल बँटवारे से जुड़े विवाद, शिक्षा,स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचे समेत कई अहम विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
अमित शाह बुधवार रात करीब नौ बजे नई दिल्ली से विशेष विमान के जरिए चेन्नई पहुँचे। चेन्नई पहुँचने के बाद उन्होंने एक उच्चस्तरीय बैठक में हिस्सा लिया। इसके बाद गुरुवार को दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक आयोजित की जा रही है। परिषद की बैठक और उसकी स्थायी समिति का सत्र भी इसी स्थान पर आयोजित होगा। अधिकारियों के अनुसार, बैठक सुबह करीब 10:30 बजे शुरू होकर दोपहर 1:30 बजे तक चलने की संभावना है।
दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद के अध्यक्ष केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हैं,जबकि स्थायी समिति की अध्यक्षता तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय करेंगे। बैठक में दक्षिण भारत से जुड़े कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। अधिकारियों के मुताबिक,बैठक का मुख्य उद्देश्य विभिन्न राज्यों के बीच सहयोग को मजबूत करना और ऐसे मुद्दों का संवाद के जरिए समाधान तलाशना है,जिनका प्रभाव एक से अधिक राज्यों पर पड़ता है।
क्षेत्रीय परिषदों को केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। इनके जरिए राज्यों के बीच सीमा,जल,परिवहन,सुरक्षा और विकास से जुड़े विषयों पर बातचीत का अवसर मिलता है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की बैठकें सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत करने में मदद करती हैं। केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय विकास के लिए ‘टीम इंडिया’ की अवधारणा पर भी जोर दिया जाता रहा है और क्षेत्रीय परिषदों को इसी दृष्टिकोण के अनुरूप महत्वपूर्ण मंच माना जाता है।
गुरुवार की बैठक में कई राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं। इनमें संसद के निर्वाचन क्षेत्रों का प्रस्तावित परिसीमन एक प्रमुख विषय हो सकता है। दक्षिणी राज्यों की ओर से परिसीमन को लेकर पहले भी कई तरह की चिंताएँ सामने आती रही हैं। ऐसे में क्षेत्रीय परिषद की बैठक में इस मुद्दे पर राज्यों के विचार सामने आने की संभावना है।
कावेरी नदी के जल बँटवारे का विवाद भी बैठक में महत्वपूर्ण विषय हो सकता है। कावेरी जल को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं। दोनों राज्यों के लिए यह विषय राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बेहद संवेदनशील रहा है। इसके साथ ही कर्नाटक की मेकेदातु बाँध परियोजना का मुद्दा भी चर्चा में आने की संभावना है। तमिलनाडु इस परियोजना को लेकर अपनी आपत्तियाँ पहले भी व्यक्त करता रहा है। ऐसे में परिषद की बैठक दोनों राज्यों के बीच संवाद के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकती है।
बैठक में दक्षिणी क्षेत्र की लंबित बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की भी समीक्षा किए जाने की संभावना है। अधिकारियों के मुताबिक,राज्यों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करने, परिवहन नेटवर्क को मजबूत बनाने और लंबित परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के उपायों पर विचार किया जा सकता है। औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने और क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए केंद्र तथा राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय पर भी चर्चा हो सकती है।
आंतरिक सुरक्षा बैठक के प्रमुख एजेंडों में शामिल रहने की संभावना है। अधिकारियों के अनुसार,विभिन्न राज्यों के बीच खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान को और मजबूत बनाने तथा सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के उपायों पर चर्चा की जाएगी। दक्षिणी राज्यों में मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने के लिए संयुक्त रणनीति तैयार करने पर भी विचार हो सकता है।
प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राज्यों के बीच समन्वय मजबूत करना भी बैठक के महत्वपूर्ण विषयों में शामिल है। दक्षिण भारत के कई राज्य चक्रवात,भारी बारिश,बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित होते रहे हैं। ऐसे में आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्यों के लिए राज्यों और केंद्र के बीच त्वरित समन्वय स्थापित करने की व्यवस्था को बेहतर बनाने पर चर्चा की जा सकती है।
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों में न्याय प्रक्रिया को तेज करने के लिए विशेष त्वरित अदालतों की स्थापना का मुद्दा भी बैठक में उठने की संभावना है। इस संबंध में राज्यों में लंबित मामलों के तेजी से निपटारे और पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदमों पर विचार किया जा सकता है। कानून-व्यवस्था से जुड़े इस विषय को राज्यों के बीच बेहतर समन्वय के साथ आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।
बैठक में तटीय सुरक्षा का मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहेगा। दक्षिण भारत का लंबा समुद्री तट होने के कारण समुद्री सुरक्षा,अवैध गतिविधियों की निगरानी और तटीय क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय की विशेष आवश्यकता है। मत्स्य पालन से जुड़े मुद्दों पर भी राज्यों और केंद्र के बीच चर्चा हो सकती है। मछुआरों से संबंधित समस्याओं,समुद्री संसाधनों के इस्तेमाल और तटीय समुदायों के हितों से जुड़े प्रस्तावों पर विचार किए जाने की संभावना है।
केंद्र प्रायोजित कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का मुद्दा भी बैठक के एजेंडे में शामिल हो सकता है। राज्यों में इन योजनाओं की प्रगति,उनके क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं और लाभार्थियों तक योजनाओं का फायदा पहुँचाने के तरीकों पर चर्चा की जा सकती है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में राज्यों के बीच सहयोग तथा केंद्र से मिलने वाले सहयोग को बेहतर बनाने पर भी विचार संभव है।
तमिलनाडु में हाल ही में अंतरराज्यीय सीमा के पास हुई गोलीबारी की घटना भी बैठक में उठ सकती है। इस घटना में कथित तौर पर कर्नाटक के वन कर्मियों की ओर से की गई गोलीबारी में तमिलनाडु के तीन लोगों की मौत हो गई थी। तमिलनाडु सरकार ने इस मामले की विस्तृत जाँच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। ऐसे में यह मुद्दा दोनों राज्यों के बीच चर्चा का संवेदनशील विषय बन सकता है।
बैठक में दक्षिणी राज्यों के कई वरिष्ठ नेता शामिल होने की उम्मीद है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क,कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार और केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशान के इसमें शामिल होने की संभावना है। इसके अलावा पुडुचेरी के उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल तथा लक्षद्वीप के प्रतिनिधि भी विचार-विमर्श में हिस्सा ले सकते हैं।
बैठक में संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। अधिकारियों की भागीदारी का उद्देश्य विभिन्न विषयों पर तथ्यात्मक जानकारी साझा करना और लंबित मामलों के समाधान के लिए व्यावहारिक रास्ते तलाशना होगा। क्षेत्रीय परिषद की बैठक में जिन विषयों पर सहमति बनती है,उन पर आगे संबंधित मंत्रालयों और राज्य सरकारों के स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है।
दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की यह बैठक ऐसे समय में हो रही है,जब दक्षिण भारत में जल, बुनियादी ढाँचे,परिसीमन और सुरक्षा जैसे कई मुद्दे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे में अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली यह बैठक केवल नियमित प्रशासनिक बैठक तक सीमित नहीं रहने की संभावना है। विभिन्न राज्यों के बीच मतभेद वाले मुद्दों पर आम सहमति बनाने और विकास से जुड़े विषयों को आगे बढ़ाने की दिशा में इसमें महत्वपूर्ण चर्चा हो सकती है।
केंद्र और राज्यों के बीच संवाद तथा राज्यों के आपसी सहयोग को बढ़ावा देना क्षेत्रीय परिषदों का प्रमुख उद्देश्य है। ऐसे में गुरुवार की बैठक से यह उम्मीद की जा रही है कि संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर चर्चा के साथ-साथ विकास,सुरक्षा और जनकल्याण से जुड़े क्षेत्रों में बेहतर समन्वय का रास्ता भी तैयार होगा। खासतौर पर कावेरी जल विवाद, मेकेदातु परियोजना,परिसीमन और अंतरराज्यीय सुरक्षा जैसे विषयों पर होने वाली चर्चा पर सभी की नजर रहेगी।
