नई दिल्ली,12 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोमवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट हर नागरिक की शिकायत सुनने के लिए उपलब्ध है और अदालत कानून के अनुसार मामलों पर विचार करती है, ताकि जिन लोगों को राहत मिलनी चाहिए, उन्हें न्याय मिल सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत में याचिका दाखिल करने का अधिकार आम नागरिकों से लेकर निर्वाचित प्रतिनिधियों तक सभी को है। मुख्य न्यायाधीश ने यह टिप्पणी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के 33वें स्थापना दिवस समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान की।
सूर्यकांत से एक पत्र और उसके जवाब को लेकर सवाल पूछा गया था। इस पर उन्होंने बताया कि पत्र उन्हें रविवार को मिला था और उन्होंने उसी रात उसका जवाब भी दे दिया। मुख्य न्यायाधीश के मुताबिक,पत्र पर उससे एक दिन पहले की तारीख दर्ज थी, लेकिन उनके बाहर होने के कारण वह उन्हें बाद में प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि अपने जवाब में उन्होंने कुछ कारण स्पष्ट किए हैं और संबंधित व्यक्ति से मुलाकात नहीं कर पाने की असमर्थता जताई है।
मुख्य न्यायाधीश ने पत्र की विषयवस्तु पर विस्तार से टिप्पणी करने से परहेज किया। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि इस संबंध में जानकारी के लिए पत्र लिखने वाले व्यक्ति से ही संपर्क किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने पत्र की गोपनीयता बनाए रखी है। उनके इस बयान से संकेत मिला कि वह निजी संवाद के विवरण को सार्वजनिक चर्चा का विषय नहीं बनाना चाहते।
सुप्रीम कोर्ट की भूमिका और आम नागरिकों की पहुँच को लेकर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत लेकर न्यायालय आ सकता है और याचिका दायर कर सकता है। उन्होंने इस अधिकार को केवल आम लोगों तक सीमित नहीं बताया,बल्कि निर्वाचित संस्थाओं के सदस्यों को भी इसमें शामिल किया।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि भारत के प्रत्येक नागरिक को अदालत में अपनी बात रखने का अधिकार है। अदालत संबंधित मामले पर कानून के अनुसार विचार करेगी और यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी कि जिस व्यक्ति को कानूनी रूप से राहत मिलनी चाहिए,उसे वह प्राप्त हो। उनके बयान में न्याय तक पहुँच और कानूनी प्रक्रिया के महत्व पर जोर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने का अधिकार होने का अर्थ यह नहीं है कि हर माँग स्वतः स्वीकार कर ली जाएगी। किसी भी मामले में राहत देने का फैसला संबंधित कानून, उपलब्ध तथ्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर किया जाता है। मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी इसी सिद्धांत को रेखांकित करती है कि अदालत में आने वाले प्रत्येक मामले का निपटारा कानूनी कसौटियों के अनुरूप होना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने ‘एक देश, एक चुनाव’ से संबंधित संयुक्त संसदीय समिति के प्रस्तावित सुप्रीम कोर्ट दौरे के रद्द होने पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इस मामले में हितों के टकराव की आशंका पर विचार करना जरूरी था। इसी वजह से अदालत के प्रशासनिक स्तर पर इस विषय पर चर्चा की गई।
उन्होंने बताया कि उनके और वरिष्ठ न्यायिक सहयोगियों के बीच इस मुद्दे पर सामूहिक रूप से विचार किया गया। सभी की राय थी कि किसी भी संभावित हितों के टकराव की स्थिति से बचना चाहिए। सूर्यकांत के अनुसार,इस मामले में ऐसे कारण मौजूद थे,जिनके चलते सावधानी बरतना आवश्यक था।
‘एक देश, एक चुनाव’ का प्रस्ताव देश में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था से जुड़ा है। इस विषय पर राजनीतिक और संवैधानिक स्तर पर चर्चा जारी है। संयुक्त संसदीय समिति की ओर से सुप्रीम कोर्ट जाने की प्रस्तावित योजना रद्द होने के संदर्भ में मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी ने न्यायपालिका की संस्थागत निष्पक्षता और हितों के टकराव से बचने की आवश्यकता को फिर चर्चा में ला दिया है।
न्यायिक संस्थाओं के लिए निष्पक्षता बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। मुख्य न्यायाधीश ने अपने बयान में किसी व्यक्तिगत विवाद के बजाय संभावित हितों के टकराव से बचने के सामूहिक निर्णय पर जोर दिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर प्रशासनिक पहलू को ध्यान में रखकर विचार किया गया था।
इसी बीच,विपक्षी गठबंधन के प्रस्तावित मार्च को लेकर भी राजधानी में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हैं। यह मार्च विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों की श्रृंखला का हिस्सा बताया जा रहा है। विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं सहित कई मुद्दों को उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग कर रहे हैं।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रस्तावित मार्च को केवल किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम मानने से इनकार किया है। उनका कहना है कि यह मार्च सभी भारतीयों से जुड़ा है। कांग्रेस नेता इस अभियान को व्यापक बनाने और मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ-साथ केंद्र सरकार पर भी दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि एसआईआर प्रक्रिया से सरकार को फायदा हुआ है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच यह मुद्दा विवाद का कारण बना हुआ है। विपक्षी दलों की ओर से प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं,जबकि इन आरोपों और उनसे जुड़े तथ्यों का आकलन संबंधित दस्तावेजों तथा कानूनी प्रक्रियाओं के आधार पर किया जाना आवश्यक है।
प्रस्तावित मार्च को लेकर सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था भी चर्चा में रही है। विपक्षी नेताओं की योजना सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की बताई गई है,हालाँकि,इस कार्यक्रम को लेकर प्रतिबंधों और प्रशासनिक निर्देशों का मुद्दा भी सामने आया है। राजनीतिक दलों के विरोध प्रदर्शन और न्यायिक संस्थाओं से जुड़े घटनाक्रम के बीच राजधानी में गतिविधियाँ बढ़ी हुई हैं।
सोमवार को मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणियाँ ऐसे समय सामने आईं,जब सुप्रीम कोर्ट की भूमिका, ‘एक देश, एक चुनाव’ से जुड़े घटनाक्रम और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। सूर्यकांत ने अपने बयान में अदालत तक पहुँच के अधिकार को दोहराया और स्पष्ट किया कि न्यायालय कानून के अनुरूप शिकायतों पर विचार करता है।
पत्र के जवाब के संबंध में उन्होंने गोपनीयता बनाए रखने की बात कही,जबकि संयुक्त संसदीय समिति के दौरे के मामले में हितों के टकराव से बचने को निर्णय का प्रमुख आधार बताया। दूसरी ओर,विपक्षी दल एसआईआर प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियाँ उठा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग कर रहे हैं।
इन घटनाक्रमों के बीच अदालत की निष्पक्षता,नागरिकों के न्याय पाने के अधिकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जवाबदेही जैसे विषय चर्चा के केंद्र में हैं। मुख्य न्यायाधीश का संदेश स्पष्ट था कि सुप्रीम कोर्ट में कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत लेकर आ सकता है,लेकिन उस पर निर्णय कानून और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार ही होगा।
