चेन्नई,2 मई (युआईटीवी)- तमिलनाडु में 23 अप्रैल को सभी 234 विधानसभा सीटों पर मतदान संपन्न होने के बाद अब सियासी सरगर्मी मतगणना की ओर केंद्रित हो गई है। 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले राज्य की दो प्रमुख राजनीतिक ताकतें द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम पूरी तरह सक्रिय हो चुकी हैं। दोनों ही दलों ने मतगणना दिवस के लिए विशेष रणनीति तैयार करते हुए उच्चस्तरीय ‘वॉर रूम’ स्थापित कर दिए हैं,जिनका उद्देश्य मतगणना प्रक्रिया पर बारीकी से नजर रखना और किसी भी स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देना है।
सूत्रों के मुताबिक,दोनों दलों ने राज्यभर में फैले 62 मतगणना केंद्रों के लिए एक केंद्रीकृत नियंत्रण प्रणाली विकसित की है। इन वॉर रूम को एक तरह से तंत्रिका केंद्र के रूप में तैयार किया गया है,जहाँ से हर पल की जानकारी जुटाई जाएगी और जरूरत पड़ने पर तत्काल निर्णय लिए जाएँगे। इन केंद्रों के जरिए उम्मीदवारों,मतगणना एजेंटों और जिलास्तरीय अधिकारियों के बीच समन्वय को मजबूत किया गया है,ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या भ्रम की स्थिति में तुरंत समाधान किया जा सके।
अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम के सूत्रों ने बताया कि उन्होंने एक व्यापक संचार नेटवर्क स्थापित किया है,जिसमें रिटर्निंग ऑफिसर,जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों जैसे प्रमुख अधिकारियों के संपर्क विवरण पहले से साझा किए गए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि यदि मतगणना के दौरान किसी भी केंद्र पर कोई समस्या उत्पन्न होती है,तो वहाँ मौजूद उम्मीदवार और एजेंट सीधे वॉर रूम से संपर्क कर सकते हैं और तुरंत सहायता प्राप्त कर सकते हैं। इस व्यवस्था से पार्टी को यह भरोसा है कि वह हर स्थिति का प्रभावी ढंग से सामना कर सकेगी।
दूसरी ओर द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम ने भी इसी तरह की रणनीति अपनाई है,लेकिन इसमें एक अतिरिक्त पहलू को शामिल किया गया है। पार्टी ने अपने वॉर रूम में कानूनी विशेषज्ञों और वरिष्ठ समन्वयकों की टीम तैनात की है,जो मतगणना की प्रक्रिया पर कड़ी नजर रखेंगे। यदि कहीं भी कोई विवाद,विसंगति या प्रक्रिया संबंधी चिंता सामने आती है,तो ये विशेषज्ञ तुरंत हस्तक्षेप करेंगे और आवश्यक कानूनी कदम उठाएँगे। पार्टी का मानना है कि इस तरह की तैयारी से हर वोट की सही गिनती सुनिश्चित की जा सकेगी और किसी भी अनियमितता को तुरंत रोका जा सकेगा।
इस बार की तैयारियों के पीछे 2021 के विधानसभा चुनावों का अनुभव भी अहम भूमिका निभा रहा है। उस चुनाव में कई सीटों पर जीत और हार का अंतर बेहद कम था,यहाँ तक कि कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में परिणाम 1,000 से भी कम वोटों के अंतर से तय हुए थे। इस अनुभव ने दोनों प्रमुख दलों को सतर्क कर दिया है और वे किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचना चाहते हैं। यही वजह है कि इस बार मतगणना के अंतिम चरण तक पूरी सतर्कता बरतने की रणनीति अपनाई गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2026 का चुनाव और भी अधिक चुनौतीपूर्ण और दिलचस्प हो सकता है। इस बार नए राजनीतिक खिलाड़ियों के मैदान में उतरने और मतदाताओं की बदलती प्राथमिकताओं के कारण मुकाबला बहुकोणीय हो गया है। ऐसे में वोटों का बँटवारा होने की संभावना अधिक है,जिससे कई सीटों पर बेहद करीबी मुकाबला देखने को मिल सकता है। यह स्थिति न केवल परिणामों को अनिश्चित बनाती है,बल्कि विवादों की संभावना भी बढ़ा देती है।
इसी संभावित स्थिति को ध्यान में रखते हुए दोनों दलों ने अपने संगठनात्मक ढाँचे को पूरी तरह तैयार कर लिया है। वॉर रूम के जरिए हर छोटी-बड़ी जानकारी को रिकॉर्ड किया जाएगा और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही पार्टी नेतृत्व भी लगातार संपर्क में रहेगा,ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत दिशा-निर्देश दिए जा सकें।
मतगणना का दिन जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है,राजनीतिक माहौल में उत्सुकता और तनाव दोनों बढ़ते जा रहे हैं। कार्यकर्ताओं से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक सभी की नजरें अब 4 मई पर टिकी हैं। यह दिन न केवल चुनावी नतीजों का फैसला करेगा,बल्कि राज्य की राजनीतिक दिशा भी तय करेगा।
तमिलनाडु में इस बार का चुनाव सिर्फ मतदान तक सीमित नहीं रहा,बल्कि मतगणना की प्रक्रिया भी उतनी ही अहम हो गई है। द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम दोनों ही यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि कोई भी वोट अनदेखा न हो और हर परिणाम पारदर्शी ढंग से सामने आए। अब देखना यह है कि इन तैयारियों का वास्तविक असर मतगणना के दिन कितना दिखाई देता है और कौन सा दल जनता का विश्वास जीतकर सत्ता तक पहुँचता है।
