एन चंद्रशेखरन

टाटा समूह में बड़े नेतृत्व परिवर्तन की आहट,एन. चंद्रशेखरन ने चेयरमैन पद छोड़ने का फैसला किया,पुनर्नियुक्ति के लिए नहीं करेंगे आवेदन

नई दिल्ली,12 अगस्त (युआईटीवी)- टाटा समूह में एक बड़े नेतृत्व परिवर्तन की शुरुआत हो गई है। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है। हालाँकि,वह अपने मौजूदा कार्यकाल के अंत तक यानी फरवरी 2027 तक चेयरमैन की जिम्मेदारी सँभालते रहेंगे। इसके बाद वह पुनर्नियुक्ति के लिए आवेदन नहीं करेंगे। उनके इस फैसले के बाद टाटा समूह की अगली नेतृत्व व्यवस्था को लेकर चर्चाएँ तेज हो गई हैं।

एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के अनुसार,चंद्रशेखरन का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब पिछले कई महीनों से उनके कार्यकाल के विस्तार को लेकर टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच मतभेद की खबरें सामने आ रही थीं। टाटा समूह देश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित कारोबारी समूहों में शामिल है। ऐसे में टाटा संस के चेयरमैन पद में बदलाव को बेहद महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

एन. चंद्रशेखरन ने अपने बयान में टाटा समूह के साथ अपने लंबे जुड़ाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने टाटा समूह में अपने पेशेवर जीवन के 40 साल पूरे कर लिए हैं। इस प्रतिष्ठित संस्थान में योगदान देने का अवसर उनके लिए बेहद संतोषजनक रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक से टाटा संस का नेतृत्व करना उनके लिए सम्मान और बड़ी जिम्मेदारी की बात रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार,चंद्रशेखरन के पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव को लेकर टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और उनके बीच मतभेद सामने आए थे। बताया जा रहा है कि टाटा समूह के भविष्य के गवर्नेंस ढाँचे,टाटा संस की संभावित लिस्टिंग और बोर्ड में प्रतिनिधित्व जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर दोनों पक्षों के विचार अलग-अलग थे। इन्हीं मतभेदों के चलते चंद्रशेखरन के कार्यकाल को आगे बढ़ाने को लेकर अंतिम सहमति नहीं बन सकी।

टाटा संस टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है। इसके नियंत्रण में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज,टाटा मोटर्स,एयर इंडिया समेत 30 से अधिक प्रमुख कंपनियाँ आती हैं। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इस वजह से समूह की रणनीतिक दिशा और महत्वपूर्ण फैसलों में टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका काफी अहम मानी जाती है।

एन. चंद्रशेखरन का टाटा समूह के साथ संबंध करीब चार दशक पुराना है। उन्होंने वर्ष 1987 में टाटा समूह के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। वर्ष 2009 में वह कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बने। उनके नेतृत्व में कंपनी ने वैश्विक स्तर पर अपना कारोबार बढ़ाया और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अपनी मजबूत स्थिति कायम की।

इसके बाद वर्ष 2017 में चंद्रशेखरन को टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया। उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने कई क्षेत्रों में विस्तार किया। विमानन क्षेत्र में समूह की गतिविधियाँ बढ़ीं और एयर इंडिया के अधिग्रहण के बाद टाटा समूह ने विमानन कारोबार को मजबूत करने की दिशा में कई कदम उठाए। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहन,ऊर्जा,डिजिटल कारोबार और अन्य क्षेत्रों में भी समूह ने निवेश और विस्तार की रणनीति जारी रखी।

हालाँकि,उनके कार्यकाल के दौरान समूह के सामने कई बड़ी चुनौतियाँ भी आईं। एयर इंडिया से जुड़े नियामकीय और परिचालन मुद्दे,सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में बदलती परिस्थितियाँ और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज पर मूल्य निर्धारण का दबाव समूह के लिए चुनौती बने। वहीं,जगुआर लैंड रोवर पर हुए साइबर हमले ने भी समूह के परिचालन को प्रभावित किया। इन चुनौतियों के बावजूद टाटा समूह ने अपने दीर्घकालिक निवेश और विस्तार की योजनाओं को जारी रखा।

टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच मतभेदों का इतिहास भी नया नहीं है। वर्ष 2016 में तत्कालीन चेयरमैन साइरस मिस्त्री को पद से हटाए जाने के बाद टाटा समूह के भीतर नेतृत्व और गवर्नेंस को लेकर बड़ा विवाद सामने आया था। उस समय टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के संबंधों को लेकर काफी चर्चा हुई थी। बाद में चंद्रशेखरन को टाटा संस की कमान सौंपी गई और उन्होंने करीब एक दशक तक समूह का नेतृत्व किया।

अब उनके पद छोड़ने के फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल टाटा संस के अगले चेयरमैन को लेकर है। फरवरी 2027 तक चंद्रशेखरन के पद पर बने रहने से समूह के पास उत्तराधिकारी चुनने और नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए पर्याप्त समय रहेगा। नए चेयरमैन के सामने टाटा समूह की वैश्विक विस्तार योजनाओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ समूह के भीतर बेहतर समन्वय और गवर्नेंस व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती होगी।

चंद्रशेखरन के कार्यकाल के दौरान टाटा समूह ने कई क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी मजबूत की है। अब उनके उत्तराधिकारी के सामने इस विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। साथ ही,टाटा संस की संभावित लिस्टिंग,टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका और बोर्ड में प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे भी आने वाले समय में महत्वपूर्ण बने रह सकते हैं।

करीब 40 वर्षों तक टाटा समूह से जुड़े रहने के बाद एन. चंद्रशेखरन का पुनर्नियुक्ति के लिए आवेदन नहीं करने का फैसला समूह के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। हालाँकि,वह फरवरी 2027 तक चेयरमैन की जिम्मेदारी निभाते रहेंगे,लेकिन अब टाटा समूह के अगले नेतृत्व को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है। आने वाले महीनों में उत्तराधिकारी के चयन से जुड़े फैसले न केवल टाटा संस बल्कि पूरे टाटा समूह की भविष्य की रणनीति और दिशा पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं।