होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा वैश्विक तनाव (तस्वीर क्रेडिट@TheLallantop)

होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ा: ट्रंप का सख्त आदेश,संदिग्ध नावों को तुरंत नष्ट करने के निर्देश

नई दिल्ली,24 अप्रैल (युआईटीवी)- मध्य पूर्व के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक, होर्मुज स्ट्रेट,एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है। इस रणनीतिक जलडमरूमध्य में बढ़ते सुरक्षा खतरे को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी सेना को बेहद सख्त निर्देश जारी किए हैं। ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना को आदेश दिया है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि में शामिल नाव को बिना किसी हिचकिचाहट के तुरंत नष्ट कर दिया जाए,चाहे वह कितनी ही छोटी क्यों न हो।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए साफ कहा कि यदि कोई नाव होर्मुज स्ट्रेट के पानी में बारूदी सुरंगें बिछाने जैसी गतिविधियों में लिप्त पाई जाती है,तो उसे तुरंत गोली मारकर खत्म कर दिया जाए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इस कार्रवाई में किसी भी प्रकार की देरी या संकोच की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। इस बयान के बाद क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

इसके साथ ही ट्रंप ने समुद्र में बिछाई जा रही संभावित बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए चल रहे माइन-स्वीपिंग अभियानों को और तेज करने का निर्देश भी दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी माइन स्वीपर जहाज पहले से ही इस क्षेत्र में सक्रिय हैं,लेकिन अब इस अभियान को तीन गुना गति से आगे बढ़ाया जाए,ताकि समुद्री मार्ग पूरी तरह सुरक्षित किया जा सके। होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और यहाँ किसी भी प्रकार की बाधा का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

अपने बयान में ट्रंप ने ईरान की आंतरिक राजनीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ईरान इस समय नेतृत्व के संकट से जूझ रहा है,जहाँ कड़े रुख वाले और नरम रुख वाले गुटों के बीच संघर्ष चल रहा है। ट्रंप के अनुसार,यह स्थिति न केवल ईरान के भीतर अस्थिरता पैदा कर रही है,बल्कि क्षेत्रीय शांति के लिए भी खतरा बन रही है। उन्होंने दावा किया कि कड़े रुख वाले गुट युद्ध के मैदान में कमजोर पड़ रहे हैं,जबकि अपेक्षाकृत नरम रुख वाले गुटों को अब ज्यादा समर्थन मिल रहा है।

ट्रंप ने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि अमेरिका का होर्मुज स्ट्रेट पर पूरी तरह नियंत्रण है। उनके अनुसार,कोई भी जहाज तब तक इस जलडमरूमध्य में प्रवेश या बाहर नहीं जा सकता जब तक उसे अमेरिकी नौसेना की अनुमति न मिले। उन्होंने यहाँ तक कहा कि इस मार्ग को पूरी तरह “सील” कर दिया गया है और यह स्थिति तब तक बनी रहेगी जब तक ईरान कोई ठोस समझौता नहीं करता।

यह बयान ऐसे समय आया है,जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लंबे समय से बना हुआ है। हालाँकि,हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ युद्धविराम को बढ़ाने का फैसला किया है,लेकिन इसके साथ ही समुद्री और आर्थिक दबाव को बरकरार रखा गया है। यह दोहरी रणनीति अमेरिका की नीति को दर्शाती है,जिसमें एक ओर प्रत्यक्ष सैन्य संघर्ष से बचने की कोशिश की जा रही है,वहीं दूसरी ओर ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लीविट ने इस रणनीति को स्पष्ट करते हुए कहा कि अमेरिका सैन्य हमलों को रोकने के साथ-साथ वित्तीय और समुद्री प्रतिबंधों को और मजबूत कर रहा है। उन्होंने बताया कि ईरान के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत के लिए फिलहाल कोई समय-सीमा तय नहीं की गई है,लेकिन दबाव की नीति जारी रहेगी,ताकि तेहरान को समझौते के लिए मजबूर किया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट में इस प्रकार की सख्ती वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकती है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा संभालता है और यहाँ किसी भी प्रकार की अस्थिरता से तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है। इसके अलावा,समुद्री मार्गों पर बढ़ते सैन्य नियंत्रण से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार भी प्रभावित हो सकता है।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। कई देशों ने पहले भी इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की अपील की है। ऐसे में ट्रंप के ताजा आदेश ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह कदम क्षेत्र में तनाव को और बढ़ाएगा या फिर इसे नियंत्रित करने में मदद करेगा।

होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ती गतिविधियां और अमेरिका की सख्त नीति यह संकेत दे रही है कि आने वाले समय में इस क्षेत्र में स्थिति और जटिल हो सकती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ईरान इस पर कैसी प्रतिक्रिया देता है और क्या दोनों देशों के बीच किसी प्रकार की बातचीत से तनाव को कम किया जा सकता है या नहीं।