हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के अध्यक्ष ब्रायन मास्ट (तस्वीर क्रेडिट@guyongzhe060)

एआई की दौड़ बनी अमेरिका–चीन टकराव का नया मोर्चा,सांसदों और विशेषज्ञों ने बताया राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए निर्णायक चुनौती

वाशिंगटन,20 जनवरी (युआईटीवी)- अमेरिका और चीन के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा अब केवल तकनीकी या आर्थिक मुद्दा नहीं रह गई है,बल्कि यह सीधे तौर पर अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर विषय बन चुकी है। अमेरिका के सांसदों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि आने वाले वर्षों में एआई की यह दौड़ यह तय करेगी कि वैश्विक सैन्य और रणनीतिक शक्ति संतुलन किसके पक्ष में जाएगा। उनका कहना है कि आधुनिक युद्ध प्रणाली,खुफिया तंत्र और आर्थिक प्रभुत्व की बुनियाद अब एडवांस्ड एआई चिप्स और सेमीकंडक्टर तकनीक पर टिकी हुई है।

हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के समक्ष हुई एक अहम सुनवाई में विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि अगले दस वर्षों में एआई के क्षेत्र में बढ़त ही यह तय करेगी कि अमेरिका अपनी तकनीकी और सैन्य श्रेष्ठता बनाए रख पाएगा या चीन उसे चुनौती देने में सफल हो जाएगा। समिति के अध्यक्ष ब्रायन मास्ट ने साफ शब्दों में कहा कि एआई की दौड़ जीतना अमेरिका के लिए केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं,बल्कि राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा की अनिवार्य शर्त बन चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका इस क्षेत्र में पिछड़ता है,तो इसका सीधा असर उसकी सैन्य ताकत और वैश्विक नेतृत्व पर पड़ेगा।

ब्रायन मास्ट के अनुसार,आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग केवल डेटा विश्लेषण या व्यापार तक सीमित नहीं है। यह अब सैन्य कमांड और कंट्रोल सिस्टम,निगरानी तंत्र,साइबर ऑपरेशन और यहाँ तक कि परमाणु हथियारों के आधुनिकीकरण में भी अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य की लड़ाइयाँ बड़ी संख्या में सैनिकों से नहीं,बल्कि तेज और सटीक एआई आधारित सिस्टम से लड़ी जाएँगी और जो देश इस तकनीक में आगे होगा,वही निर्णायक बढ़त हासिल करेगा।

इस सुनवाई में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मैट पॉटिंजर ने चीन को एडवांस्ड अमेरिकी एआई चिप्स की आपूर्ति को लेकर गंभीर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि चीन को एनविडिया जैसी कंपनियों की उन्नत एआई चिप्स तक पहुँच मिलती रही,तो उसकी सैन्य क्षमताएँ बहुत तेजी से बढ़ सकती हैं। पॉटिंजर के मुताबिक,ये चिप्स चीन की साइबर युद्ध क्षमता,ड्रोन तकनीक और खुफिया अभियानों को नई ताकत दे सकती हैं,जिससे अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए खतरा बढ़ जाएगा।

मैट पॉटिंजर ने चीन की उस नीति की ओर भी ध्यान दिलाया,जिसके तहत वहाँ विकसित होने वाली लगभग हर उन्नत तकनीक का सैन्य इस्तेमाल भी किया जाता है। उन्होंने कहा कि चीन में नागरिक और सैन्य तकनीक के बीच की रेखा लगभग खत्म हो चुकी है। जो तकनीक आम उपभोक्ताओं या निजी कंपनियों के लिए बनाई जाती है,वही बाद में सेना और सुरक्षा एजेंसियों के हाथों में पहुँच जाती है। यही वजह है कि अमेरिकी एआई चिप्स का चीन पहुँचना केवल व्यापारिक मामला नहीं,बल्कि रणनीतिक जोखिम भी है।

पूर्व बाइडन प्रशासन अधिकारी जॉन फाइनर ने भी इस मुद्दे पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच एआई अब सबसे अहम प्रतिस्पर्धा का क्षेत्र बन चुका है और इस मोर्चे पर किसी भी तरह की लापरवाही अमेरिका को भारी पड़ सकती है। फाइनर के अनुसार,चीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को एक ऐसी महत्वपूर्ण तकनीक मानता है,जो उसकी आर्थिक वृद्धि और सैन्य महत्वाकांक्षाओं दोनों को आगे बढ़ाने में सक्षम है। इसी सोच के चलते चीन इस क्षेत्र में तेजी से निवेश और विकास कर रहा है।

जॉन फाइनर ने यह भी कहा कि अमेरिका द्वारा एडवांस्ड चिप्स और सेमीकंडक्टर निर्माण उपकरणों के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध चीन की रफ्तार को धीमा करने में अब तक अहम साबित हुए हैं। इन प्रतिबंधों के कारण चीन को अत्याधुनिक चिप्स और उनके निर्माण के लिए जरूरी उपकरण हासिल करने में कठिनाई हो रही है। हालाँकि,विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल समय की लड़ाई है और चीन हर संभव रास्ते से इस कमी को पूरा करने की कोशिश कर रहा है।

विशेषज्ञों ने समिति को बताया कि भारी सरकारी खर्च और बड़े पैमाने पर निवेश के बावजूद चीन अभी तक उन्नत सेमीकंडक्टर का बड़े स्तर पर उत्पादन करने में सक्षम नहीं हो पाया है। खुद चीनी नेतृत्व ने भी कई बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि इस क्षेत्र में देश अभी पीछे है। पॉटिंजर के अनुसार,इसी कमजोरी को दूर करने के लिए चीन विदेशों से एडवांस्ड चिप्स खरीदने की कोशिश कर रहा है और हर हाल में अमेरिका की बराबरी करना चाहता है।

मैट पॉटिंजर ने कहा कि चीन हमें पकड़ने और हम पर हावी होने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अमेरिकी चिप्स खरीदने वाली कई निजी चीनी टेक कंपनियाँ वास्तव में सरकार और सेना के साथ मिलकर काम करती हैं। इस वजह से यह मान लेना गलत होगा कि ये सौदे केवल व्यावसायिक हैं और उनका सैन्य इस्तेमाल नहीं होगा।

सांसदों ने खास तौर पर इस बात पर चिंता जताई कि डीपसीक,अलीबाबा और टेनसेंट जैसी बड़ी चीनी टेक कंपनियाँ अमेरिकी एआई चिप्स का इस्तेमाल कर रही हैं,जबकि इनके चीन के सैन्य और रणनीतिक लक्ष्यों से जुड़े होने के संकेत पहले भी सामने आ चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी कंपनियों को उन्नत अमेरिकी तकनीक की आपूर्ति अमेरिका की सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक खतरा बन सकती है।

हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के सामने रखी गई ये चेतावनियाँ साफ संकेत देती हैं कि अमेरिका और चीन के बीच एआई की दौड़ आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और सुरक्षा पर गहरा असर डालेगी। अमेरिकी नीति निर्माताओं के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के बीच सही संतुलन कैसे बनाएँ,ताकि अमेरिका इस निर्णायक दौड़ में अपनी बढ़त बनाए रख सके।