बेंगलुरु,20 जनवरी (युआईटीवी)- कर्नाटक में एक बार फिर प्रशासन और राजनीति के गलियारों में भारी हलचल मच गई है। सोना तस्करी की आरोपी रान्या राव के पिता और डीजीपी रैंक के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रामचंद्र राव को उनके खिलाफ सामने आए कथित आपत्तिजनक वीडियो के बाद सस्पेंड कर दिया गया है। इस वीडियो के सामने आने के बाद न सिर्फ पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं,बल्कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की सरकार भी तीखे दबाव में आ गई है। मामला बेहद संवेदनशील होने के कारण राज्य की राजनीति से लेकर नौकरशाही तक में इसकी गूँज सुनाई दे रही है।
दरअसल,हाल के दिनों में सोशल मीडिया और कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ,जिसमें कथित तौर पर रामचंद्र राव को अपने कार्यालय में वर्दी पहने हुए अलग-अलग महिलाओं के साथ आपत्तिजनक व्यवहार करते हुए दिखाया गया है। वीडियो में उन्हें महिलाओं को गले लगाते और किस करते हुए देखा जा सकता है। दावा किया जा रहा है कि ये दृश्य डीजीपी कार्यालय के भीतर ही गुप्त रूप से रिकॉर्ड किए गए हैं। वीडियो में अलग-अलग मौकों पर अलग-अलग ड्रेस में महिलाएँ नजर आ रही हैं,जिससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि ये घटनाएँ एक ही दिन की नहीं,बल्कि अलग-अलग समय की हो सकती हैं।
हालाँकि,इस पूरे मामले में अब तक किसी महिला द्वारा जबरदस्ती या उत्पीड़न का औपचारिक आरोप सामने नहीं आया है,लेकिन ड्यूटी के दौरान एक शीर्ष पुलिस अधिकारी के इस तरह के कथित आचरण ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास तौर पर तब,जब यह मामला ऐसे वक्त सामने आया है,जब राव की बेटी रान्या राव पहले से ही सोना तस्करी के गंभीर आरोपों का सामना कर रही हैं। ऐसे में पिता-बेटी से जुड़े विवादों ने सरकार और पुलिस विभाग दोनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
विवाद बढ़ता देख मामला सीधे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया तक पहुँचा। सूत्रों के मुताबिक,वीडियो वायरल होने के बाद मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग से तुरंत विस्तृत रिपोर्ट माँगी थी। बताया जा रहा है कि वीडियो देखने के बाद मुख्यमंत्री काफी नाराज थे और उन्होंने यह जानना चाहा कि आखिर डीजीपी स्तर के अधिकारी के कार्यालय में इस तरह की घटनाएँ कैसे संभव हो सकती हैं। मुख्यमंत्री ने पुलिस महकमे से यह भी पूछा कि कार्यालय की सुरक्षा,निगरानी और आंतरिक अनुशासन व्यवस्था में कहाँ चूक हुई। इसी के बाद सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रामचंद्र राव को सस्पेंड करने का फैसला लिया।
इस फैसले को सरकार की ओर से डैमेज कंट्रोल के तौर पर भी देखा जा रहा है,क्योंकि विपक्ष लगातार सिद्धारमैया सरकार पर कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक नैतिकता को लेकर हमलावर रहा है। वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया कि वरिष्ठ अधिकारियों को संरक्षण दिया जा रहा है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं होती। ऐसे में सस्पेंशन का फैसला सरकार के लिए राजनीतिक रूप से भी जरूरी माना जा रहा है।
दूसरी ओर,रामचंद्र राव ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने दावा किया है कि वायरल वीडियो पूरी तरह से मनगढ़ंत और मॉर्फ्ड है। इंडिया टुडे से बातचीत में राव ने कहा कि उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है और उनकी छवि खराब करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि यह वीडियो झूठा है और बिना किसी जाँच के इस पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए। राव का कहना है कि वे कई साल पहले बेलगावी में तैनात थे और अब अचानक इस तरह का वीडियो सामने आना अपने आप में सवाल पैदा करता है।
रामचंद्र राव ने यह भी कहा कि उन्होंने इस पूरे मामले में अपने वकील से बातचीत कर ली है और कानूनी कार्रवाई की जा रही है। उनके मुताबिक,बिना निष्पक्ष जाँच के किसी नतीजे पर पहुँचना गलत होगा। उन्होंने जाँच की माँग करते हुए कहा कि सच्चाई सामने आनी चाहिए कि वीडियो कहाँ से आया,किसने बनाया और इसके पीछे किसका मकसद है। राव का यह भी दावा है कि कुछ लोग उन्हें और उनके परिवार को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।
इस पूरे विवाद के बीच यह जानकारी भी सामने आई है कि सस्पेंशन से पहले या बाद में रामचंद्र राव ने राज्य के गृह मंत्री से मुलाकात की थी। हालाँकि,इस मुलाकात में क्या बातचीत हुई,इस पर आधिकारिक तौर पर कोई बयान नहीं आया है,लेकिन इस मुलाकात को लेकर भी राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
पुलिस विभाग के भीतर भी इस मामले को लेकर बेचैनी है। एक ओर जहाँ वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ इस तरह के आरोपों से विभाग की छवि को नुकसान पहुँचा है,वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह मामला आंतरिक साजिश का नतीजा है या वास्तव में कोई गंभीर अनुशासनहीनता हुई है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है और क्या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाती है।
सोना तस्करी मामले से शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक संकट में तब्दील हो चुका है। रामचंद्र राव का सस्पेंशन फिलहाल एक शुरुआती कदम माना जा रहा है,लेकिन असली परीक्षा आने वाले दिनों में होगी,जब जाँच के नतीजे सामने आएँगे। यह मामला न सिर्फ एक अधिकारी की व्यक्तिगत साख से जुड़ा है,बल्कि पूरे पुलिस तंत्र की विश्वसनीयता और सरकार की नैतिक जिम्मेदारी पर भी सीधा असर डालता है।
