पारंपरिक खेल

भारत के 5 शीर्ष खेल जिसका जन्मदाता भारत है और जिनका आज भी पालन किया जाता है

23 जनवरी (युआईटीवी)- भारत दुनिया भर में अपनी भोजन, संस्कृति, भाषा, वास्तुकला, खेल आदि विविधता के लिए प्रसिद्ध है। प्राचीन भारत का एक जीवंत सांस्कृतिक इतिहास है, जिसमें विभिन्न तरह के पारंपरिक खेल भी शामिल हैं। समय-समय पर इन पारंपरिक खेलों में सुधार भी हुए,लेकिन आज भी ये पारंपरिक खेल काफी लोकप्रिय हैं और ये खेल स्वास्थ्य लाभों और अपने ऐतिहासिक महत्व से लोगों को आकर्षित करते हैं।

पीढ़ियों से चले आ रहे विभिन्न तरह के पारंपरिक खेल अपने नियम,रणनीतियाँ,इतिहास और मज़ेदार तथ्य इन्हें मनोरंजक गतिविधियों से कहीं अधिक बनाते हैं।

भारत के लोग प्राचीन समय में शारीरिक विकास के लिए कुश्ती,तलवारबाजी,रथ दौड़,मल युद्ध,भाला फेंक,तैराकी इत्यादि का प्रशिक्षण लेते थे। इन सब खेलों के अवशेष हड़प्पा और मोहनजोदड़ो में भी ज्ञात होता है।

सबसे पहले भारत में ही युद्ध कलाओं का विकास किया गया था। उसके बाद इसे पूरे एशिया में बौद्ध धर्म के प्रचार के माध्यम से फैलाया गया।

आइए जानते हैं उन शीर्ष पाँच प्राचीन भारतीय खेलों के बारे में जिस का जन्मदाता भारत है और जिनका आज भी पालन किया जाता है:

1. कबड्डी – कबड्डी को भारत के देशी खेले के रूप में पहचाना जाता है। इस खेल को भारत के पूर्वी भाग में हु तू तू के नाम से जाना जाता है,तो दक्षिण भारत में इसे चेडुगुडु के नाम से जाना जाता है। इस खेल का उद्भव भारत में हुआ था। यह खेल आत्मरक्षा और शिकार के गुणों को सिखाता है। ताम्रपत्र में मिले जानकारी के अनुसार,भगवान कृष्ण और उनके साथी द्वारा द्वापर युग में कबड्डी खेली जाती थी। कबड्डी ने वर्तमान समय में काफी लोकप्रिय हुई है। जिसे देखते हुए 2014 में प्रो कबड्डी लीग की शुरुआत हुई और अब इसके सफलतापूर्वक नौ सीज़न भी पूरे हो गए हैं। बांग्लादेश का राष्ट्रीय खेल कबड्डी है और यह दक्षिण एशिया में एक लोकप्रिय पारंपरिक खेल है। भारत कबड्डी का पहला और एकमात्र चैंपियन है जिसने 2004 में अपने पहले संस्करण के बाद से छह बार ऑल कबड्डी विश्व कप जीता है।

प्रो कबड्डी
प्रो कबड्डी

2. मलखंब- 12वीं शताब्दी में मल्लखंब की उत्पत्ति पहलवानों और योद्धाओं के लिए एक प्रशिक्षण अभ्यास के रूप में हुई थी। मलखंब से अभिप्राय “मल्ला,” जिसका अर्थ है पहलवान, और “खंब,” जिसका अर्थ है ध्रुव है। मलखंब में प्रतिभागी शक्ति, लचीलेपन और संतुलन का प्रदर्शन करते हैं। मल्लखंब में एक ऊर्ध्वाधर लकड़ी के खंभे या लटकती रस्सी पर कलाबाजी और जिमनास्टिक गतिविधियाँ करना होता है। वैश्विक स्तर पर मलखंब को 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में प्रदर्शन के बाद मिला है।

3. कुश्ती – कुश्ती को आज भी दर्शकों द्वारा बहुत प्यार मिलता है। कुश्ती का ही विस्तृत रूप डब्ल्यूडब्ल्यूई, एनएक्सटी है। पहले मनोरंजन के साधन के रूप में कुश्ती को खेला जाता था,यह बहुत ही पुराना खेल है। इस खेल के शारीरिक और मानसिक विकास कई फायदे थे। इस खेल को प्राचीन काल से ही भारत के शैववंथी संत खेलते आए हैं। इस खेल के खेलने से खिलाड़ियों के शरीर बलशाली होते थे।

4.तीरंदाजी – पहली बार तीरंदाजी का शुरुआत भारत में हुआ था। प्राचीन समय में धनुर्वेद नाम से भारत में वेद भी हुआ करता था। जिसमें विस्तार से सभी कलाओं के बारे में बताया जाता था।अभी हाल ही में हांगझोउ में हुए एशियाई खेलों में तीरंदाजी प्रतियोगिताओं में भारत ने 10 पदक – एक स्वर्ण, चार रजत और पाँच कांस्य – जीते थे। इंचियोन 2014 में पुरुष कंपाउंड टीम में रजत चौहान, संदीप कुमार और अभिषेक वर्मा ने स्वर्ण पदक जीता था।

5. खो-खो – मैदानी खेलों के सबसे पुराने रूपों में से एक खो-खो है। इस खेल का मुख्य उद्देश्य भी आत्मरक्षा आक्रमण के कौशल को विकसित करना था।

 

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