वाशिंगटन,11 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान के खिलाफ अपना रुख और कड़ा कर दिया है। ट्रंप ने ईरान से मुआवजे की माँग करते हुए कहा है कि मध्य पूर्व में हुए नुकसान और मौतों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने लेबनान,सीरिया,यमन और गाजा में हुए नुकसान और जानमाल की तबाही का भी जिक्र किया और कहा कि इन घटनाओं के लिए ईरान को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका अब ईरान से उन सभी संघर्षों और घटनाओं के लिए हर्जाना माँगने की तैयारी कर रहा है,जिनमें तेहरान की भूमिका रही है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट के जरिए ईरान से मुआवजे की मांग को दोहराया। उन्होंने कहा कि ईरान अब युद्ध के दौरान हुए नुकसान के लिए मुआवजा माँग रहा है,जबकि तेहरान ने अमेरिका के साथ हुई पिछली किसी बातचीत या बैठक में इस माँग का उल्लेख नहीं किया था। ट्रंप ने इसी संदर्भ में कहा कि अगर ईरान मुआवजे की माँग कर सकता है,तो अमेरिका भी ईरान से अपने नुकसान की भरपाई की माँग करेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह ईरान से उन सभी लोगों के लिए मुआवजा माँग रहे हैं, जिन्हें ईरान से जुड़े हमलों और विभिन्न लड़ाइयों में मारा गया या गंभीर रूप से घायल किया गया। उन्होंने सड़क किनारे लगाए गए बमों और अन्य हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें मारे गए लोगों के परिवारों को भी मुआवजा मिलना चाहिए। ट्रंप ने अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस कोल पर हुए हमले में मारे गए लोगों के परिवारों का भी उल्लेख किया और कहा कि लड़ाई में मारे गए हजारों अन्य लोगों के परिवारों को भी मुआवजा दिया जाना चाहिए।
ट्रंप ने ईरान में पिछले कई दशकों के दौरान मारे गए प्रदर्शनकारियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ईरान को पिछले 50 वर्षों में वहाँ मारे गए प्रदर्शनकारियों के परिवारों को भी मुआवजा देना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने पिछले पाँच महीनों में मारे गए 52 हजार लोगों का भी उल्लेख किया और कहा कि इन मौतों को भी मुआवजे की माँग में शामिल किया जाएगा। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को निर्देश दिया है कि भविष्य में ईरान के साथ होने वाली किसी भी बातचीत में इस माँग को मजबूती से रखा जाए।
ट्रंप के इस बयान से साफ संकेत मिल रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत अब केवल युद्धविराम या सैन्य गतिविधियों को रोकने तक सीमित नहीं रहने वाली है। अमेरिका की ओर से पिछली घटनाओं के लिए मुआवजे की माँग को बातचीत की शर्त के तौर पर सामने रखने की तैयारी की जा रही है। इससे दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव और बढ़ सकता है।
दरअसल,इससे पहले ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने को लेकर अमेरिका के सामने मुआवजे की माँग रखे जाने की बात सामने आई थी। ईरान ने कथित तौर पर अमेरिका से आर्थिक भुगतान के साथ-साथ क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों और नौसैनिक नाकेबंदी को समाप्त करने की माँग की थी। इसके बाद ट्रंप ने पलटवार करते हुए कहा कि मुआवजा देने की बजाय ईरान को अमेरिका को हुए नुकसान की भरपाई करनी चाहिए।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच विवाद पहले से ही गंभीर बना हुआ है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या समुद्री आवाजाही में बाधा का सीधा असर अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच मुआवजे और सैन्य गतिविधियों को लेकर बढ़ता विवाद वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बना हुआ है।
इसी बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह मोजतबा खामेनेई ने देश की सैन्य और सुरक्षा तैयारियों को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। उन्होंने ईरान की सेना और बासिज की रक्षात्मक सुरक्षा क्षमता तथा तैयारियों को मजबूत करने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि ईरान को देश के खिलाफ किसी भी स्तर और किसी भी प्रकार के पारंपरिक या आधुनिक खतरे का समय पर,प्रभावी और मजबूत जवाब देने के लिए तैयार रहना होगा।
ईरानी नेतृत्व की ओर से सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने पर दिया जा रहा जोर अमेरिका के साथ जारी तनाव के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ईरान की प्राथमिकता अपनी रक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना तथा भविष्य में किसी भी संभावित हमले या सुरक्षा चुनौती से निपटने के लिए सैन्य तैयारियों को बेहतर बनाना है। इसके लिए पारंपरिक सैन्य क्षमताओं के साथ आधुनिक सुरक्षा तकनीकों और जवाबी कार्रवाई की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
अयातुल्लाह मोजतबा खामेनेई ने ईरान की सशस्त्र सेनाओं के जनरल स्टाफ और खतम अल-अनबिया केंद्रीय मुख्यालय के बीच एकीकरण की प्रक्रिया पूरी करने को भी महत्वपूर्ण लक्ष्य बताया है। इस कदम का उद्देश्य देश की सैन्य कमान और रणनीतिक संचालन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना माना जा रहा है। ईरानी नेतृत्व का जोर इस बात पर है कि किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में सेना और सुरक्षा संस्थानों के बीच त्वरित और प्रभावी समन्वय हो।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच दोनों देशों के बयान एक-दूसरे से बिल्कुल अलग दिशा में दिखाई दे रहे हैं। एक ओर ट्रंप ईरान से पिछली घटनाओं और युद्ध में हुए नुकसान के लिए मुआवजा माँगने की बात कर रहे हैं, वहीं ईरान अपनी सैन्य और रक्षात्मक क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच किसी संभावित समझौते की राह आसान नजर नहीं आ रही है।
ट्रंप ने जिस तरह भविष्य की किसी भी बातचीत में मुआवजे की माँग को शामिल करने का निर्देश अपने प्रतिनिधियों को दिया है,उससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका ईरान के साथ वार्ता में अपने पुराने नुकसान और मध्य पूर्व में हुई घटनाओं को प्रमुख मुद्दा बनाने की तैयारी कर रहा है। दूसरी ओर ईरान भी अपनी सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने और किसी भी संभावित खतरे का सामना करने की तैयारी में जुटा है।
अब दोनों देशों के बीच संभावित बातचीत में मुआवजे का मुद्दा कितना महत्वपूर्ण बनता है, यह देखने वाली बात होगी। यदि अमेरिका अपनी माँग पर कायम रहता है और ईरान इसे स्वीकार नहीं करता है,तो पहले से तनावपूर्ण संबंधों में और खिंचाव आ सकता है। वहीं मध्य पूर्व में जारी अस्थिरता के बीच लेबनान,सीरिया,यमन और गाजा का मुद्दा भी अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है। ऐसे में ट्रंप की नई माँग और ईरान की बढ़ती सैन्य तैयारियां आने वाले समय में क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति पर गहरा असर डाल सकती हैं।
