मुकेश अंबानी

भारतीय शेयर बाजार में हलचल मचाने आ रहा है रिलायंस जियो का आईपीओ,2026 की पहली छमाही में आने की संभावना

नई दिल्ली,30 अगस्त (युआईटीवी)- भारत के सबसे बड़े औद्योगिक समूहों में से एक रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने निवेशकों के लिए बड़ा ऐलान कर दिया है। कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने 48वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) के दौरान घोषणा की कि उनकी टेलीकॉम और डिजिटल सेवाओं की कंपनी रिलायंस जियो अगले साल, यानी 2026 की पहली छमाही में अपना आईपीओ लेकर आएगी। लंबे समय से निवेशकों और बाजार विश्लेषकों को जिस घड़ी का इंतजार था,वह अब करीब आती दिख रही है।

मुकेश अंबानी की इस घोषणा ने निवेशकों में उत्साह की लहर पैदा कर दी है। खासकर इसलिए क्योंकि यह आईपीओ भारतीय शेयर बाजार के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बनने की क्षमता रखता है। उद्योग जगत के विशेषज्ञों और बाजार के जानकारों के अनुसार,इसका आकार और वैल्यूएशन दोनों ही ऐसे स्तर पर होंगे,जो अब तक देश में किसी भी कंपनी ने हासिल नहीं किया है।

रिलायंस जियो की प्रगति और उसकी व्यापक पहुँच को देखते हुए बाजार में पहले से ही इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि जब भी कंपनी आईपीओ लेकर आएगी,वह रिकॉर्ड तोड़ेगी। अब जबकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि हो गई है,तो स्वाभाविक है कि इसकी तुलना अब तक के सबसे बड़े आईपीओ हुंडई मोटर इंडिया और अन्य कंपनियों से होने लगी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक,जियो के आईपीओ को लेकर निवेशकों में सबसे बड़ी जिज्ञासा इसके साइज और वैल्यूएशन को लेकर है। बिजनेस टुडे की एक रिपोर्ट में एसबीआई सिक्योरिटीज के फंडामेंटल रिसर्च हेड सनी अग्रवाल ने कहा है कि रिलायंस जियो का वैल्यूएशन लगभग 113 से 120 अरब डॉलर,यानी लगभग 10 से 10.50 लाख करोड़ रुपये के बीच हो सकता है। यह आँकड़ा अकेले ही भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में जियो की ताकत और उसके बाजार पर प्रभुत्व को दर्शाता है।

अग्रवाल के अनुसार,यदि कंपनी अपने वैल्यूएशन का केवल 5 फीसदी हिस्सा भी बेचने का निर्णय लेती है,तो आईपीओ का आकार लगभग 50,000 से 52,500 करोड़ रुपये तक हो सकता है। यह राशि भारतीय शेयर बाजार में अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ साबित होगी,जो हुंडई मोटर इंडिया द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड से कहीं अधिक होगी। हुंडई ने अपने आईपीओ के जरिए 27,850 करोड़ रुपये जुटाए थे।

इस संभावित साइज की पुष्टि अरिहंत कैपिटल मार्केट्स के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर अर्पित जैन ने भी की है। उनका मानना है कि रिलायंस जियो आईपीओ के जरिए लगभग 52,000 करोड़ रुपये तक जुटा सकती है। यह न केवल निवेशकों के लिए,बल्कि पूरे भारतीय शेयर बाजार के लिए एक ऐतिहासिक क्षण साबित होगा।

कंपनी की ग्रोथ स्टोरी भी इस विशाल वैल्यूएशन को सही ठहराती है। रिलायंस जियो ने अपने लॉन्च के बाद से ही भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में बड़ा बदलाव किया है। किफायती डेटा प्लान और तेज इंटरनेट सेवाओं ने जियो को 500 मिलियन (50 करोड़) ग्राहकों का आँकड़ा पार करने में मदद की है। इस तरह की विशाल ग्राहक संख्या अपने आप में ही जियो के भरोसे और लोकप्रियता की गवाही देती है।

जियो को पहले से ही बड़े अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों का साथ मिला है। 2020 में गूगल और फेसबुक की पेरेंट कंपनी मेटा ने मिलकर इसमें लगभग 20 अरब डॉलर का निवेश किया था। उस समय कंपनी का वैल्यूएशन करीब 58 अरब डॉलर था,लेकिन अब छह सालों में इसके दोगुना बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है,तो निवेशकों को आने वाले समय में बड़ा रिटर्न देखने को मिलेगा।

भारतीय शेयर बाजार की पिछली तस्वीर देखें,तो अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ हुंडई मोटर इंडिया का रहा है,जिसने 27,850 करोड़ रुपये जुटाए। इसके बाद क्रमशः एलआईसी ऑफ इंडिया (21,000 करोड़ रुपये), पेटीएम की मूल कंपनी वन97 कम्युनिकेशन (18,300 करोड़ रुपये) और कोल इंडिया (15,200 करोड़ रुपये) का नाम आता है। रिलायंस जियो का संभावित आईपीओ इन सभी से कहीं आगे निकल जाएगा।

जियो का आईपीओ न केवल भारतीय निवेशकों के लिए,बल्कि वैश्विक निवेशकों के लिए भी बड़ा आकर्षण बनने वाला है। इसका कारण है भारतीय डिजिटल बाजार की तेजी से बढ़ती संभावनाएँ और जियो की उसमें मजबूत पकड़। मोबाइल सेवाओं के अलावा जियो ने ब्रॉडबैंड,डिजिटल पेमेंट्स,स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म और कई अन्य डिजिटल सेवाओं में भी अपनी पहुँच बनाई है।

निवेशकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि कंपनी कब तक आईपीओ का विस्तृत खाका पेश करेगी और शेयरों की कीमत किस स्तर पर तय की जाएगी। हालाँकि,अभी से यह साफ हो गया है कि रिलायंस जियो का आईपीओ भारतीय शेयर बाजार में नए आयाम स्थापित करने वाला होगा।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि मुकेश अंबानी का यह कदम न केवल रिलायंस जियो के लिए मील का पत्थर साबित होगा,बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार को भी वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाएगा। जिस पैमाने पर जियो यह आईपीओ लेकर आ रही है,उससे आने वाले वर्षों में भारतीय कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा का स्तर भी और ऊँचा होगा। निवेशकों के लिए यह एक ऐतिहासिक अवसर होगा,जहाँ वे भारत की सबसे बड़ी डिजिटल और टेलीकॉम कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने का मौका पाएँगे।