बांकीपुर उपचुनाव में जीत के बाद प्रशांत किशोर ने ली विधायक पद की शपथ (तस्वीर क्रेडिट@Munnamadhav33)

बांकीपुर उपचुनाव में जीत के बाद प्रशांत किशोर ने ली विधायक पद की शपथ,बोले- बिहार के लिए कुछ कर सकूँ यही सोच

पटना,17 अगस्त (युआईटीवी)- बिहार की राजनीति में जन सुराज पार्टी के लिए सोमवार का दिन महत्वपूर्ण रहा। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जीत दर्ज करने के बाद पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने विधायक पद की शपथ ली। बिहार विधानसभा के मुख्य भवन में स्थित विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार के कार्यालय कक्ष में आयोजित समारोह में उन्होंने विधानसभा सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण की। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस दौरान जन सुराज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती,पार्टी के प्रवक्ता कुमार सौरभ सिंह सहित कई अन्य नेता मौजूद रहे।

शपथ लेने के बाद प्रशांत किशोर ने मीडिया से बातचीत में विधानसभा का सदस्य बनने को अपने लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा का सदस्य बनना उनके लिए बहुत गर्व की बात है,क्योंकि इस सदन से भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर,नीतीश कुमार और लालू यादव जैसे नेताओं ने सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि इनके अलावा सैकड़ों विधायकों और सदन के सदस्यों ने समाज और बिहार की बेहतरी के लिए अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष समर्पित किए हैं। इन सभी से प्रेरणा लेकर प्रदेश और समाज के लिए कुछ कर सकें,यही उनकी सोच है।

प्रशांत किशोर की विधानसभा में एंट्री जन सुराज पार्टी के लिए भी एक महत्वपूर्ण राजनीतिक पड़ाव मानी जा रही है। बांकीपुर उपचुनाव में जीत के साथ वह पार्टी के टिकट पर निर्वाचित होने वाले पहले विधायक बने हैं। जन सुराज पार्टी ने चुनावी राजनीति में अपेक्षाकृत हाल में कदम रखा है और ऐसे में राजधानी पटना की बांकीपुर जैसी चर्चित सीट पर जीत ने पार्टी को बिहार विधानसभा में पहली औपचारिक उपस्थिति दिलाई है।

बांकीपुर विधानसभा सीट के लिए मतदान 30 जुलाई को हुआ था,जबकि मतगणना 3 अगस्त को हुई। मतगणना के दौरान प्रशांत किशोर ने लगातार अपनी बढ़त बनाए रखी और अंत में 19,324 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। उन्हें कुल 64,151 वोट मिले। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा को 44,827 वोट हासिल हुए। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल की उम्मीदवार रेखा गुप्ता 14,273 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।

इस चुनाव परिणाम ने बांकीपुर में लंबे समय से चले आ रहे भाजपा के राजनीतिक प्रभाव को भी झटका दिया। यह सीट वर्ष 1995 से भाजपा के नियंत्रण में रही थी और इसे पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। ऐसे में प्रशांत किशोर की जीत को केवल एक उपचुनाव का परिणाम नहीं,बल्कि बांकीपुर के राजनीतिक समीकरण में बदलाव के रूप में भी देखा जा रहा है। जन सुराज के लिए यह परिणाम इसलिए भी अहम है क्योंकि पार्टी ने अपनी चुनावी पहचान मजबूत करने की दिशा में शुरुआत ही एक बड़े राजनीतिक केंद्र से की है।

विधायक पद की शपथ लेने के बाद प्रशांत किशोर ने लखीसराय के अशोक धाम मंदिर में हुई भगदड़ की घटना पर भी प्रतिक्रिया दी। जब उनसे इस हादसे को लेकर सवाल किया गया,तो उन्होंने कहा कि उन्हें अभी-अभी घटना की जानकारी मिली है और वे वहाँ जाएँगे। सावन के तीसरे सोमवार को अशोक धाम मंदिर के पास भगदड़ मचने से कई श्रद्धालु इसकी चपेट में आ गए थे। हादसे में कई लोगों की मौत और कई श्रद्धालुओं के घायल होने की जानकारी सामने आई है। घटना के बाद प्रशासन और सरकार की ओर से राहत एवं बचाव कार्य चलाया जा रहा है।

प्रशांत किशोर के लिए यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि चुनावी राजनीति में सक्रिय भूमिका लेने के बाद यह उनकी पहली चुनावी सफलता है। इससे पहले वह लंबे समय तक विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं के लिए चुनावी रणनीति बनाने के लिए जाने जाते रहे हैं। जन सुराज के जरिए उन्होंने बिहार की राजनीति में सीधे उतरने का फैसला किया और अब विधानसभा में खुद निर्वाचित होकर पहुँचे हैं। बांकीपुर की जीत ने उनके राजनीतिक अभियान को एक निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में नई दिशा दी है।

विधायक के रूप में शपथ लेने के साथ अब प्रशांत किशोर की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। चुनाव प्रचार के दौरान जिन मुद्दों और अपेक्षाओं को लेकर उन्होंने जनता के बीच अपनी बात रखी,उन्हें विधानसभा में उठाना उनके लिए महत्वपूर्ण होगा। साथ ही बांकीपुर के मतदाताओं की स्थानीय समस्याओं और विकास से जुड़े मुद्दों पर भी उन्हें काम करना होगा। जन सुराज पार्टी की ओर से उन्हें बिहार विधानसभा में पार्टी की पहली आवाज के रूप में देखा जा रहा है।

बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम बिहार की राजनीति में इसलिए भी चर्चा का विषय बना क्योंकि एक ओर भाजपा का मजबूत जनाधार वाला क्षेत्र माना जाने वाला विधानसभा क्षेत्र था,वहीं दूसरी ओर जन सुराज जैसी नई राजनीतिक ताकत चुनाव मैदान में थी। प्रशांत किशोर की जीत ने इस मुकाबले को खास बना दिया। उनके पक्ष में पड़े 64 हजार से अधिक मतों ने यह संकेत दिया कि बांकीपुर में मतदाताओं के एक बड़े हिस्से ने नए राजनीतिक विकल्प को समर्थन दिया।

अब विधायक के तौर पर प्रशांत किशोर की भूमिका पर राजनीतिक गलियारों की नजर रहेगी। विधानसभा में उनकी मौजूदगी जन सुराज पार्टी को अपनी नीतियों और बिहार से जुड़े मुद्दों को सीधे सदन में उठाने का अवसर देगी। वहीं,उनके सामने अपने चुनावी वादों और राजनीतिक दावों को जमीन पर उतारने की चुनौती भी होगी।

शपथ ग्रहण समारोह के साथ प्रशांत किशोर ने औपचारिक रूप से बिहार विधानसभा के सदस्य के रूप में अपनी नई राजनीतिक भूमिका शुरू कर दी है। बांकीपुर की जीत से जन सुराज को विधानसभा में पहली सीट मिली है और पार्टी के संस्थापक स्वयं उसके पहले निर्वाचित विधायक बने हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विधानसभा के भीतर उनकी सक्रियता और राजनीतिक हस्तक्षेप बिहार की राजनीति में जन सुराज की आगे की दिशा को किस तरह प्रभावित करता है।