ओटावा,19 अप्रैल (युआईटीवी)- कनाडा के हैमिल्टन शहर में पंजाब की रहने वाली एक भारतीय छात्रा हरसिमरत रंधावा की दुखद मौत ने दोनों देशों में शोक की लहर दौड़ा दी है। शनिवार को छात्रा के परिजनों ने मीडिया से बातचीत करते हुए इस पूरे मामले पर अपनी पीड़ा और चिंता साझा की।
परिजनों ने बताया कि उनकी बेटी दो साल पहले उच्च शिक्षा के लिए कनाडा गई थी और वहाँ मोहॉक कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी। परिजनों ने दुख जताते हुए कहा कि गोलीबारी की घटना के दौरान वह बस का इंतजार कर रही थी,जब अचानक एक गोली उसे जा लगी। यह गोलीबारी दो गुटों के बीच झगड़े के कारण हुई थी,जिसमें वह निर्दोष फँस गई और मौके पर ही घायल हो गई। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिवार का कहना है कि यह पूरी तरह से दुर्भाग्यपूर्ण और हृदयविदारक घटना है। उन्होंने भारत सरकार से अपील की है कि उनकी बेटी के शव को जल्द-से-जल्द स्वदेश वापस लाने की प्रक्रिया शुरू की जाए ताकि वे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया कर सकें और उसे श्रद्धांजलि दे सकें।
इस घटना पर टोरंटो स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास ने भी प्रतिक्रिया दी है। दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट साझा करते हुए छात्रा की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया। पोस्ट में कहा गया कि, “हैमिल्टन में भारतीय छात्रा हरसिमरत रंधावा की मौत से हम अत्यंत दुखी हैं। स्थानीय पुलिस के अनुसार,वह पूरी तरह निर्दोष थी और गोलीबारी के बीच फँस गई। वर्तमान में हत्या की जाँच जारी है और हम छात्रा के परिजनों के साथ लगातार संपर्क में हैं। उन्हें हरसंभव सहायता दी जा रही है। इस कठिन समय में हमारी संवेदनाएँ शोकाकुल परिवार के साथ हैं।”
पुलिस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार,घटना के वक्त हरसिमरत बस स्टॉप पर खड़ी थी और तभी वहाँ एक काले रंग की मर्सिडीज कार से एक अज्ञात व्यक्ति ने फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस जब घटनास्थल पर पहुँची,तो छात्रा गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिली। घटनास्थल की वीडियो फुटेज की समीक्षा से स्पष्ट हुआ है कि यह सुनियोजित फायरिंग थी,जो संभवतः दो गुटों के बीच किसी पुराने विवाद के चलते हुई। हालाँकि,हरसिमरत का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं था।
फिलहाल पुलिस मामले की गहन जाँच कर रही है। संदिग्ध हमलावर की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। पुलिस इस केस को हत्या के रूप में देख रही है और स्थानीय लोगों से भी किसी भी प्रकार की सूचना देने की अपील की गई है।
मोहॉक कॉलेज ने भी इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए बयान जारी किया है। कॉलेज प्रशासन ने कहा कि, “हमारी पूरी संवेदनाएँ हरसिमरत रंधावा के परिवार के साथ हैं। यह घटना हमारे पूरे समुदाय के लिए बहुत बड़ा आघात है। कॉलेज की ओर से परिजनों को हर प्रकार की सहायता दी जा रही है और हम उनके साथ खड़े हैं।”
हरसिमरत की मौत न केवल उसके परिवार के लिए बल्कि उन हजारों भारतीय छात्रों के लिए भी चिंता का विषय बन गई है,जो कनाडा में पढ़ाई कर रहे हैं या वहाँ जाने की योजना बना रहे हैं। यह घटना सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल खड़े करती है कि आखिर पढ़ाई के लिए विदेश गए छात्र कितने सुरक्षित हैं।
इस घटना के बाद भारतीय समुदाय में गहरा आक्रोश और दुख है। कई सामाजिक संगठन और प्रवासी भारतीय समूह कनाडा सरकार से माँग कर रहे हैं कि मामले की निष्पक्ष और तेज जाँच की जाए तथा दोषियों को कड़ी सजा दी जाए।
भारत सरकार और विदेश मंत्रालय की ओर से भी इस मामले में कार्रवाई और सहयोग की उम्मीद की जा रही है,ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और इस तरह की घटनाएँ भविष्य में दोबारा न हों।
हरसिमरत रंधावा की असमय मृत्यु ने यह सवाल फिर खड़ा कर दिया है कि विदेशों में रहने वाले भारतीय छात्रों की सुरक्षा के लिए और क्या कदम उठाए जाने चाहिए।
