जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल और भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर (तस्वीर क्रेडिट@DrSJaishankar)

पश्चिम एशिया संकट पर भारत की सक्रिय कूटनीति,एस. जयशंकर ने जर्मनी और इटली के विदेश मंत्रियों से की अहम बातचीत

नई दिल्ली,11 मार्च (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में तेजी से बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत ने कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय पहल तेज कर दी है। इसी क्रम में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल के साथ टेलीफोन पर बातचीत की और क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है,जब पश्चिम एशिया में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और कई देशों को ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।

विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस बातचीत की जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्होंने जर्मनी के विदेश मंत्री के साथ पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर विचारों का आदान-प्रदान किया। भारत इस पूरे संकट को लेकर लगातार अंतरराष्ट्रीय साझेदारों और क्षेत्रीय देशों के संपर्क में बना हुआ है। पिछले कुछ दिनों में जयशंकर ने कई देशों के विदेश मंत्रियों के साथ बातचीत की है,जिनमें इटली, ओमान और ईरान शामिल हैं। इन वार्ताओं का उद्देश्य क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को समझना और संभावित समाधान की दिशा में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना है।

दरअसल,पश्चिम एशिया में मौजूदा संकट की शुरुआत 28 फरवरी को हुई,जबसंयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान से जुड़े कुछ ठिकानों पर हमले किए। इन हमलों के जवाब में ईरान ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठिकानों क्षेत्रीय राजधानियों और सहयोगी बलों को निशाना बनाते हुए ड्रोन और मिसाइल हमले किए। इसके बाद पूरे क्षेत्र में तनाव और भी बढ़ गया और कई देशों ने संभावित सैन्य टकराव की आशंका जताई है।

इस बढ़ते तनाव के बीच भारत ने कूटनीतिक स्तर पर संतुलित और सक्रिय भूमिका निभाने की कोशिश की है। भारत के लिए पश्चिम एशिया रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है,क्योंकि यहाँ से ऊर्जा आपूर्ति,समुद्री व्यापार मार्ग और बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक जुड़े हुए हैं। यही वजह है कि नई दिल्ली इस संकट को शांत करने और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों में लगातार भागीदारी कर रही है।

इससे पहले सोमवार को विदेश मंत्री जयशंकर ने इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानके साथ भी पश्चिम एशिया की स्थिति पर बातचीत की थी। दोनों नेताओं ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव और इसके वैश्विक प्रभावों पर चिंता व्यक्त की। बातचीत के दौरान ऊर्जा सुरक्षा,समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों की स्थिरता जैसे मुद्दों पर विशेष रूप से चर्चा हुई।

इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने भारतीय विदेश मंत्री के साथ खाड़ी और पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र की स्थिति पर चर्चा की। उनके अनुसार यूरोप और भारत रणनीतिक साझेदार हैं और दोनों देशों के लिए क्षेत्रीय स्थिरता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा संकट के बीच अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखना दोनों देशों की साझा प्राथमिकता है।

ताजानी ने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इस समुद्री मार्ग की आंशिक नाकेबंदी ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। यह संकरा जल मार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। खाड़ी क्षेत्र के अधिकांश तेल उत्पादक देश अपने कच्चे तेल का निर्यात इसी मार्ग से करते हैं। इसलिए यदि इस मार्ग में कोई बाधा आती है तो उसका असर केवल क्षेत्रीय देशों पर ही नहीं,बल्कि पूरे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में व्यवधान बढ़ता है,तो अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है,क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। यही कारण है कि भारत इस संकट के समाधान और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रहा है।

ताजानी ने अपने बयान में यह भी कहा कि भारत और यूरोप दोनों ने क्षेत्र में मौजूद अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। पश्चिम एशिया में लाखों विदेशी नागरिक काम करते हैं,जिनमें बड़ी संख्या भारतीयों की भी है। किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष की स्थिति में इन नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकारों के लिए एक बड़ी प्राथमिकता बन जाता है।

इटली के विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि भारत और यूरोप मिलकर स्थिति को शांत करने,समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता बनाए रखने और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए समन्वित कदम उठाने का प्रयास करेंगे। उनके अनुसार यह प्रयास केवल मौजूदा संकट को सँभालने के लिए ही नहीं,बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के लिए भी आवश्यक हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि यह संकट इस बात को उजागर करता है कि नई अवसंरचना और सुरक्षित व्यापार मार्गों में निवेश कितना महत्वपूर्ण है। इसी संदर्भ में उन्होंने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा यानी आईएमईसी कॉरिडोर का उल्लेख किया। यह महत्वाकांक्षी परियोजना भारत,मध्य पूर्व और यूरोप को व्यापार,ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी के माध्यम से जोड़ने के उद्देश्य से बनाई जा रही है।

ताजानी के अनुसार इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए 17 मार्च को इटली के शहर ट्राएस्टे में एक राजनीतिक और आर्थिक पहल की जाएगी। इस बैठक का उद्देश्य व्यापार, डिजिटल कनेक्टिविटी और ऊर्जा संबंधों को मजबूत करना है,ताकि एक ऐसा आर्थिक क्षेत्र बनाया जा सके जिससे सभी भागीदार देशों के व्यवसायों को लाभ मिल सके।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक राजनीति,ऊर्जा बाजार और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर गहरा प्रभाव डालने की आशंका पैदा कर दी है। ऐसे समय में भारत की सक्रिय कूटनीतिक पहल यह दर्शाती है कि नई दिल्ली क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और वैश्विक साझेदारों के साथ मिलकर संकट के समाधान की दिशा में काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के प्रयास इस तनाव को कम करने में कितने सफल होते हैं और क्या पश्चिम एशिया में स्थिरता बहाल हो पाती है।