नई दिल्ली,11 अगस्त (युआईटीवी)- संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को संसद पुस्तकालय में आयोजित ‘मंगल मिलन’ कार्यक्रम में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सांसदों ने एकजुटता का संदेश दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ आयोजित इस बैठक की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ के नारों से हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह,भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन नवीन और एनडीए के अन्य नेता तिरंगा लहराते हुए नजर आए। बैठक में बड़ी संख्या में सांसदों ने हिस्सा लिया और एकजुटता प्रदर्शित करते हुए तिरंगे के साथ तस्वीरें खिंचवाईं। इस कार्यक्रम को संसद के भीतर विपक्ष के लगातार विरोध और हंगामे के बीच सत्ता पक्ष की एकजुटता दिखाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
‘मंगल मिलन’ कार्यक्रम के बाद एनडीए सांसदों ने संसद भवन की ओर मार्च निकालने की तैयारी की। यह मार्च मानसून सत्र के दौरान विपक्ष की ओर से लगातार किए जा रहे हंगामे और सदन की कार्यवाही में पैदा किए जा रहे गतिरोध के विरोध में प्रस्तावित है। एनडीए सांसदों का आरोप है कि विपक्ष महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के बजाय संसद की कार्यवाही को बाधित कर रहा है। सत्ता पक्ष का कहना है कि सरकार विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है,लेकिन विपक्ष की ओर से लगातार नारेबाजी और हंगामे के कारण सदन का कामकाज प्रभावित हो रहा है।
एनडीए सांसदों की ओर से निकाले जाने वाले मार्च के दौरान कई तरह के प्लेकार्ड और पोस्टर भी प्रदर्शित किए जाने हैं। इनमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस रुख को प्रमुखता से रखा जाएगा,जिसके तहत वह छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई से जुड़े मुद्दे पर संसद में चर्चा के लिए तैयार हैं। एनडीए सांसदों का कहना है कि गृह मंत्री इस मामले में सदन के भीतर विस्तार से जवाब देने के लिए तैयार हैं,लेकिन विपक्ष चर्चा से बच रहा है और सदन को चलने नहीं दे रहा है।
दरअसल,जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और इससे जुड़े मुद्दे को लेकर संसद में विपक्ष लगातार सरकार से जवाब माँग रहा है। विपक्षी सांसद इस मामले में चर्चा चाहते हैं और सरकार से यह स्पष्ट करने की माँग कर रहे हैं कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस बल का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में किया गया। वहीं सत्ता पक्ष का आरोप है कि सरकार ने इस मुद्दे पर चर्चा से कभी इनकार नहीं किया और गृह मंत्री अमित शाह सदन में इस पर जवाब देने के लिए तैयार हैं।
एनडीए सांसदों के हाथों में झारखंड सरकार से जुड़े पोस्टर भी दिखाई देने वाले हैं। इन पोस्टरों के जरिए झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई और अत्याचार का मुद्दा उठाया जाएगा। भाजपा सांसदों का कहना है कि झारखंड में छात्रों के साथ हुई कार्रवाई को लेकर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए,क्योंकि राज्य में कांग्रेस सरकार का हिस्सा है। सत्ता पक्ष का आरोप है कि विपक्ष दिल्ली में छात्रों के मुद्दे पर सरकार से जवाब माँगता है,लेकिन झारखंड में प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर उसका रवैया अलग दिखाई देता है।
इसी बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने राहुल गांधी से कहा कि अब उन्हें संसद से ‘भागना’ नहीं चाहिए। रिजिजू का आरोप है कि राहुल गांधी कई दिनों से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब की माँग कर रहे थे। अब जब गृह मंत्री सदन में हर बिंदु पर विस्तार से जवाब देने के लिए तैयार हैं,तो राहुल गांधी को संसद में मौजूद रहकर चर्चा में भाग लेना चाहिए।
किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से कहा कि राहुल गांधी कई दिनों से गृह मंत्री अमित शाह से जवाब की माँग कर रहे थे। अब जब गृह मंत्री हर बिंदु पर विस्तार से जवाब देने के लिए तैयार हैं,तो उन्हें भागना नहीं चाहिए। संसदीय कार्य मंत्री ने इससे पहले लोकसभा में भी राहुल गांधी से कई बार आग्रह किया था कि वे सदन में मौजूद रहें और सीधे गृह मंत्री के सामने अपने सवाल रखें।
रिजिजू के इस बयान के बाद छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई से जुड़े मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिले हैं। विपक्ष लगातार सरकार से जवाब माँग रहा है,जबकि सरकार का कहना है कि वह चर्चा के लिए तैयार है। सत्ता पक्ष का दावा है कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में सरकार का पक्ष विस्तार से रखने वाले हैं और विपक्ष को भी अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।
संसद में लगातार बने गतिरोध के बीच सरकार की कोशिश है कि सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाया जाए। मानसून सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण अवसरों पर विपक्षी सांसदों की नारेबाजी और विरोध के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई है। सत्ता पक्ष लगातार विपक्ष से अपील कर रहा है कि वह चर्चा के लिए निर्धारित संसदीय प्रक्रिया का पालन करे और सदन की कार्यवाही को बाधित न करे।
वहीं विपक्ष का कहना है कि सरकार कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाबदेही से बचने की कोशिश कर रही है। छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी विपक्ष के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है। विपक्षी दलों का आरोप है कि छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए और उनके खिलाफ बल प्रयोग की घटनाओं पर सरकार को जवाब देना चाहिए। इस मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच लगातार बयानबाजी हो रही है।
मंगलवार को आयोजित ‘मंगल मिलन’ कार्यक्रम में एनडीए सांसदों की एकजुटता इसी राजनीतिक माहौल के बीच दिखाई दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक के दौरान सांसदों ने तिरंगा लहराया और ‘वंदे मातरम’ के नारों के साथ एकता का संदेश दिया। बैठक में मौजूद नेताओं ने सामूहिक रूप से तस्वीरें भी खिंचवाईं। इससे पहले भी संसद सत्र के दौरान एनडीए सांसदों की बैठकें होती रही हैं,जिनमें सरकार की नीतियों,उपलब्धियों और सदन की रणनीति पर चर्चा की जाती रही है।
पिछले सप्ताह हुई ‘मंगल मिलन’ बैठक के बाद भाजपा सांसदों ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए सरकार की उपलब्धियों और विभिन्न क्षेत्रों में देश की प्रगति का उल्लेख किया था। सांसदों ने रोजगार,आर्थिक विकास,खेल और देश में चल रहे विकास कार्यों को लेकर सरकार की नीतियों की सराहना की थी। साथ ही विपक्ष पर संसद की कार्यवाही को लगातार बाधित करने का आरोप लगाया था।
भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने बैठक के बाद कहा था कि भारत तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने रोजगार के क्षेत्र में देश की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा था कि रोजगार का अनुपात अन्य देशों की तुलना में बेहतर हुआ है और बेरोजगारी में भी कमी आई है। उन्होंने दावा किया था कि 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं और इसे सरकार की नीतियों का परिणाम बताया था।
दिनेश शर्मा के अनुसार,देश में आर्थिक विकास के साथ-साथ सामाजिक स्तर पर भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने कहा था कि सरकार की विभिन्न योजनाओं और नीतियों का लाभ समाज के बड़े वर्ग तक पहुँच रहा है। बैठक में सांसदों के बीच इस बात पर भी चर्चा हुई कि सरकार की उपलब्धियों और विकास कार्यों को जनता के बीच प्रभावी तरीके से रखा जाए।
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने पिछली बैठक के बाद बताया था कि ‘मंगल मिलन’ में देश में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों और सरकार की उपलब्धियों पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने आरोप लगाया था कि विपक्ष संसद में लगातार हंगामा कर रहा है और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं होने दे रहा है। उनके मुताबिक,बैठक में सांसदों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था कि संसद की कार्यवाही के दौरान उनकी उपस्थिति हर हाल में बनी रहे।
मनोज तिवारी ने कहा था कि सांसदों की मौजूदगी इसलिए भी महत्वपूर्ण है,ताकि सरकार आवश्यक विधेयकों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत पारित करा सके। उन्होंने कहा था कि संसद में सरकार का कामकाज तभी प्रभावी तरीके से आगे बढ़ सकता है, जब सांसद सदन में मौजूद रहें और संसदीय कार्यवाही में सक्रिय रूप से हिस्सा लें। एनडीए सांसदों की बैठक में संसद की कार्यवाही को लेकर रणनीति पर भी चर्चा हुई थी।
बैठक में खेल के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों को लेकर भी चर्चा हुई थी। भाजपा के राज्यसभा सदस्य अशोक मित्तल ने कहा था कि अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ है। उन्होंने ग्लासगो कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप सहित विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा था कि खेलों के क्षेत्र में देश की वैश्विक पहचान मजबूत हुई है।
अशोक मित्तल ने पिछली सरकारों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल की तुलना करते हुए कहा था कि पिछले वर्षों में खेल के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने दावा किया था कि भारतीय खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएँ,प्रशिक्षण और अवसर मिलने से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रदर्शन मजबूत हुआ है।
भाजपा सांसद रवि किशन ने भी बैठक के बाद देश के आर्थिक और सामाजिक विकास का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि भारत आर्थिक विकास के रास्ते पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है। बैठक में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि, रोजगार और युवाओं के लिए बढ़ते अवसरों पर चर्चा हुई थी। रवि किशन ने भी विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया था।
उन्होंने कहा था कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि आखिर विपक्ष संसद को सुचारु रूप से क्यों नहीं चलने दे रहा है। उनके मुताबिक,संसद जनता के मुद्दों पर चर्चा करने का मंच है और सांसदों को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने कहा था कि सरकार की ओर से विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयारी होने के बावजूद यदि सदन की कार्यवाही बाधित होती है,तो इसका नुकसान सीधे तौर पर संसदीय कामकाज को होता है।
मंगलवार का ‘मंगल मिलन’ कार्यक्रम ऐसे समय में हुआ है,जब संसद के दोनों सदनों में लगातार हंगामा और नारेबाजी देखने को मिल रही है। विपक्ष जहाँ छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई सहित कई मुद्दों पर सरकार से जवाब माँग रहा है,वहीं एनडीए सांसद विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में संसद परिसर में निकाला जाने वाला एनडीए का मार्च राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सत्ता पक्ष की रणनीति स्पष्ट रूप से यह संदेश देने की है कि सरकार चर्चा से पीछे नहीं हट रही है और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संबंधित मुद्दे पर सदन में जवाब देने के लिए तैयार हैं। दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि सरकार को केवल बयान देने के बजाय छात्रों से जुड़े मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए। दोनों पक्षों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद के कारण संसद की कार्यवाही प्रभावित होती रही है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जब सदन में छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई से जुड़े मुद्दों पर जवाब देंगे,तब विपक्ष की रणनीति क्या होगी। यदि चर्चा होती है,तो दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिल सकता है,लेकिन यदि गतिरोध जारी रहता है तो मानसून सत्र के बाकी कामकाज पर भी इसका असर पड़ने की आशंका बनी रहेगी।
फिलहाल मंगलवार को संसद पुस्तकालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में एनडीए सांसदों का ‘मंगल मिलन’ कार्यक्रम सत्ता पक्ष की एकजुटता के प्रदर्शन के रूप में सामने आया। ‘वंदे मातरम’ के नारों और तिरंगा लहराते सांसदों ने एकता का संदेश दिया,जबकि कार्यक्रम के बाद प्रस्तावित मार्च के जरिए विपक्ष के खिलाफ राजनीतिक संदेश देने की तैयारी की गई। इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि संसद के भीतर गतिरोध के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।
