ईयू की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तस्वीर क्रेडिट@premranjanPR)

विश्व आर्थिक मंच से बड़ा संकेत: भारत–ईयू ऐतिहासिक एफटीए के बेहद करीब,टैरिफ राजनीति से परे नई साझेदारी का संदेश

दावोस,21 जनवरी (युआईटीवी)- विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के मंच से यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच लंबे समय से लंबित ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों पक्ष इस समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुँच चुके हैं और आने वाले दिनों में यह प्रक्रिया निर्णायक मोड़ ले सकती है। अपने संबोधन में वॉन डेर लेयेन ने न सिर्फ भारत के साथ रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को रेखांकित किया,बल्कि अमेरिका को भी एक स्पष्ट संदेश दिया कि यूरोप अब टैरिफ और संरक्षणवाद की राजनीति से बेखौफ होकर नए वैश्विक साझेदारों के साथ आगे बढ़ने को तैयार है।

वॉन डेर लेयेन ने कहा कि यूरोपीय संघ ने हाल के वर्षों में कई देशों के साथ अहम व्यापार समझौते किए हैं और अब भारत के साथ समझौता उस श्रृंखला की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बनने जा रहा है। उन्होंने बताया कि वे अगले हफ्ते भारत का दौरा करेंगी और इस दौरान भारत–ईयू व्यापार समझौते को लेकर शेष बचे मुद्दों पर निर्णायक बातचीत होगी। हालाँकि,उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अभी कुछ काम बाकी है,लेकिन दोनों पक्ष एक ऐसे ऐतिहासिक समझौते के कगार पर खड़े हैं,जिसे कुछ लोग “सभी समझौतों की जननी” तक कह रहे हैं।

ईयू अध्यक्ष के मुताबिक,यह संभावित एफटीए करीब दो अरब लोगों के लिए एक साझा बाजार का निर्माण करेगा और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लगभग एक चौथाई हिस्से को जोड़ने वाला समझौता होगा। उन्होंने कहा कि यह समझौता न सिर्फ आर्थिक दृष्टि से विशाल होगा,बल्कि वैश्विक व्यापार की दिशा और शक्ति संतुलन को भी प्रभावित करेगा। यूरोप के लिए यह सौदा नई मजबूती का प्रतीक बनेगा,क्योंकि ईयू अब लैटिन अमेरिका से लेकर एशिया-प्रशांत क्षेत्र के उभरते आर्थिक पावरहाउसों के साथ अपने रिश्तों को और गहरा कर रहा है।

वॉन डेर लेयेन ने अपने भाषण में भू-राजनीतिक परिस्थितियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक उथल-पुथल और भू-राजनीतिक झटके यूरोप के लिए चुनौती के साथ-साथ एक अवसर भी हैं। उनके मुताबिक,जो बड़ा बदलाव दुनिया में हो रहा है,वह एक नई “यूरोपीय आजादी” के निर्माण को संभव और जरूरी बनाता है—चाहे वह रक्षा क्षेत्र हो,अर्थव्यवस्था हो या लोकतांत्रिक मूल्यों की सुरक्षा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूरोप को अपनी आर्थिक और रणनीतिक ताकत को बढ़ाने के लिए अब और तेजी से कदम उठाने होंगे।

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम राजनीतिक और कूटनीतिक पहलू यह है कि वॉन डेर लेयेन अगले हफ्ते भारत आएँगी और 26 जनवरी को भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगी। यह यात्रा भारत–ईयू संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। गणतंत्र दिवस के अगले ही दिन,यानी 27 जनवरी को,भारत और ईयू के बीच एफटीए को अंतिम रूप देने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए जाने की संभावना है।

सूत्रों के मुताबिक,इस अवसर पर दोनों पक्ष एक औपचारिक दस्तावेज को अपनाएँगे,जिसके बाद इस समझौते को कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। इसके तहत यूरोपीय संसद और यूरोपीय परिषद से मंजूरी ली जाएगी। यह प्रक्रिया समय ले सकती है,लेकिन राजनीतिक सहमति बन जाना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इसके साथ ही,दोनों पक्ष सुरक्षा और रक्षा साझेदारी से जुड़े एक समझौते पर भी हस्ताक्षर कर सकते हैं,जो बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में भारत और ईयू को और करीब लाएगा।

एक और अहम पहलू भारतीय पेशेवरों और कामगारों से जुड़ा है। भारत और ईयू के बीच एक ऐसे समझौते पर भी हस्ताक्षर होने की संभावना है,जो यूरोप में रोजगार पाने वाले भारतीयों की मोबिलिटी को आसान बनाएगा। इससे न सिर्फ भारतीय युवाओं और पेशेवरों को नए अवसर मिलेंगे,बल्कि यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं को भी कुशल मानव संसाधन का लाभ होगा।

गणतंत्र दिवस समारोह में इस बार यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन संयुक्त रूप से मुख्य अतिथि होंगे। इसके बाद वे भारत–ईयू शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता भी करेंगे। यह अपने आप में एक असाधारण घटना है,जो दोनों पक्षों के बीच बढ़ते रणनीतिक भरोसे को दर्शाती है। खास बात यह भी है कि ईयू की एक सैन्य टुकड़ी पहली बार भारत की गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लेगी। इसे भारत और यूरोप के बीच मजबूत होते रक्षा और सुरक्षा संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।

व्यापार के लिहाज से देखें तो यह समझौता भारत के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा व्यापार सौदा होगा। 27 देशों वाले यूरोपीय संघ के साथ होने वाला यह एफटीए वस्तुओं और सेवाओं—दोनों को कवर करेगा। इससे भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुँच मिलेगी,जबकि यूरोपीय कंपनियों के लिए भारत के विशाल और तेजी से बढ़ते बाजार के दरवाजे और खुलेंगे।

विश्व आर्थिक मंच से मिला यह संदेश साफ है कि भारत और यूरोपीय संघ केवल एक व्यापार समझौते की ओर नहीं बढ़ रहे,बल्कि वे एक व्यापक आर्थिक,रणनीतिक और राजनीतिक साझेदारी की नींव रख रहे हैं। यह साझेदारी ऐसे समय में आकार ले रही है,जब दुनिया टैरिफ युद्धों,भू-राजनीतिक तनावों और आर्थिक अनिश्चितताओं से गुजर रही है। ऐसे में भारत–ईयू एफटीए न सिर्फ दोनों पक्षों के लिए,बल्कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था के लिए भी एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।