नई दिल्ली,13 अगस्त (युआईटीवी)- नीदरलैंड पुरुष फुटबॉल टीम को नया मुख्य कोच मिल गया है। स्पेन के दिग्गज पूर्व मिडफील्डर और बार्सिलोना के पूर्व कोच जावी हर्नांडेज को टीम की कमान सौंपी गई है। जावी ने रोनाल्ड कोमैन की जगह ली है और उनके साथ हुआ अनुबंध फीफा विश्व कप 2030 तक रहेगा। जावी की नियुक्ति नीदरलैंड फुटबॉल के लिए ऐतिहासिक भी है, क्योंकि वह पिछले 48 वर्षों में इस राष्ट्रीय टीम के पहले विदेशी मुख्य कोच होंगे। ऐसे में उनके सामने टीम को नई दिशा देने के साथ-साथ डच फुटबॉल की पारंपरिक शैली और आधुनिक रणनीति के बीच बेहतर तालमेल बनाने की चुनौती होगी।
नीदरलैंड फुटबॉल टीम लंबे समय से अपनी आक्रामक शैली,तकनीकी क्षमता और सामूहिक खेल के लिए पहचानी जाती रही है। डच फुटबॉल की पहचान पर दुनिया के कई महान खिलाड़ियों और कोचों का प्रभाव रहा है। जावी खुद भी इस शैली से गहराई से प्रभावित रहे हैं। यही वजह है कि नीदरलैंड का मुख्य कोच बनने के बाद उन्होंने इस नियुक्ति को अपने लिए विशेष सम्मान बताया। जावी ने कहा कि नीदरलैंड की राष्ट्रीय टीम का मुख्य कोच बनना उनके लिए बहुत सम्मान की बात है।
जावी ने कहा कि बार्सिलोना अकादमी में विकसित होने के दौरान वह योहान क्रूफ और रिनस मिशेल्स जैसे महान लोगों से प्रभावित हुए और इसी कारण उनका डच फुटबॉल के साथ एक खास संबंध रहा है। उन्होंने खुद को एक तरह से डच फुटबॉल का बेटा तक बताया। जावी के मुताबिक,उनके खेल और कोचिंग करियर को आकार देने में कई डच दिग्गजों की भूमिका रही है। उन्होंने लुइस वान गाल और फ्रैंक रिजकार्ड का भी विशेष रूप से उल्लेख किया।
जावी ने बताया कि लुइस वान गाल के नेतृत्व में उन्होंने बार्सिलोना के लिए अपना पदार्पण किया था। इसके अलावा फ्रैंक रिजकार्ड ने भी खिलाड़ी और कोच,दोनों के रूप में उनके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जावी का मानना है कि डच फुटबॉल से उनका यह पुराना जुड़ाव राष्ट्रीय टीम की जिम्मेदारी सँभालने में उनके लिए काफी उपयोगी साबित होगा। वह नीदरलैंड की फुटबॉल संस्कृति को समझते हैं और टीम की पारंपरिक खेल शैली को आधुनिक फुटबॉल की जरूरतों के साथ जोड़ने की कोशिश करेंगे।
नए कोच ने अपने कोचिंग स्टाफ को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। जावी ने कहा कि उनका इरादा ऐसा कोचिंग स्टाफ तैयार करने का है, जिसमें डच फुटबॉल का अनुभव और इनपुट भी शामिल हो। उनके मुताबिक,खेल,खिलाड़ियों और स्थानीय फुटबॉल संस्कृति की विशेष जानकारी बेहद मूल्यवान है। जावी चाहते हैं कि उनके अनुभव और डच विशेषज्ञों की जानकारी को एक साथ मिलाकर ऐसा माहौल तैयार किया जाए,जिसमें टीम और खिलाड़ी अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल कर सकें।
जावी की नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह आधुनिक फुटबॉल के सबसे चर्चित स्पेनिश कोचों और पूर्व खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। खिलाड़ी के तौर पर उन्होंने स्पेन और बार्सिलोना के लिए शानदार सफलता हासिल की। जावी को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ मिडफील्डरों में गिना जाता रहा है। वह स्पेन की उस ऐतिहासिक टीम का हिस्सा थे,जिसने 2010 में फीफा विश्व कप का खिताब जीता था। इसके अलावा उन्होंने स्पेनिश राष्ट्रीय टीम के साथ यूरोपीय फुटबॉल में भी बड़ी उपलब्धियाँ हासिल कीं।
क्लब स्तर पर जावी का सबसे लंबा और यादगार जुड़ाव बार्सिलोना के साथ रहा। उन्होंने क्लब के लिए कुल 17 सीजन खेले। इस दौरान वह टीम के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में शामिल रहे और बार्सिलोना की पासिंग आधारित शैली के प्रमुख चेहरे बने। मैदान पर उनकी तकनीकी क्षमता,खेल को पढ़ने की समझ और गेंद पर नियंत्रण ने उन्हें दुनिया के महान मिडफील्डरों में स्थापित किया। यही अनुभव बाद में उनके कोचिंग करियर की नींव बना।
जावी ने वर्ष 2019 में अपने कोचिंग करियर की शुरुआत की। उन्होंने अल साद के साथ अपने कोचिंग सफर की शुरुआत की और 2019 से 2021 तक क्लब की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद उन्हें अपने पुराने क्लब बार्सिलोना का मुख्य कोच बनने का मौका मिला। उन्होंने 2021 से 2024 तक बार्सिलोना को कोच किया। अपेक्षाकृत कम अनुभव के बावजूद उन्होंने क्लब के साथ कई घरेलू ट्रॉफियाँ जीतीं और टीम को स्पेनिश फुटबॉल में प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बार्सिलोना के कोच के रूप में जावी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में 2022-23 सत्र का स्पेनिश सुपर कप खिताब शामिल है। उन्होंने टीम को खिताब तक पहुँचाया और बतौर कोच अपनी रणनीतिक क्षमता का परिचय दिया। हालाँकि,बार्सिलोना में उनका कार्यकाल कई उतार-चढ़ाव से भी गुजरा,लेकिन क्लब के साथ काम करने के दौरान उन्हें उच्च स्तर के खिलाड़ियों,बड़े दबाव और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की अपेक्षाओं के बीच टीम प्रबंधन का महत्वपूर्ण अनुभव मिला।
अब नीदरलैंड की राष्ट्रीय टीम की जिम्मेदारी जावी के कोचिंग करियर के लिए एक नया अध्याय है। क्लब फुटबॉल और राष्ट्रीय टीम की कोचिंग में बड़ा अंतर होता है। क्लब में कोच को नियमित रूप से खिलाड़ियों के साथ काम करने और अपनी रणनीति विकसित करने का समय मिलता है,जबकि राष्ट्रीय टीम में सीमित समय में खिलाड़ियों को एकजुट करना पड़ता है। जावी के सामने भी यही चुनौती होगी कि वह अलग-अलग क्लबों से आने वाले खिलाड़ियों को एक साझा रणनीति और खेल शैली में ढाल सकें।
नीदरलैंड के लिए जावी का पहला बड़ा लक्ष्य आगामी अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में टीम को मजबूत करना होगा। उनका अनुबंध 2030 विश्व कप तक है,जिससे उन्हें लंबी अवधि की योजना बनाने का अवसर मिलेगा। वह युवा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय टीम में शामिल करने के साथ अनुभवी खिलाड़ियों की क्षमता का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। डच टीम के पास हमेशा से तकनीकी रूप से मजबूत खिलाड़ियों की परंपरा रही है और जावी की शैली इस प्रतिभा के अनुकूल मानी जा सकती है।
जावी के सामने सबसे बड़ी अपेक्षा यह होगी कि वह नीदरलैंड की पारंपरिक आक्रामक और तकनीकी फुटबॉल को परिणाम देने वाली रणनीति में बदलें। उनके अपने खेल करियर में गेंद पर नियंत्रण,छोटे पास और मैदान पर स्थान का सही इस्तेमाल महत्वपूर्ण रहा है। कोच के रूप में भी उनकी रणनीति में इन सिद्धांतों की झलक देखने को मिली है। अब राष्ट्रीय टीम के स्तर पर उन्हें इन्हीं विचारों को खिलाड़ियों की क्षमता और डच फुटबॉल की परंपरा के साथ जोड़ना होगा।
48 साल बाद किसी विदेशी कोच को नीदरलैंड की पुरुष राष्ट्रीय टीम की जिम्मेदारी सौंपना अपने आप में बड़ा बदलाव है। जावी इस फैसले को सही साबित करने के लिए मैदान पर परिणाम देना चाहेंगे। उनकी नियुक्ति से नीदरलैंड फुटबॉल में नई रणनीतिक सोच आने की उम्मीद है। साथ ही जावी के डच फुटबॉल से पुराने जुड़ाव के कारण यह नियुक्ति केवल एक विदेशी कोच की नियुक्ति तक सीमित नहीं रह जाती।
अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि जावी हर्नांडेज के नेतृत्व में नीदरलैंड की टीम किस तरह विकसित होती है और क्या वह टीम को विश्व फुटबॉल के शीर्ष स्तर पर बड़ी सफलता दिला पाते हैं। 2030 विश्व कप तक का लंबा अनुबंध उन्हें एक मजबूत टीम तैयार करने का पर्याप्त समय देता है। जावी के लिए यह उनके कोचिंग करियर की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक होगी,जबकि नीदरलैंड के लिए यह नियुक्ति एक नए फुटबॉल युग की शुरुआत साबित हो सकती है।
