नई दिल्ली,26 फरवरी (युआईटीवी)- प्रगति तिवारी,विशाल मोहन,अंकित बढ़ाना और सुखविंदर विक्की स्टारर फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ को लेकर पिछले कुछ दिनों से विवाद का माहौल बना हुआ था। फिल्म के टाइटल और इसकी रिलीज पर रोक लगाने की माँग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हालाँकि,अब देश की सर्वोच्च अदालत ने इस याचिका पर सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि फिल्म का टाइटल ऐसा नहीं है,जिससे यादव समुदाय की छवि खराब होती हो। इस फैसले के साथ ही फिल्म की रिलीज पर लटकी तलवार हट गई है और अब यह फिल्म 27 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि केवल इस आधार पर किसी फिल्म के टाइटल को असंवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता कि उससे किसी समुदाय की छवि खराब होने की आशंका जताई जा रही है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि इस मामले की तुलना ‘घूसखोर पंडत’ जैसे मामले से नहीं की जा सकती। अदालत के अनुसार,इस फिल्म का टाइटल किसी भी तरह से अपमानजनक या आपत्तिजनक प्रतीत नहीं होता है।
दरअसल,फिल्म के टाइटल में ‘यादव जी’ शब्द के इस्तेमाल और ट्रेलर में यादव समुदाय की एक लड़की का एक विशेष वर्ग के युवक के साथ प्रेम संबंध दिखाए जाने को लेकर कुछ संगठनों ने आपत्ति जताई थी। उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में फिल्म के विरोध में नारेबाजी की गई और कुछ स्थानों पर पोस्टर भी जलाए गए। विरोध करने वालों का कहना था कि फिल्म की कहानी और टाइटल के माध्यम से यादव समाज की गरिमा को ठेस पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर भी फिल्म को बैन करने की माँग उठी। कई यूजर्स ने फिल्म के कलाकारों को टैग कर नाराजगी जाहिर की। फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रही प्रगति तिवारी को भी इस विवाद का सामना करना पड़ा। उन्होंने सार्वजनिक रूप से सफाई देते हुए कहा था कि फिल्म में ऐसा कोई दृश्य या संवाद नहीं है,जो किसी भी समुदाय की भावनाओं को आहत करे। उनके अनुसार,यह एक सामान्य प्रेम कहानी है,जिसमें सामाजिक पृष्ठभूमि का इस्तेमाल कहानी को वास्तविकता देने के लिए किया गया है,न कि किसी की छवि खराब करने के लिए।
फिल्म को पहले ही केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से सर्टिफिकेट मिल चुका था। सेंसर बोर्ड ने फिल्म की समीक्षा के बाद इसे रिलीज के लिए उपयुक्त माना था। इसके बावजूद विवाद के चलते मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया। अदालत के फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि रचनात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को केवल आशंका के आधार पर रोका नहीं जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। अदालत ने अपने रुख से यह संदेश दिया है कि किसी भी फिल्म या कलात्मक रचना को प्रतिबंधित करने से पहले ठोस और स्पष्ट आधार होना जरूरी है। केवल संभावित असहमति या आशंका के आधार पर किसी फिल्म की रिलीज पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ एक रोमांटिक ड्रामा बताई जा रही है,जिसमें पारिवारिक और सामाजिक संघर्षों के बीच पनपती प्रेम कहानी को दिखाया गया है। मेकर्स का कहना है कि फिल्म का उद्देश्य किसी भी समुदाय को नीचा दिखाना नहीं,बल्कि समाज में मौजूद जटिलताओं को कहानी के माध्यम से प्रस्तुत करना है। अब जब सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है,तो फिल्म की रिलीज का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
फिल्म इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि विवाद के चलते फिल्म को अतिरिक्त पब्लिसिटी भी मिल गई है। अक्सर देखा गया है कि किसी फिल्म को लेकर उठा विवाद दर्शकों की जिज्ञासा बढ़ा देता है। हालाँकि,यह भी सच है कि सामाजिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखना हर फिल्म निर्माता की जिम्मेदारी होती है।
27 फरवरी को रिलीज होने जा रही इस फिल्म पर अब सबकी नजरें टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि दर्शक इसे किस तरह से स्वीकार करते हैं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने यह साफ कर दिया है कि कानून की नजर में फिल्म का टाइटल या इसकी कहानी असंवैधानिक नहीं है। ऐसे में अब अंतिम फैसला दर्शकों के हाथ में होगा कि वे इस प्रेम कहानी को कितना सराहते हैं और इसे किस नजर से देखते हैं।
