डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

ईरान के तेल कारोबार पर अमेरिका का बड़ा प्रहार,चंडीगढ़ के कारोबारी और उनकी पत्नी समेत कई भारतीयों पर प्रतिबंध

वाशिंगटन,5 नवंबर (युआईटीवी)- अमेरिका ने ईरान के तेल कारोबार से जुड़े कथित नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए भारत और तुर्किये से जुड़ी कई कंपनियों तथा कुछ व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि इस नेटवर्क ने फर्जी समुद्री दस्तावेजों,अवैध जहाज पंजीकरण और दूसरे देशों की पहचान का इस्तेमाल करके ईरान के तेल को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पहुँचाने में मदद की। इस कार्रवाई में चंडीगढ़ के कारोबारी सुनील कुमार शर्मा,उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद और दो अन्य भारतीय नागरिकों के नाम भी शामिल हैं। अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने बुधवार को इस कार्रवाई की घोषणा की। इसके तहत भारत से जुड़े कुल नौ संस्थानों को प्रतिबंधित किया गया है। वहीं, तुर्किये की एक कंपनी पर भी कार्रवाई की गई है,जिस पर ईरान की प्रतिबंधित विमानन कंपनियों को जरूरी सेवाएँ देने का आरोप है।

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि ईरान अपने तेल कारोबार से होने वाली कमाई के जरिए आर्थिक संसाधन जुटाता है। अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद तेल की बिक्री जारी रखने के लिए कथित तौर पर कई कंपनियाँ और बिचौलिये अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। इनमें जहाजों की पहचान बदलना,फर्जी पंजीकरण कराना और दस्तावेजों के जरिए तेल के वास्तविक स्रोत को छिपाना शामिल है। अमेरिका की ताजा कार्रवाई का उद्देश्य ऐसे ही नेटवर्क की गतिविधियों को रोकना और ईरान के तेल निर्यात से जुड़े वित्तीय तथा समुद्री रास्तों पर दबाव बढ़ाना बताया गया है।

अमेरिकी वित्त मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक,इस कार्रवाई में चंडीगढ़ के कारोबारी सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद प्रमुख रूप से शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि दोनों वर्ष 2014 से कथित तौर पर फर्जी समुद्री पंजीकरण के कारोबार से जुड़े हुए थे। उन्होंने ऐसी वेबसाइटों और संस्थाओं का नेटवर्क तैयार किया था,जो अलग-अलग देशों के समुद्री प्रशासन की तरह काम करने का दावा करती थीं।

इन संस्थाओं के माध्यम से जहाजों का पंजीकरण करने,नाविकों को प्रशिक्षण देने, समुद्री प्रमाणपत्र जारी करने और जहाजों का निरीक्षण करने जैसी सेवाएं उपलब्ध कराने का दावा किया जाता था। हालाँकि,अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अनुसार, जिन देशों के नाम पर ये सेवाएँ दी जा रही थीं,उनकी सरकारों ने संबंधित संस्थाओं को आधिकारिक तौर पर ऐसा करने की अनुमति नहीं दी थी। यानी ये संस्थाएँ बिना वैध सरकारी अधिकार के समुद्री प्रशासन से जुड़ी सेवाएँ देने का दावा कर रही थीं।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस नेटवर्क ने अरूबा, गुयाना, माली, मोजाम्बिक, मलावी, सिंट मार्टेन और तिमोर-लेस्ते जैसे देशों के नाम पर जहाजों का पंजीकरण कराने की कोशिश की। इन देशों के समुद्री रजिस्ट्रेशन का इस्तेमाल करके जहाजों को वैध पंजीकरण प्राप्त होने का आभास दिया जा सकता था। अमेरिका का आरोप है कि इस व्यवस्था से ईरान का तेल ले जाने वाले जहाजों की वास्तविक पहचान और उनके संचालन से जुड़ी जानकारी छिपाने में मदद मिलती थी।

अमेरिका की इस कार्रवाई में अश्वनी कुमार धीमान और इशविंदर सिंह नाम के दो अन्य भारतीय नागरिकों को भी प्रतिबंधित किया गया है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अनुसार, ये दोनों ऐसी कंपनियों के निदेशक थे,जिनका संबंध सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी से बताया गया है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इन कंपनियों और संस्थाओं के जरिए तैयार किए गए नेटवर्क का इस्तेमाल समुद्री दस्तावेजों और जहाजों के पंजीकरण से जुड़ी गतिविधियों में किया गया।

अमेरिका का आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क ने ईरान के तेल को अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुँचाने में मदद करने वाले जहाजों की पहचान छिपाने में भूमिका निभाई। जहाजों को दूसरे देशों में पंजीकृत दिखाने से उनके वास्तविक संचालन और तेल के स्रोत को लेकर भ्रम पैदा किया जा सकता था। इससे प्रतिबंधों के दायरे में आने वाले तेल को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था में शामिल करना आसान हो सकता था।

हालाँकि,अमेरिकी वित्त मंत्रालय की ओर से लगाए गए ये आरोप हैं और प्रतिबंधों की घोषणा अपने आप में किसी न्यायिक अदालत के दोषसिद्धि संबंधी फैसले के समान नहीं है। फिर भी इस कार्रवाई से संकेत मिलता है कि अमेरिकी प्रशासन अब केवल ईरान के तेल कारोबार से सीधे जुड़े खरीदारों और विक्रेताओं तक सीमित नहीं रहना चाहता,बल्कि उन कंपनियों और सेवा प्रदाताओं पर भी कार्रवाई कर रहा है, जिनके जरिए कथित तौर पर प्रतिबंधों से बचने में मदद मिलती है।

अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कारोबार में हर जहाज का किसी न किसी देश में पंजीकरण होना जरूरी होता है। जिस देश में जहाज पंजीकृत होता है,उसका झंडा जहाज पर लगाया जाता है। इस व्यवस्था को फ्लैग स्टेट यानी ध्वज राज्य कहा जाता है। जहाज जिस देश के झंडे के तहत चलता है,उसे सामान्य तौर पर उसी देश के समुद्री कानूनों और निगरानी व्यवस्था का पालन करना होता है।

जहाज का पंजीकरण केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है। इसके आधार पर उसकी कानूनी पहचान तय होती है और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री परिवहन में उसकी गतिविधियों का रिकॉर्ड रखा जाता है। जहाज के मालिक,संचालन, सुरक्षा और प्रमाणन से जुड़ी जानकारी भी इस व्यवस्था का हिस्सा होती है। इसी वजह से किसी जहाज का वैध पंजीकरण अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कारोबार में महत्वपूर्ण माना जाता है।

अमेरिका का आरोप है कि शर्मा दंपती से जुड़ी संस्थाओं ने इसी व्यवस्था का कथित तौर पर दुरुपयोग किया। उन्होंने उन देशों के नाम पर जहाजों का पंजीकरण करने और प्रमाणपत्र जारी करने का दावा किया,जिनकी सरकारों ने उन्हें ऐसी सेवाएँ देने की अनुमति नहीं दी थी। यदि किसी जहाज को फर्जी पंजीकरण या प्रमाणपत्र के आधार पर किसी दूसरे देश का बताया जाता है,तो उसकी वास्तविक पहचान और गतिविधियों की जाँच मुश्किल हो सकती है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक,ईरान का तेल ले जाने वाले जहाजों के मामले में इसी तरह की व्यवस्था का इस्तेमाल किया गया।

भारत से जुड़े संस्थानों के अलावा अमेरिका ने तुर्किये की कंपनी फुगो ग्राउंड सर्विसेज इंक को भी प्रतिबंधित किया है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय का आरोप है कि यह कंपनी ईरान की छह प्रतिबंधित एयरलाइंस को विमानन सेवाओं से जुड़ी जरूरी सुविधाएँ उपलब्ध करा रही थी। इन एयरलाइंस में ईरान एयर टूर, साहा एयरलाइंस, सेपेहरान एयरलाइंस, वारेष एयरलाइंस, ताबान एयरलाइंस और अता एयरलाइंस शामिल हैं।

इन कंपनियों को अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में रखा गया है। इसके बावजूद तुर्किये की कंपनी पर इन्हें सेवाएँ देने का आरोप लगाया गया है। विमानन क्षेत्र में ग्राउंड हैंडलिंग सेवाएँ किसी भी एयरलाइन के संचालन के लिए महत्वपूर्ण होती हैं। जब कोई विमान हवाई अड्डे पर उतरता है या उड़ान से पहले वहाँ खड़ा रहता है,तो उसे कई तरह की सुविधाओं की जरूरत होती है। इनमें विमान की पार्किंग,यात्रियों के सामान की व्यवस्था, विमान की सफाई,ईंधन और अन्य जमीनी सहायता से जुड़ी सेवाएँ शामिल हो सकती हैं।

अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि फुगो ग्राउंड सर्विसेज ने प्रतिबंधित ईरानी एयरलाइंस को ऐसी सेवाएँ उपलब्ध कराईं। इस कार्रवाई के जरिए अमेरिका ने यह संकेत दिया है कि प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वाले नेटवर्क में केवल तेल कंपनियाँ ही नहीं, बल्कि विमानन और अन्य सहायक सेवाएँ देने वाली संस्थाएँ भी जाँच के दायरे में आ सकती हैं।

अमेरिका की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों के तहत संबंधित व्यक्तियों और कंपनियों की अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में आने वाली संपत्तियों तथा वित्तीय हितों को फ्रीज किया जा सकता है। इसका मतलब है कि अमेरिका में मौजूद उनकी संपत्तियों और प्रतिबंधों के दायरे में आने वाले वित्तीय संसाधनों का इस्तेमाल सीमित हो जाएगा। इसके अलावा, अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों के लिए प्रतिबंधित व्यक्तियों या संस्थाओं के साथ कारोबार करना प्रतिबंधित होगा।

यदि किसी विशेष लेनदेन के लिए अमेरिकी व्यवस्था के तहत अनुमति जरूरी है,तो संबंधित पक्षों को वित्त मंत्रालय से लाइसेंस या मंजूरी लेनी होगी। बिना अनुमति प्रतिबंधित संस्थाओं के साथ कारोबार करने पर कानूनी कार्रवाई का जोखिम हो सकता है। इस तरह के प्रतिबंधों का असर केवल अमेरिका में मौजूद संपत्तियों तक सीमित नहीं रहता,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय लेनदेन और कारोबारी साझेदारियों पर भी पड़ सकता है।

अमेरिका ने गैर-अमेरिकी कंपनियों और नागरिकों को भी चेतावनी दी है। अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक,यदि कोई विदेशी व्यक्ति या कंपनी प्रतिबंधित संस्थाओं की मदद करती है या प्रतिबंधों से बचने के लिए उनके साथ मिलकर काम करती है,तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। इससे उन अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों के लिए जोखिम बढ़ जाता है,जो ईरान से जुड़े कारोबार में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं।

अमेरिका ने इस कार्रवाई को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ का हिस्सा बताया है। इस अभियान का घोषित उद्देश्य ईरान की तेल से होने वाली कमाई को रोकना और उसकी आर्थिक क्षमता को कमजोर करना है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि ईरान के तेल निर्यात से जुड़े नेटवर्क पर दबाव बढ़ाकर उसकी आय के प्रमुख स्रोतों को प्रभावित किया जा सकता है।

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि ईरान की मदद करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को जमीन,समुद्र और हवाई मार्गों से कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इस बयान के जरिए अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले विभिन्न नेटवर्क पर निगरानी जारी रहेगी।

इस कार्रवाई का दायरा यह भी दिखाता है कि अमेरिका अब ईरान के तेल कारोबार से जुड़े पूरे सहायता तंत्र को निशाना बनाने की रणनीति अपना रहा है। इसमें जहाजों का पंजीकरण कराने वाली संस्थाएँ,समुद्री प्रमाणपत्र जारी करने वाले नेटवर्क,विमानन सेवाएँ देने वाली कंपनियाँ और वित्तीय लेनदेन में मदद करने वाले कारोबारी शामिल हो सकते हैं।

कुल मिलाकर,भारत से जुड़े व्यक्तियों और संस्थानों पर लगाए गए प्रतिबंधों ने अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कारोबार और ईरान के तेल निर्यात को लेकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। अमेरिकी कार्रवाई का मुख्य आधार यह आरोप है कि फर्जी पंजीकरण और दस्तावेजों के जरिए ईरानी तेल की वास्तविक पहचान छिपाने में मदद की गई। अब इन प्रतिबंधों का असर संबंधित कंपनियों के अंतर्राष्ट्रीय कारोबार,वित्तीय लेनदेन और कारोबारी साझेदारियों पर पड़ सकता है। साथ ही,यह कार्रवाई उन विदेशी संस्थाओं के लिए भी चेतावनी है,जो अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आने वाले ईरानी कारोबार को किसी भी तरह की सहायता उपलब्ध कराती हैं।