स्पेन के रेल मंत्री ऑस्कर पुएंते ने दिया इस्तीफा (तस्वीर क्रेडिट@BharatX20)

स्पेन के रेल मंत्री ऑस्कर पुएंते ने दिया इस्तीफा,भीषण ट्रेन हादसे के छह दिन बाद छोड़ा पद; एक साल में 115 लोगों की मौत से उठे सुरक्षा पर सवाल

नई दिल्ली,4 नवंबर (युआईटीवी)- स्पेन में लगातार हो रहे भीषण रेल हादसों के बाद आखिरकार परिवहन और सतत गतिशीलता मंत्री ऑस्कर पुएंते ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मैड्रिड के दक्षिण में टोलेडो प्रांत के पास दो हाईस्पीड ट्रेनों की टक्कर में 69 लोगों की मौत के छह दिन बाद उन्होंने यह फैसला लिया। इस दुर्घटना के बाद पूरे देश में रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नाराजगी बढ़ गई थी। विपक्षी दलों के नेताओं के साथ-साथ रेलवे कर्मचारियों की यूनियनों ने भी मंत्री से इस्तीफे की माँग की थी। लगातार बढ़ते दबाव के बीच पुएंते ने पद छोड़ने का ऐलान करते हुए कहा कि इतने गंभीर हादसों के बाद उनका मंत्री पद पर बने रहना उचित नहीं है।

मंत्री के इस्तीफे ने स्पेन की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े हाईस्पीड रेल नेटवर्क वाले इस देश में लगातार दो बड़े रेल हादसों ने रेलवे की सुरक्षा और संचालन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक,एक साल से भी कम समय में हुई इन दुर्घटनाओं में कुल 115 लोगों की जान जा चुकी है। इन घटनाओं ने यात्रियों की सुरक्षा,रेलवे के तकनीकी प्रबंधन और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अपनाए जा रहे उपायों पर बहस तेज कर दी है।

ऑस्कर पुएंते ने अपने फैसले के बारे में बताते हुए कहा कि 28 अक्टूबर को हुए हादसे के तुरंत बाद ही उन्होंने इस्तीफा देने का मन बना लिया था। हालांकि, उस समय उन्होंने इस फैसले को सार्वजनिक नहीं किया। उनका कहना है कि स्पेन जैसे विकसित रेल नेटवर्क वाले देश में इतने कम समय के भीतर दो गंभीर दुर्घटनाओं का होना बेहद चिंताजनक है। ऐसी स्थिति में परिवहन मंत्री के रूप में पद पर बने रहना उन्हें उचित नहीं लगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका फैसला हालिया हादसे की गंभीरता और उससे जुड़ी जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

दरअसल,28 अक्टूबर 2026 की सुबह स्पेन के टोलेडो प्रांत में मैड्रिड-सेविले हाईस्पीड रेल मार्ग पर एक भयावह दुर्घटना हुई थी। स्थानीय समय के अनुसार सुबह करीब 8 बजकर 53 मिनट पर दो ट्रेनों के बीच टक्कर हो गई। इस हादसे में 69 यात्रियों की मौत हो गई,जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए। दुर्घटना इतनी गंभीर थी कि कई यात्रियों को ट्रेन से बाहर निकालने और घायलों को अस्पताल पहुँचाने में बचाव दल को काफी मशक्कत करनी पड़ी। हादसे के बाद पूरे देश में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया।

शुरुआती जानकारी के मुताबिक,दुर्घटना के समय एक हाईस्पीड ट्रेन उसी रेल ट्रैक पर पहले से मौजूद दूसरी ट्रेन से टकरा गई थी। इस घटना में सरकारी रेल कंपनी रेनफे और निजी रेल कंपनी इरियो की ट्रेनें शामिल थीं। हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि जब एक ट्रेन पहले से ट्रैक पर खड़ी थी,तब दूसरी ट्रेन को उसी रास्ते पर आगे बढ़ने की अनुमति कैसे मिल गई। रेलवे के परिचालन और नियंत्रण तंत्र में हुई संभावित चूक को लेकर जाँच शुरू कर दी गई।

प्रारंभिक रिपोर्टों में मैड्रिड-सेविले रेल मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े एक महत्वपूर्ण संचार सिस्टम में खराबी की बात सामने आई। बताया गया कि इस तकनीकी समस्या के कारण सामान्य सुरक्षा और संचार व्यवस्था प्रभावित हुई थी। इसके बाद मैड्रिड स्थित नियंत्रण कक्ष के अधिकारियों ने रेल यातायात को सँभालने की जिम्मेदारी अपने हाथ में ली। इसी दौरान सरकारी रेल कंपनी रेनफे की हाईस्पीड ट्रेन को आगे बढ़ने की अनुमति दिए जाने की जानकारी सामने आई,जबकि निजी कंपनी इरियो की ट्रेन पहले से उसी ट्रैक पर मौजूद थी।

इस घटनाक्रम ने रेलवे के नियंत्रण कक्ष और सिग्नलिंग व्यवस्था की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि ट्रेन को आगे बढ़ने की अनुमति देने से पहले ट्रैक की वास्तविक स्थिति की पुष्टि क्यों नहीं की गई। यदि संचार व्यवस्था में खराबी आई थी,तो ऐसी स्थिति में रेल यातायात को सुरक्षित रखने के लिए कौन से वैकल्पिक उपाय अपनाए गए, इसकी भी जाँच की जा रही है। फिलहाल शुरुआती जानकारियों के आधार पर किसी एक तकनीकी या प्रशासनिक चूक को दुर्घटना का अंतिम कारण नहीं माना गया है।

खुद परिवहन मंत्री ऑस्कर पुएंते ने भी हादसे के बाद सिग्नल व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि सिग्नल लाल था और ट्रेन को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं थी। इसके बावजूद ट्रेन आगे कैसे चली गई,यह समझ से परे है। मंत्री के इस बयान के बाद दुर्घटना में संभावित मानवीय लापरवाही और तकनीकी गड़बड़ी को लेकर चर्चा और तेज हो गई थी। हालाँकि,हादसे की वास्तविक वजह का पता लगाने के लिए जांच एजेंसियां तकनीकी रिकॉर्ड,सिग्नलिंग सिस्टम और नियंत्रण कक्ष से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही हैं।

दुर्घटना के बाद विपक्षी दलों ने सरकार और परिवहन मंत्रालय से जवाब माँगा। विपक्ष का कहना था कि लगातार हो रही रेल दुर्घटनाओं के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में सुधार क्यों नहीं किया जा सका। रेलवे कर्मचारियों की यूनियनों ने भी हादसे को गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदारी तय करने की माँग की। कर्मचारियों के बीच इस बात को लेकर चिंता जताई गई कि तकनीकी खामियों और संचालन संबंधी समस्याओं के बावजूद रेल सेवाओं को किस तरह सुरक्षित बनाए रखा जा रहा है। इन मांगों के बीच परिवहन मंत्री पर पद छोड़ने का दबाव लगातार बढ़ता गया।

स्पेन का हाईस्पीड रेल नेटवर्क दुनिया के सबसे बड़े नेटवर्क में शामिल है। देश ने आधुनिक रेल सेवाओं के विकास में बड़े पैमाने पर निवेश किया है और तेज गति से चलने वाली ट्रेनों के जरिए प्रमुख शहरों को जोड़ने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। ऐसे में लगातार दो बड़े हादसों का होना देश की रेल व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। यात्रियों के मन में भी सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अब सरकार के सामने न केवल दुर्घटना के कारणों का पता लगाने,बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की चुनौती है।

ऑस्कर पुएंते का इस्तीफा इस पूरे घटनाक्रम का महत्वपूर्ण राजनीतिक परिणाम माना जा रहा है। हालाँकि,उनके पद छोड़ने से दुर्घटना के कारणों और जिम्मेदार लोगों से जुड़े सवाल खत्म नहीं हुए हैं। अब जाँच के नतीजों से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि हादसे के पीछे तकनीकी खराबी,सिग्नलिंग सिस्टम की विफलता,नियंत्रण कक्ष की गलती या किसी अन्य कारण की भूमिका थी।

फिलहाल स्पेन में रेल सुरक्षा को लेकर बहस जारी है। 69 लोगों की मौत और 200 से अधिक लोगों के घायल होने की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। एक साल से भी कम समय में 115 लोगों की जान जाने के बाद सरकार और रेलवे प्रशासन पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का दबाव बढ़ गया है। अब देखना होगा कि जाँच में क्या तथ्य सामने आते हैं और स्पेन अपने हाईस्पीड रेल नेटवर्क को यात्रियों के लिए अधिक सुरक्षित बनाने के लिए कौन से कदम उठाता है।