मुंबई,31 अक्टूबर (युआईटीवी)- बॉलीवुड अभिनेत्री श्रद्धा कपूर इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘ईठा’ को लेकर चर्चा में हैं। इस फिल्म में वह महाराष्ट्र की प्रसिद्ध लावणी कलाकार विठाबाई नारायणगांवकर की भूमिका निभाती नजर आएँगी। फिल्म के निर्माताओं ने शुक्रवार को इसका ट्रेलर जारी कर दिया है। लगभग तीन मिनट के इस ट्रेलर में महाराष्ट्र की पारंपरिक लोककला लावणी की खूबसूरत दुनिया के साथ-साथ इसके पीछे छिपे संघर्ष,कलाकारों की चुनौतियों और एक महिला के आत्मसम्मान की कहानी को भी सामने लाया गया है। ट्रेलर देखने के बाद फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता बढ़ गई है। श्रद्धा कपूर का बदला हुआ अंदाज,पारंपरिक पहनावा और प्रभावशाली संवाद इस फिल्म की खास झलक पेश करते हैं।
‘ईठा’ की कहानी केवल एक लावणी कलाकार के मंचीय सफर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उस महिला के जीवन को दिखाने की कोशिश की गई है,जिसने अपनी प्रतिभा और हिम्मत के बल पर लोककला की दुनिया में अलग पहचान बनाई। ट्रेलर में विठाबाई के जीवन के कई पहलुओं की झलक मिलती है। एक ओर मंच पर उनकी अदाकारी,नृत्य और गायन का आकर्षण दिखाई देता है,तो दूसरी ओर अपनी कला को बचाए रखने और सम्मान के साथ जीने के लिए उनका संघर्ष भी नजर आता है। फिल्म में यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि दर्शकों के सामने कलाकार की जिंदगी जितनी रंगीन दिखाई देती है, उसके पीछे उतनी ही मेहनत, त्याग और मुश्किलें छिपी हो सकती हैं।
ट्रेलर की शुरुआत से ही महाराष्ट्र की लोकसंस्कृति और लावणी की परंपरा का प्रभाव दिखाई देने लगता है। पारंपरिक संगीत, नृत्य और मंच की रौनक के बीच श्रद्धा कपूर अपने किरदार में पूरी तरह ढली हुई नजर आती हैं। उन्होंने विठाबाई के रूप में नौवारी साड़ी पहनी है। इसके साथ भारी पारंपरिक गहने और पैरों में घुंघरू उनके लुक को खास बनाते हैं। उनके चेहरे के भाव, आंखों में दिखाई देने वाला आत्मविश्वास और मंच पर नृत्य करने की शैली किरदार को प्रभावशाली बनाती है। श्रद्धा के इस रूप को उनके अब तक के फिल्मी अंदाज से काफी अलग माना जा रहा है।
ट्रेलर में श्रद्धा कपूर के संवाद भी कहानी की गंभीरता और किरदार की भावनात्मक स्थिति को सामने लाते हैं। एक दृश्य में उनका किरदार कहता है, ‘देखते हैं क्या टूटता है, मेरा भरोसा या मेरा घमंड। मेरा भरोसा ही मेरा घमंड था रे। जब वो टूट गया ना,सब टूट गया।’ इस संवाद के जरिए विठाबाई के भीतर चल रहे भावनात्मक संघर्ष की झलक मिलती है। यह बताता है कि उनके लिए आत्मविश्वास और अपनी कला पर भरोसा कितना महत्वपूर्ण था। कहानी में ऐसे कई मौके दिखाई देते हैं,जहाँ उन्हें अपनी पहचान और आत्मसम्मान के लिए कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
फिल्म के ट्रेलर में अभिनेता मोहम्मद जीशान अय्यूब की मौजूदगी भी ध्यान खींचती है। उनका किरदार श्रद्धा कपूर के किरदार के साथ कई अहम दृश्यों में नजर आता है। उनके संवादों में भावनात्मक जुड़ाव के साथ एक अलग तरह की ऊर्जा दिखाई देती है। एक दृश्य में वह ईठा से कहते हैं कि नृत्य की प्रतिस्पर्धा में उसकी तकदीर भी उसे नहीं हरा सकती। इसके बाद वह उसे नृत्य करने के लिए प्रेरित करते हुए आसमान को मंडप, चाँद को रोशनी और हवाओं को संगीत के स्पीकर के रूप में बताते हैं। वह याद दिलाते हैं कि ईठा खुद कहती थी कि बिना कुछ किए मरने पर उसे बेचारी कहा जाएगा।
इस बात का जवाब देते हुए श्रद्धा कपूर का किरदार कहता है, ‘पर नाचते हुए मरी तो मिसाल बन जाऊँगी।’ यह संवाद ट्रेलर के सबसे प्रभावशाली हिस्सों में से एक है। इसमें विठाबाई का कला के प्रति समर्पण और अपनी पहचान बनाने का जुनून साफ दिखाई देता है। उनके लिए नृत्य केवल मनोरंजन या पेशा नहीं,बल्कि जीवन का उद्देश्य और अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का माध्यम है। यह संवाद उस मानसिकता को भी दर्शाता है, जिसमें एक कलाकार मुश्किलों के बावजूद अपनी कला से पीछे हटने को तैयार नहीं होता।
ट्रेलर में नौवारी साड़ी को लेकर श्रद्धा कपूर का एक और संवाद खास तौर पर ध्यान आकर्षित करता है। वह कहती हैं, ‘ये सिर्फ कपड़ा नहीं, अभिमान है। जिसे पहनने मिले, वो भाग्यवान है।’ इस संवाद के जरिए पारंपरिक मराठी पहनावे को केवल एक पोशाक के रूप में नहीं,बल्कि सांस्कृतिक पहचान,गौरव और सम्मान के प्रतीक के तौर पर प्रस्तुत किया गया है। फिल्म में नौवारी साड़ी,पारंपरिक आभूषण और लावणी के मंचीय रूप के माध्यम से महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत को प्रमुखता दी गई है। इस तरह कहानी में लोककला के साथ-साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहने का भाव भी दिखाई देता है।
‘ईठा’ में श्रद्धा कपूर के अलावा रणदीप हुड्डा, मोहम्मद जीशान अय्यूब और नाना पाटेकर भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएँगे। रणदीप हुड्डा फिल्म में अन्ना सावंत मर्चेंट का किरदार निभा रहे हैं। यह पात्र विठाबाई के जीवन से जुड़ा अहम हिस्सा है। अभिनेता ने हाल ही में सोशल मीडिया पर अपने किरदार का पहला पोस्टर साझा किया था। पोस्टर में उनका लुक काफी बदला हुआ दिखाई दिया। बड़ी मूँछे और भारी शरीर के साथ रणदीप एक अलग व्यक्तित्व में नजर आए। उनके इस रूप ने फिल्म में उनके किरदार को लेकर दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा दी है।
फिल्म की सहायक भूमिकाओं में अनंत जोशी,सिद्धार्थ जाधव, अक्षरा सिंह और उल्का गुप्ता भी शामिल हैं। कलाकारों की यह टीम कहानी को व्यापक रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। नाना पाटेकर जैसे अनुभवी अभिनेता की मौजूदगी भी फिल्म को लेकर दर्शकों की उम्मीदें बढ़ाती है। हालाँकि,ट्रेलर में सभी किरदारों की कहानी का पूरा खुलासा नहीं किया गया है,लेकिन इसकी झलक से स्पष्ट है कि फिल्म में विठाबाई के व्यक्तिगत जीवन,उनके आसपास के लोगों और लोककला की दुनिया से जुड़े कई पहलुओं को जगह दी गई है।
फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी मशहूर संगीतकार जोड़ी अजय-अतुल ने सँभाली है। महाराष्ट्र की लोकपरंपरा और लावणी की विशिष्ट संगीत शैली को देखते हुए फिल्म का संगीत बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लावणी में गीत, ताल, गायन और नृत्य का विशेष महत्व होता है। ऐसे में अजय-अतुल का संगीत फिल्म के सांस्कृतिक माहौल को प्रभावशाली बनाने में अहम योगदान दे सकता है। वहीं,डांस सीक्वेंस की कोरियोग्राफी वैभवी मर्चेंट ने की है। लावणी की पारंपरिक शैली को पर्दे पर जीवंत करने के लिए नृत्य की बारीकियों और कलाकारों की प्रस्तुति पर विशेष ध्यान दिया गया है।
‘ईठा’ एक जीवनी पर आधारित संगीतमय ड्रामा फिल्म है,जिसकी कहानी विठाबाई नारायणगांवकर के जीवन और उनके संघर्षों से प्रेरित है। फिल्म का निर्देशन लक्ष्मण उतेकर ने किया है। इसके निर्माण की जिम्मेदारी दिनेश विजान, लक्ष्मण उतेकर और करिश्मा शर्मा ने सँभाली है। मैडॉक फिल्म्स और कठपुतली क्रिएशन्स के बैनर तले तैयार की गई यह फिल्म 4 दिसंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म के जरिए दर्शकों को महाराष्ट्र की लोककला की दुनिया और एक ऐसी कलाकार के जीवन से परिचित कराने की कोशिश की गई है,जिनका योगदान आज भी याद किया जाता है।
विठाबाई नारायणगांवकर महाराष्ट्र की लोककला जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों में गिनी जाती थीं। उनका जन्म महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के पंढरपुर में एक ऐसे परिवार में हुआ था, जहाँ कला और संगीत का माहौल पहले से मौजूद था। उनके पिता और चाचा का अपना कला-दल था। इसी वजह से विठाबाई को बचपन से ही लोककलाओं को करीब से देखने और समझने का अवसर मिला। लावणी,गवलन और भेदिक जैसे पारंपरिक लोकगीतों से उनका परिचय कम उम्र में ही हो गया था। धीरे-धीरे मंच की दुनिया उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गई।
विठाबाई ने बहुत छोटी उम्र में ही मंच पर प्रस्तुतियाँ देना शुरू कर दिया था। उनकी प्रतिभा केवल नृत्य तक सीमित नहीं थी। अभिनय,गायन और दर्शकों से जुड़ने की कला ने उन्हें बाकी कलाकारों से अलग पहचान दिलाई। अपनी मेहनत और हुनर के दम पर उन्होंने लावणी को नई पहचान दिलाने में योगदान दिया। उनकी प्रस्तुतियों में कला के प्रति समर्पण और आत्मविश्वास साफ झलकता था। इसी असाधारण प्रतिभा के कारण उन्हें ‘लावणी सम्राज्ञी’ के नाम से जाना जाने लगा।
विठाबाई का जीवन इस बात का उदाहरण रहा कि लोककलाओं से जुड़े कलाकारों को अपनी पहचान और सम्मान कायम करने के लिए कई चुनौतियों से गुजरना पड़ता है। उन्होंने अपनी कला को ही अपनी ताकत बनाया और उसी के सहारे दर्शकों के बीच विशिष्ट स्थान हासिल किया। वर्ष 2002 में उनका निधन हो गया,लेकिन महाराष्ट्र की लोकसंस्कृति में उनके योगदान को आज भी सम्मान के साथ याद किया जाता है।
श्रद्धा कपूर की ‘ईठा’ के जरिए विठाबाई की इसी प्रेरणादायक यात्रा को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत किया जाएगा। फिल्म का ट्रेलर संकेत देता है कि इसमें मनोरंजन और संगीत के साथ एक कलाकार के आत्मसम्मान, संघर्ष और सांस्कृतिक विरासत की कहानी भी देखने को मिलेगी। अब दर्शकों को 4 दिसंबर 2026 का इंतजार है,जब यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होकर विठाबाई के जीवन और उनकी कला को नए दर्शकों तक पहुँचाएगी।
