मुंबई,1 सितंबर (युआईटीवी)- वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 7.8 प्रतिशत की मजबूत विकास दर दर्ज की है। अप्रैल से जून 2026 के बीच दर्ज हुई यह वृद्धि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में दर्ज 6.9 प्रतिशत की विकास दर से 0.9 प्रतिशत अधिक है। बेहतर जीडीपी आँकड़ों के सामने आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे देश के लिए बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की तेज आर्थिक वृद्धि देश के लोगों की सामूहिक क्षमता को दर्शाती है।
प्रधानमंत्री ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए पहली तिमाही के जीडीपी आँकड़ों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की 7.8 प्रतिशत की शानदार जीडीपी वृद्धि एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। उनके मुताबिक,वैश्विक अनिश्चितताओं,तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी विकास गति बनाए रखी है।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में देश की आर्थिक क्षमता पर भरोसा जताते हुए कहा कि भारतीयों की सामूहिक ताकत ने यह सुनिश्चित किया है कि बाहरी चुनौतियों के बीच भी देश तेजी से आगे बढ़ता रहे। उन्होंने अपने संदेश के अंत में निराशावादी सोच रखने वालों पर भी टिप्पणी की और कहा कि निराशावादियों की हार हुई है तथा भारत एक बार फिर खिल उठा है।
जीडीपी के ताजा आँकड़े इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि पहली तिमाही की 7.8 प्रतिशत वृद्धि भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमान से अधिक रही है। अगस्त की शुरुआत में मौद्रिक नीति समिति के फैसलों की घोषणा करते समय भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के लिए 7 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान जताया था। वास्तविक आँकड़ा अनुमान से 0.8 प्रतिशत अधिक रहा है। इससे अर्थव्यवस्था की मौजूदा मजबूती का संकेत मिलता है।
पहली तिमाही के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि में सेवा क्षेत्र ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तृतीयक क्षेत्र यानी सेवा क्षेत्र की विकास दर 10 प्रतिशत रही। सेवा क्षेत्र के भीतर वित्त, रियल एस्टेट, सूचना प्रौद्योगिकी और पेशेवर सेवाओं ने विशेष रूप से मजबूत प्रदर्शन किया। इन क्षेत्रों में 12.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई,जिसने समग्र सेवा क्षेत्र की गति को बनाए रखने में अहम योगदान दिया।
भारतीय अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र का महत्व लगातार बढ़ रहा है। वित्तीय सेवाओं, रियल एस्टेट,सूचना प्रौद्योगिकी और पेशेवर सेवाओं में गतिविधियाँ बढ़ने का असर रोजगार, निवेश और घरेलू माँग पर भी पड़ता है। पहली तिमाही के आँकड़ों से संकेत मिलता है कि इन क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियाँ मजबूत बनी हुई हैं और उन्होंने देश की समग्र विकास दर को ऊँचा रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
वहीं,द्वितीयक क्षेत्र यानी औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े क्षेत्र ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। स्थिर कीमतों पर इस क्षेत्र की विकास दर 8.6 प्रतिशत रही। विनिर्माण, निर्माण और अन्य औद्योगिक गतिविधियों में बनी मजबूती ने आर्थिक विस्तार को सहारा दिया। वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियों और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद द्वितीयक क्षेत्र का प्रदर्शन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
हालाँकि, प्राथमिक क्षेत्र की वृद्धि तुलनात्मक रूप से धीमी रही। पहली तिमाही में प्राथमिक क्षेत्र की विकास दर 2.9 प्रतिशत दर्ज की गई। कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों की विकास दर 3.6 प्रतिशत रही। इसका अर्थ है कि जहाँ सेवा और औद्योगिक क्षेत्रों ने अर्थव्यवस्था की वृद्धि को तेज गति दी,वहीं प्राथमिक क्षेत्र की वृद्धि अपेक्षाकृत सीमित रही। इसके बावजूद कृषि क्षेत्र की 3.6 प्रतिशत वृद्धि ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और घरेलू माँग को सहारा देने में भूमिका निभाई।
जीडीपी के आँकड़ों में निवेश से जुड़ा प्रदर्शन भी खास तौर पर उल्लेखनीय रहा। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में सकल स्थिर पूँजी निर्माण की वृद्धि दर 11.9 प्रतिशत रही। यह आँकड़ा पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में दर्ज 5.8 प्रतिशत की वृद्धि दर से काफी अधिक है। इसका मतलब है कि अर्थव्यवस्था में पूँजीगत निवेश से जुड़ी गतिविधियों में तेजी आई है।
सकल स्थिर पूँजी निर्माण में बढ़ोतरी को आर्थिक गतिविधियों के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है। जब कंपनियाँ और अन्य आर्थिक इकाइयाँ मशीनरी, निर्माण, बुनियादी ढाँचे और अन्य स्थायी परिसंपत्तियों में अधिक निवेश करती हैं,तो इससे भविष्य की उत्पादन क्षमता मजबूत हो सकती है। पहली तिमाही में इस क्षेत्र की लगभग दोगुनी वृद्धि यह संकेत देती है कि निवेश गतिविधियों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
भारत की 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि ऐसे समय में सामने आई है,जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई तरह की चुनौतियों से गुजर रही है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव,भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान जैसी परिस्थितियाँ दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। ऐसे वातावरण में भारतीय अर्थव्यवस्था की तेज वृद्धि को सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने भी अपने बयान में इन्हीं वैश्विक चुनौतियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति श्रृंखला की समस्याओं के बावजूद भारत का तेजी से बढ़ना देश की सामूहिक क्षमता का प्रमाण है। उनका संदेश यह बताने की कोशिश करता है कि बाहरी दबावों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अपने विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रही है।
ताजा आँकड़े सरकार और नीति निर्माताओं के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। सेवा क्षेत्र की दो अंकों की वृद्धि,औद्योगिक क्षेत्र का मजबूत प्रदर्शन और पूँजी निर्माण में तेज बढ़ोतरी अर्थव्यवस्था के अलग-अलग हिस्सों में मजबूती का संकेत देती है। हालाँकि,प्राथमिक क्षेत्र की अपेक्षाकृत धीमी वृद्धि को लेकर आगे विशेष ध्यान देने की जरूरत हो सकती है, क्योंकि कृषि का प्रदर्शन ग्रामीण आय और उपभोग माँग पर सीधे प्रभाव डालता है।
कुल मिलाकर,वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के जीडीपी आँकड़ों ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत शुरुआत को रेखांकित किया है। 7.8 प्रतिशत की विकास दर न केवल पिछले साल की समान अवधि से अधिक है,बल्कि केंद्रीय बैंक के अनुमान से भी बेहतर रही है। सेवा क्षेत्र ने वृद्धि का नेतृत्व किया,औद्योगिक क्षेत्र ने मजबूती दिखाई और पूँजी निवेश में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन आँकड़ों को भारत की सामूहिक आर्थिक शक्ति का प्रमाण बताते हुए भरोसा जताया है कि देश वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी विकास की गति बनाए रखेगा। अब आगे चुनौती इस वृद्धि को लंबे समय तक बनाए रखने,निवेश की गति को और मजबूत करने,कृषि क्षेत्र की वृद्धि बढ़ाने और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों से पैदा होने वाले जोखिमों का प्रभावी ढंग से सामना करने की होगी।
