चक्रवात

आंध्र प्रदेश में चक्रवात मिचौंग से फसलों को हुआ भारी नुकसान

अमरावती, 7 दिसंबर (युआईटीवी)- आंध्र प्रदेश में आए भीषण चक्रवाती तूफान मिचौंग से फसलों को भारी नुकसान हुआ है। भीषण चक्रवाती तूफान मिचौंग बंगाल की खाड़ी में आया है। जिससे आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश होने से पानी भर गया है। निचले इलाकों में भारी बारिश से झीलों, टैंकों और नालों में उफान आ गए हैं और इस वजह से सड़कों पर पानी भर गया। कुछ गाँव चक्रवात प्रभावित जिलों से कट गए हैं।

भीषण चक्रवाती तूफान मिचौंग के कारण पेड़ व बिजली के खंभे गिर हैं और जलस्रोतों में पानी भर गया है। जिससे प्रभावित क्षेत्रों में सड़क संपर्क बाधित हो गया।

मंगलवार को चक्रवात बापटला के पास तट को पार कर गया और इससे तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हुई। चक्रवात से प्रभावित होने वाले जिले बापटला,गुंटूर,एनटीआर,तिरुपति,कृष्णा,पलनाडु,नेल्लोर,एलुरु,पूर्वी गोदावरी, पश्चिम गोदावरी,अनाकापल्ली,अल्लूरी सीतारमाराजू हैं। इन जिलों में हजारों एकड़ से अधिक फसलें क्षतिग्रस्त हो गईं।

जब फसल कटने के लिए तैयार हो गए थे,तभी ये आसमानी आफत रुपी चक्रवात आ गई और फसलें नष्ट हो गई। इस नुकसान से किसान सदमे में हैं। चक्रवात मिचौंग से धान,मक्के,कपास और मिर्च की फसल को व्यापक नुकसान हुआ है।

चक्रवात प्रभावित जिलों के कलेक्टरों, एसपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने निर्देश दिया है कि सामान्य स्थिति बहाल करने पर ध्यान केंद्रित किया जाए।

चक्रवात से हुई क्षति पर कैंप कार्यालय में एक समीक्षा बैठक की गई। इस बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों को सहायता देने को कहा। अधिकारियों से उन्होंने कहा कि जलमग्न कृषि क्षेत्रों से उपलब्ध मानव संसाधनों के साथ पानी निकालने का कार्य प्राथमिकता के साथ किया जाए और फसलों की रक्षा आरबीके द्वारा जारी एसओपी के अनुसार करने को कहा। उन्होंने बीज आपूर्ति के बारे में कहा कि 80 प्रतिशत अनुदान पर कृषि विभाग बीज आपूर्ति के लिए तैयार रहे।

उन्होंने कहा कि सरकार हर कदम पर किसानों के साथ खड़ी है। चाहे वह फसलों की सुरक्षा की बात हो या गीले धान की खरीद की बात हो। जो भी किसान नुकसान झेल रहे हैं,उनको सरकार की ओर से हर संभव सहायता प्रदान किया जाएगा और उन्हें मुआवजा भी दिया जाएगा।

आगे उन्होंने कहा कि स्वच्छता पर ध्यान देना भी बहुत जरुरी है। यदि स्वच्छता पर ध्यान नहीं दिया गया तो बीमारियों का प्रसार होने लगेगा। इसलिए प्रभावित क्षेत्रों में आधिकारिक मशीनरी को सड़कों को बहाल करने और बिजली आपूर्ति करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो भी कर्मचारी राहत और बचाव कार्यों में लगे हुए हैं,सरकार उनके साथ खड़ी रहेगी।

प्रभावित क्षेत्रों में जिला कलेक्टरों और विशेष अधिकारियों ने समय पर एहतियाती कदम उठाए और पीड़ितों की मदद की। उनके इन अच्छे कामों के लिए मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने उनकी तारीफ़ की और आगे उन्होंने कहा कि आप लोग वित्त की परवाह न करें और पीड़ित परिवारों को वित्तीय मदद करने हेतु आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि यदि आज हम पीड़ित होते तो जैसी सहायता की अपेक्षा हम पीड़ित के रूप में करते हैं ,वैसी ही हमें वित्तीय सहायता पीड़ितों के लिए करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को यह महसूस करना चाहिए कि इस कठिन समय में कलेक्टर उनके बचाव में आए हैं।

उन्होंने पीड़ितों को आश्वासन दिया है कि जिन लोगों के घर इस चक्रवात में क्षतिग्रस्त हो गए हैं,उन्हें 10,000 रुपये का भुगतान किया जाना चाहिए। जो लोग राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं,उनके साथ अच्छा व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने कड़े निर्देश देते हुए कहा कि जब परिस्थिति ठीक हो जाएगी और लोग अपने -अपने घर के लिए निकले तो उन्हें अनिवार्य रूप से मुआवजा और राशन दिया जाना चाहिए। इसमें किसी प्रकार की कोई कोताही न बरती जाए।

राहत कार्य के दौरान कडप्पा के एक पुलिस कांस्टेबल की एक पेड़ गिरने से मौत हो गई थी। जिसके परिवार के लिए मुख्यमंत्री ने 30 लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की।

 

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