चेन्नई,3 जनवरी (युआईटीवी)- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को मनी लॉड्रिंग से जुड़े मामले में तमिलनाडु के वेल्लोर से सांसद और डीएमके नेता कथिर आनंद के पाँच ठिकानों पर छापेमारी की। यह छापेमारी सुबह से शुरू हुई और अभी भी जारी है। हालाँकि,ईडी के अधिकारियों ने इस छापेमारी के बारे में मीडिया को कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
कथिर आनंद, जिनके खिलाफ यह छापेमारी की गई है,वह तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके के वरिष्ठ नेता और स्टालिन सरकार में दूसरे नंबर के मंत्री एस. दुरईमुरुगन के बेटे हैं। दुरईमुरुगन डीएमके के महासचिव हैं और उन्हें मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के करीबी सहयोगी माना जाता हैं। कथिर आनंद वेल्लोर लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं और संसद में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।
डीएमके पार्टी ने इस छापेमारी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे पार्टी को निशाना बनाने का प्रयास बताया है। पार्टी का आरोप है कि यह छापेमारी राजनीतिक कारणों से की जा रही है और इसका उद्देश्य उनकी पार्टी को कमजोर करना है। इस छापेमारी का संबंध 2019 में दर्ज एक मामले से जोड़ा जा रहा है।
दरअसल, 2019 में चुनाव आयोग (ईसीआई) ने वेल्लोर लोकसभा सीट पर चुनाव रद्द करने की सिफारिश की थी। इसके बाद तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस पर कार्रवाई की और वेल्लोर का चुनाव रद्द कर दिया था। चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया के दौरान कथिर आनंद के घर और अन्य स्थानों से 11 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी बरामद की थी। इसके कारण चुनाव रद्द कर दिया गया था और 16 अप्रैल 2019 को वेल्लोर में चुनाव स्थगित कर दिया गया था।
इसके बाद 5 अगस्त 2019 को फिर से चुनाव हुआ,जिसमें डीएमके के उम्मीदवार कथिर आनंद ने एआईएडीएमके के उम्मीदवार ए.सी. शनमुघम को 8,141 वोटों के छोटे अंतर से हराया था। चुनाव आयोग की कार्रवाई के बाद जब यह मामला चर्चा में आया,तब डीएमके ने इसे विपक्षी दलों की साजिश करार दिया था।
2024 में हुए लोकसभा चुनाव में कथिर आनंद ने ए.सी. शनमुघम को फिर से हराया, लेकिन इस बार उनका जीत का अंतर काफी बड़ा था। उन्होंने 2,15,702 वोटों से जीत हासिल की,जो उनके राजनीतिक प्रभाव और जनता के बीच उनकी लोकप्रियता का संकेत था।
वर्तमान में, इस छापेमारी के बाद से विपक्ष और डीएमके ने आरोप लगाया है कि ईडी और अन्य जाँच एजेंसियाँ राजनीतिक दबाव के तहत काम कर रही हैं। हालाँकि,इस कार्रवाई को लेकर ईडी की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। इस मामले में आगे की कार्रवाई और जाँच पर नजर रखी जा रही है,क्योंकि यह घटनाक्रम तमिलनाडु की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला सकता है।
