प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (तस्वीर क्रेडिट@SonOfBharat7)

ईरान पर हमले रोकने का इजरायल का ऐलान,नेतन्याहू ने दी चेतावनी- दोबारा हमला हुआ तो मिलेगा और भी कड़ा जवाब

तेल अवीव,9 जून (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में कई दिनों से जारी तनाव और सैन्य टकराव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने देश के नाम संबोधन में एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने का ऐलान किया है। हालाँकि,उन्होंने साथ ही यह स्पष्ट कर दिया कि यदि ईरान भविष्य में इजरायल पर किसी भी प्रकार का हमला करने की कोशिश करता है,तो उसका जवाब पहले से कहीं अधिक ताकत और कठोरता के साथ दिया जाएगा। नेतन्याहू के इस बयान को क्षेत्रीय तनाव में अस्थायी नरमी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है,लेकिन उनके संबोधन में दी गई चेतावनी ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि दोनों देशों के बीच अविश्वास और टकराव की स्थिति अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपने संबोधन में पिछले एक वर्ष के दौरान इजरायल द्वारा उठाए गए सैन्य कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने समय रहते ऐसे खतरों को समाप्त करने का प्रयास किया,जो देश की सुरक्षा और अस्तित्व के लिए गंभीर चुनौती बन सकते थे। उन्होंने दावा किया कि इजरायल ने ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की और उन खतरों को विफल किया,जो भविष्य में इजरायल के लिए गंभीर परिणाम पैदा कर सकते थे।

अपने संबोधन के दौरान नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल ने हमेशा अपनी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और इसी नीति के तहत आवश्यक सैन्य कदम उठाए गए। उन्होंने कहा कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं की जाती,तो परिस्थितियाँ कहीं अधिक गंभीर हो सकती थीं। उन्होंने दोहराया कि उनकी सरकार किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगी और यह इजरायल की सुरक्षा नीति का मूल आधार बना रहेगा।

प्रधानमंत्री ने केवल ईरान ही नहीं,बल्कि लेबनान स्थित संगठन हिज्बुल्लाह के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाइयों का भी विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि हिज्बुल्लाह इजरायल के उत्तरी क्षेत्रों पर बड़े पैमाने पर हमले की तैयारी कर रहा था और उसके पास हजारों लड़ाकों के साथ-साथ बड़ी संख्या में मिसाइलें और रॉकेट मौजूद थे। नेतन्याहू के अनुसार,इजरायली सेना ने इन योजनाओं को समय रहते विफल कर दिया और संगठन की सैन्य क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुँचाया।

उन्होंने कहा कि दक्षिणी लेबनान में सुरक्षा क्षेत्र के भीतर मौजूद हिज्बुल्लाह के कई ठिकानों को निशाना बनाया गया है। उनके अनुसार,इजरायली सेना अब भी उन बुनियादी ढांचों को समाप्त करने की कार्रवाई जारी रखे हुए है,जिनका उपयोग भविष्य में हमलों के लिए किया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि कई भूमिगत सैन्य ठिकानों को भी नष्ट किया गया है और हिज्बुल्लाह पहले की तुलना में काफी कमजोर हो चुका है।

नेतन्याहू ने कहा कि पिछले 24 घंटों के दौरान ईरान और हिज्बुल्लाह ने इजरायल के खिलाफ एक नया समीकरण स्थापित करने की कोशिश की। उनके अनुसार,यह प्रयास इस धारणा पर आधारित था कि इजरायल पर हमले किए जाएँगे और इजरायल प्रतिक्रिया नहीं देगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी सरकार ऐसी किसी भी स्थिति को स्वीकार नहीं करेगी और इजरायल पर हमला होने की स्थिति में जवाबी कार्रवाई अवश्य की जाएगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में देश की सुरक्षा के मुद्दे पर कभी समझौता नहीं किया है और आगे भी नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि इजरायल को अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है और उसकी सेना किसी भी खतरे का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि हिज्बुल्लाह की ओर से इजरायली क्षेत्र में की गई फायरिंग के बाद उन्होंने सेना को बेरूत में मौजूद आतंकी ठिकानों पर हमला करने का निर्देश दिया था और उस कार्रवाई को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।

इसी तरह उन्होंने कहा कि ईरान की ओर से हमले होने के बाद इजरायली सेना को ईरान के विभिन्न सैन्य और आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाने का आदेश दिया गया। उनके अनुसार,इन हमलों का उद्देश्य केवल जवाबी कार्रवाई नहीं था,बल्कि उन क्षमताओं को कमजोर करना भी था जिनका उपयोग भविष्य में इजरायल के खिलाफ किया जा सकता था।

हालाँकि,अपने संबोधन के अंत में नेतन्याहू ने संकेत दिया कि फिलहाल स्थिति में कुछ हद तक स्थिरता आई है। उन्होंने कहा कि इजरायल अपनी ओर से फायरिंग रोक रहा है क्योंकि तेहरान की सरकार ने भी इजरायल पर हमले बंद कर दिए हैं,लेकिन उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में ईरान ने फिर से हमला करने की गलती की,तो उसका जवाब कहीं अधिक शक्तिशाली और व्यापक होगा।

नेतन्याहू ने अपने भाषण में अमेरिका के साथ इजरायल के घनिष्ठ संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ सकारात्मक और सम्मानजनक बातचीत हुई है। उन्होंने संकेत दिया कि क्षेत्रीय सुरक्षा और ईरान से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच समन्वय बना हुआ है। उनके अनुसार,इजरायल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सभी कदम उठाता रहेगा और अपने सहयोगियों के साथ मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने का प्रयास करेगा।

दूसरी ओर,ईरान ने भी इजरायल पर हमले रोकने की घोषणा की है,लेकिन साथ ही यह स्पष्ट किया है कि यदि उसकी सुरक्षा या संप्रभुता को चुनौती दी गई,तो वह जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखता है। इस प्रकार दोनों देशों की ओर से सैन्य कार्रवाई रोकने के संकेत मिलने के बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं मानी जा रही है।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस घटनाक्रम पर करीब से नजर बनाए हुए है। कई देशों और वैश्विक संगठनों ने लंबे समय से दोनों पक्षों से संयम बरतने और संघर्ष को आगे न बढ़ाने की अपील की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष सैन्य टकराव लंबे समय तक जारी रहता,तो इसका प्रभाव पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र पर पड़ सकता था और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति से लेकर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार तक कई क्षेत्रों में अस्थिरता बढ़ सकती थी।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नेतन्याहू का यह संबोधन दोहरा संदेश देता है। एक ओर उन्होंने घरेलू जनता को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है,वहीं दूसरी ओर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को यह संकेत भी दिया कि इजरायल फिलहाल तनाव कम करने के लिए तैयार है। हालाँकि,उनकी चेतावनी से यह भी स्पष्ट हो गया कि किसी भी नए हमले की स्थिति में सैन्य प्रतिक्रिया तत्काल और कठोर हो सकती है।

फिलहाल क्षेत्र में हालात अपेक्षाकृत शांत दिखाई दे रहे हैं,लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान और इजरायल के बीच वर्षों पुरानी प्रतिद्वंद्विता और अविश्वास को देखते हुए स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की सैन्य गतिविधियों,कूटनीतिक प्रयासों और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया पर दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी। मध्य पूर्व की स्थिरता और सुरक्षा के लिए यह घटनाक्रम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इसके दूरगामी प्रभाव क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं।