आरसीबी के जश्न में भगदड़ (तस्वीर क्रेडिट@Shivamt51804377)

आरसीबी की ऐतिहासिक जीत के बाद मची भगदड़ में 11 की मौत, 33 घायल,आईपीएल चेयरमैन ने इसे बहुत दुखद व दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया

बेंगलुरु,5 जून (युआईटीवी)- बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर मंगलवार को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी ) की पहली आईपीएल जीत का जश्न मातम में बदल गया, जब वहाँ भयानक भगदड़ मच गई। इस दर्दनाक हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई,जबकि 33 लोग घायल हो गए। यह घटना जश्न और उल्लास के माहौल के बीच प्रशासनिक चूक और भीड़ प्रबंधन की विफलता का गंभीर उदाहरण बनकर सामने आई।

आरसीबी ने 17 साल के लंबे इंतजार के बाद आईपीएल 2025 खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। टीम की यह जीत बेंगलुरु में उत्सव का कारण बनी और हजारों प्रशंसक एम.चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर जमा हो गए। खबर थी कि आरसीबी की विजय परेड यहीं से निकाली जाएगी,लेकिन विजय परेड को लेकर स्थानीय प्रशासन और आयोजकों के बीच तालमेल की कमी स्पष्ट दिखी। जुलूस की अनुमति नहीं थी, क्योंकि बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस ने भीड़ प्रबंधन को लेकर पहले ही चिंता जताई थी। इसके बावजूद,बड़ी संख्या में लोग स्टेडियम के गेट नंबर 2 के बाहर जमा हो गए और धीरे-धीरे हालात बिगड़ते चले गए।

जब आरसीबी के खिलाड़ी मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से मिलने विधान सौध पहुँचे,उसी दौरान बाहर इंतजार कर रही भीड़ में यह भ्रम फैल गया कि खिलाड़ी जल्द-ही स्टेडियम पहुँचेंगे। इस भ्रम और अफवाह के कारण अचानक भगदड़ मच गई, जिसमें दर्जनों लोग कुचले गए।

आईपीएल चेयरमैन अरुण धूमल ने इस हादसे पर गहरा दुख जताया और स्पष्ट किया कि बीसीसीआई को इस जश्न की योजना की कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा,“यह बहुत ही दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। बीसीसीआई की तरफ से मैं उन परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूँ,जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया। जब मैंने मैदान में मौजूद लोगों से बात की तो किसी को भी पता नहीं था कि बाहर क्या हो रहा है। जश्न के माहौल में यह त्रासदी बेहद चौंकाने वाली है।”

धूमल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि आईपीएल आधिकारिक रूप से पहले ही समाप्त हो चुका था और आयोजन के बाद की किसी भी स्थानीय गतिविधि की ज़िम्मेदारी राज्य प्रशासन और आयोजकों की होती है।

कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (केएससीए) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर घटना पर गंभीर चिंता और शोक जताया। बयान में कहा गया कि, “हम इस दुखद घटना से गहरे आहत हैं। हमारी संवेदनाएँ उन परिवारों के साथ हैं,जिन्होंने अपने परिजनों को खोया। हम पूरी ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ इस त्रासदी पर खेद प्रकट करते हैं और पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं।”

केएससीए ने प्रत्येक मृतक के परिवार को ₹5 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की। इसके अतिरिक्त,कर्नाटक राज्य सरकार ने भी प्रत्येक मृतक के परिजनों को ₹10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता का ऐलान किया है। घायलों को भी समुचित इलाज और सहायता दी जा रही है।

इस घटना ने बेंगलुरु के नागरिकों और आरसीबी के प्रशंसकों में गहरा आक्रोश और दुख पैदा किया है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाए कि जब ट्रैफिक पुलिस ने अनुमति नहीं दी थी,तब इस तरह के आयोजन की कोई पूर्व तैयारी क्यों नहीं की गई? भीड़ नियंत्रण के लिए कोई बैरिकेडिंग,पुलिस बल या आपातकालीन सेवा पहले से क्यों तैनात नहीं थी?

कई स्थानीय नेताओं और नागरिक संगठनों ने माँग की है कि इस घटना की उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए और उत्तरदायी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो।

आरसीबी ने अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए फाइनल में पंजाब किंग्स को छह रन से हराकर 17 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अपना पहला आईपीएल खिताब जीता था। यह जीत टीम,प्रशंसकों और पूरे बेंगलुरु के लिए गर्व और हर्ष का क्षण थी। कप्तान फाफ डु प्लेसिस और बल्लेबाज़ विराट कोहली की शानदार पारियों ने इस खिताबी जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई,लेकिन अब यह ऐतिहासिक जीत हमेशा के लिए इस भयावह हादसे से जुड़ गई है। जो दिन खुशियों और गौरव के लिए याद किया जाना था,वह अब दुख,चूक और शोक का प्रतीक बन गया है।

इस हादसे ने एक बार फिर याद दिलाया कि बड़े सार्वजनिक आयोजनों के लिए स्पष्ट योजना,पूर्व अनुमति,भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन प्रबंधन अत्यंत आवश्यक हैं। किसी भी जश्न का उद्देश्य जनहित और सुरक्षा के दायरे में रहकर ही पूरा किया जा सकता है।

बीसीसीआई,राज्य सरकार और स्थानीय निकायों के बीच बेहतर समन्वय,पारदर्शिता और तैयारी भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोक सकती है। यह वक्त सिर्फ संवेदनाएँ व्यक्त करने का नहीं,बल्कि गंभीर आत्मविश्लेषण और सुधारात्मक कदम उठाने का है।

आरसीबी की जीत ने जहाँ एक ओर बेंगलुरु और टीम के प्रशंसकों को 17 साल का सपना पूरा होने का सुखद अनुभव दिया,वहीं दूसरी ओर चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर की भगदड़ ने उस उत्सव को अपरिपक्व योजना और समन्वय की कमी के कारण दुखद त्रासदी में बदल दिया।

अब देश के खेल संगठनों और सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे इस घटना से सीख लें, ताकि भविष्य में कोई भी जश्न किसी की जान लेने वाला हादसा न बने। जश्न का हक सबको है,लेकिन जिम्मेदारी और सुरक्षा के साथ।