मंडी में बारिश ने भारी मचाई भारी तबाही (तस्वीर क्रेडिट@Agnihotriinc)

उत्तराखंड-हिमाचल में मानसून का कहर: बारिश बनी आफत,मलबा,भूस्खलन और अलर्ट जारी, बदरीनाथ हाईवे बंद

हिमाचल प्रदेश,7 जुलाई (युआईटीवी)- भारत के उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में मानसून का असर अब खतरनाक रूप लेता जा रहा है। जहाँ एक ओर मैदानी इलाकों में किसान और आम लोग बारिश से खुश नजर आ रहे हैं,वहीं पहाड़ों में यह बारिश जीवन के लिए खतरा बन गई है। लगातार हो रही मूसलधार बारिश से उत्तराखंड और हिमाचल में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। खासकर भूस्खलन,मलबा और नदियों का बढ़ता जलस्तर लोगों के लिए मुसीबतें खड़ी कर रहा है।

उत्तराखंड के चमोली जिले में रविवार देर रात से मूसलधार बारिश का सिलसिला जारी है। बारिश इतनी तेज है कि कई जगहों पर भूस्खलन और भारी मलबा आने से सड़क मार्ग पूरी तरह बाधित हो गए हैं। लिंक रोड्स पर मलबा जमा होने के कारण लोगों को आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्कूलों को बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया है।

प्रशासन ने एहतियातन स्कूलों में छुट्टी की घोषणा की है,जिससे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हालात कितने गंभीर हैं। आम जनजीवन अस्त-व्यस्त है और ग्रामीण इलाकों से शहरों की ओर जाने वाले रास्ते कट गए हैं।

उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थस्थल बदरीनाथ की ओर जाने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग भी प्रभावित हुआ है। नंदप्रयाग और कर्णप्रयाग के बीच भारी मात्रा में मलबा आ गया है, जिससे बदरीनाथ हाईवे पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है। इस क्षेत्र में लगातार बारिश से मलबा हटाने का काम भी बाधित हो रहा है।

प्रशासन ने यात्रियों और वाहनों को सुरक्षित स्थानों पर रोक दिया है,ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके। मलबा हटाने के लिए जेसीबी और अन्य भारी मशीनरी लगाई गई है,लेकिन बारिश ने कार्य को मुश्किल बना दिया है।

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में भी हालात चिंताजनक होते जा रहे हैं। लगातार बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है,जिससे बाढ़ और अन्य जलजनित आपदाओं का खतरा मंडराने लगा है।

चंबा के एसडीएम प्रियांशु खाती ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से नदी-नालों के पास न जाएँ। उन्होंने चेताया कि प्रशासन पूरी तरह सतर्क है,लेकिन जनता का सहयोग जरूरी है।

उन्होंने कहा, “हम मानसून सीजन में हैं और लगातार बारिश हो रही है। हमने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि लोग नदी-नालों या खड्डों के आसपास ना जाएँ और जो लोग वहाँ अस्थायी बसेरे बना लेते हैं,उन्हें रोका जाए।”

चंबा जिला प्रशासन ने हाल ही में हुई बादल फटने की घटनाओं और जलभराव से सबक लेते हुए आपातकालीन तैयारी पूरी कर ली है। आपदा प्रबंधन टीमें पूरी सतर्कता के साथ निगरानी कर रही हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में एनडीआरएफ,एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें तैनात हैं,ताकि किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसका अर्थ है कि अगले कुछ दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है,जो जीवन और संपत्ति दोनों के लिए जोखिम भरा हो सकता है।

मौसम विभाग की भविष्यवाणी के अनुसार,अगले 3 से 5 दिनों तक बारिश का रुझान इसी तरह बना रहेगा,जिससे भूस्खलन,जलभराव,पुल टूटने और यातायात ठप होने जैसी घटनाएँ हो सकती हैं।

दोनों राज्यों के प्रशासन ने आम जनता से आग्रह किया है कि वे निम्नलिखित दिशा-निर्देशों का पालन करें:

* नदी-नालों, झीलों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहें।

* मौसम विभाग की अपडेट्स पर नजर रखें।

* प्रशासन के किसी भी दिशा-निर्देश की अवहेलना ना करें।

* पहाड़ों की यात्रा करने से पहले स्थिति की जानकारी लें और अनावश्यक यात्रा से बचें।

* आपातकालीन नंबरों और राहत एजेंसियों के संपर्क में रहें।

मानसून का यह दौर जहाँ खेतों के लिए वरदान है,वहीं पहाड़ों के लिए संकट बन चुका है। उत्तराखंड और हिमाचल में लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। सड़कों का टूटना,नदियों का उफान पर आना,मलबे का जमा होना और लोगों की आवाजाही पर रोक जैसी परिस्थितियों ने प्रशासन को सतर्क कर दिया है।

यह समय सजग रहने का है। मौसम के मिजाज को हल्के में लेने की गलती अब जानलेवा साबित हो सकती है। प्रशासन,आपदा प्रबंधन और जनता सभी की संयुक्त जिम्मेदारी है कि मिलकर इस मानसूनी संकट से सुरक्षित निकला जाए। यही समझदारी और सामूहिक सतर्कता इस समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।