जम्मू-कश्मीर में आसमान से बरसी आफत (तस्वीर क्रेडिट@ArvindS31775046)

जम्मू-कश्मीर में आसमान से बरसी आफत: रियासी में भूस्खलन से सात की मौत,रामबन में बादल फटने से चार लोग मारे गए

जम्मू,30 अगस्त (युआईटीवी)- जम्मू-कश्मीर एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहा है। लगातार हो रही भारी बारिश,बादल फटने और भूस्खलन जैसी घटनाओं ने घाटी और जम्मू क्षेत्र में तबाही मचाकर रख दी है। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि लोग अपने घरों में भी सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे। शनिवार सुबह रियासी जिले के सुदूरवर्ती बदर गाँव से आई खबर ने पूरे प्रदेश को दहला दिया। यहाँ पहाड़ी ढलान पर स्थित एक घर भूस्खलन की चपेट में आ गया,जिसमें पूरा परिवार जिंदा दफन हो गया। इस दर्दनाक हादसे में एक दंपति और उनके पाँच बच्चों की मौत हो गई। वहीं,रामबन जिले के राजगढ़ इलाके में बादल फटने से चार लोगों की जान चली गई और एक व्यक्ति अभी भी लापता है। प्रशासन और स्थानीय लोग उसकी तलाश में जुटे हुए हैं।

रियासी जिले की घटना ने पूरे जम्मू-कश्मीर को गहरे सदमे में डाल दिया है। जानकारी के मुताबिक बदर गाँव में नजीर अहमद नामक व्यक्ति का घर पहाड़ी के नीचे बसा हुआ था। शनिवार सुबह जब पूरा परिवार घर में सो रहा था,तभी अचानक भारी भूस्खलन हुआ और देखते ही देखते मिट्टी और पत्थरों का मलबा पूरे मकान पर आ गिरा। इससे घर पूरी तरह ध्वस्त हो गया और नजीर अहमद (38),उनकी पत्नी वजीरा बेगम (35) और उनके पाँच मासूम बेटे — बिलाल अहमद (13),मोहम्मद मुस्तफा (11),मोहम्मद आदिल (8),मोहम्मद मुबारक (6) और मोहम्मद वसीम (5) मलबे में दबकर मौत के शिकार हो गए। स्थानीय ग्रामीणों ने जैसे ही हादसे की सूचना सुनी,वे मौके पर दौड़े और पुलिस व प्रशासनिक टीमों के साथ मिलकर राहत कार्य शुरू किया। हालाँकि,जब तक उन्हें मलबे से बाहर निकाला गया,तब तक सातों की मौत हो चुकी थी। गाँव में मातम पसरा हुआ है और हर किसी की आँखें नम हैं। एक ही परिवार के सात सदस्यों की मौत ने पूरे इलाके को हिला दिया है।

इधर,रामबन जिले के राजगढ़ क्षेत्र से भी त्रासदी की खबर सामने आई। यहाँ भारी बारिश के बीच बादल फटने की घटना हुई,जिसमें चार लोगों की मौत हो गई,जबकि एक व्यक्ति अभी भी लापता बताया जा रहा है। तेज बारिश और ऊँचाई से अचानक आए पानी ने कई घरों और ढाँचों को नुकसान पहुँचाया। स्थानीय प्रशासन,पुलिस और एसडीआरएफ की टीम राहत एवं बचाव कार्य में लगी हुई है। मलबा हटाने और लापता व्यक्ति की तलाश के प्रयास जारी हैं,लेकिन खराब मौसम ने रेस्क्यू ऑपरेशन को और भी मुश्किल बना दिया है।

जम्मू-कश्मीर में बीते कुछ दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश ने हालात को बेहद चिंताजनक बना दिया है। बाढ़,लैंडस्लाइड और बादल फटने की घटनाओं ने अब तक करीब 54 लोगों की जान ले ली है। लोग दहशत के साए में जी रहे हैं और प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है। सड़कें ध्वस्त हो गई हैं,कई गाँवों का संपर्क कट गया है और बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधायें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इन घटनाओं पर गहरा शोक व्यक्त किया और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने कहा कि रियासी और रामबन में हुई घटनाओं ने कई परिवारों को उजाड़ दिया है। मुख्यमंत्री ने प्रशासन को निर्देश दिया कि प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद तुरंत उपलब्ध कराई जाए। साथ ही उन्होंने मृतकों के परिजनों को राहत राशि देने की घोषणा की और कहा कि इस कठिन समय में सरकार पीड़ितों के साथ खड़ी है।

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भी इस त्रासदी पर गहरी संवेदना प्रकट की और केंद्र सरकार से विशेष राहत पैकेज की माँग की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि हाल के दिनों में जम्मू-कश्मीर ने लगातार प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है। बाढ़,बादल फटना और भूस्खलन ने प्रदेश में भारी तबाही मचाई है,जिसमें जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। कई परिवार बेघर हो गए हैं और बुनियादी ढाँचे को व्यापक क्षति पहुँची है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि जैसे 2014 की बाढ़ के बाद विशेष राहत पैकेज दिया गया था,वैसे ही अब भी तत्काल राहत पैकेज की घोषणा की जाए। महबूबा मुफ्ती ने केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन के बीच समन्वय की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि प्रभावित लोग अपने हाल पर न छोड़े जाएँ।

मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। इससे प्रशासन की चिंता और बढ़ गई है। सरकार ने संवेदनशील इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। वहीं,एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें लगातार तैयार हैं,ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके।

रियासी और रामबन की घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या प्रदेश की भौगोलिक और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को देखते हुए आपदा प्रबंधन की तैयारी पर्याप्त है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और अंधाधुंध निर्माण कार्यों ने प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ा है,जिसके चलते इस तरह की आपदाएँ अब अधिक बार और भयावह रूप में सामने आ रही हैं।

रियासी के बदर गाँव में एक परिवार की सात जिंदगियों का यूं खत्म हो जाना और रामबन में बादल फटने से चार लोगों का काल के गाल में समा जाना सिर्फ आँकड़ें नहीं हैं,बल्कि उन परिवारों और समुदायों की त्रासदी है,जो अपनों को खोकर कभी न भरने वाला दर्द झेल रहे हैं। इन हादसों ने यह साफ कर दिया है कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए दीर्घकालिक रणनीति और ठोस कदम उठाना समय की माँग है।

जम्मू-कश्मीर आज एक ऐसे संकट से गुजर रहा है,जहाँ आसमान से बरसती आफत ने जिंदगी को अनिश्चितता से भर दिया है। सरकार,प्रशासन और समाज को मिलकर इस कठिन घड़ी का सामना करना होगा,ताकि प्रभावित लोगों को राहत मिल सके और भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें।