गांधीनगर,12 जनवरी (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने सोमवार को गुजरात के गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर कन्वेंशन सेंटर में डेलीगेशन स्तर की अहम बैठक की। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य भारत और जर्मनी के बीच 25 वर्ष पुरानी रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा करना और आने वाले वर्षों में सहयोग को और अधिक गहराई देने के रास्ते तलाशना रहा। दोनों नेताओं ने स्पष्ट संकेत दिए कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत-जर्मनी संबंधों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज ने व्यापार और निवेश को द्विपक्षीय रिश्तों का मजबूत स्तंभ बताते हुए इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए तकनीक,स्टार्टअप इकोसिस्टम और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को और विस्तार देने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही शिक्षा,स्किल डेवलपमेंट और मोबिलिटी जैसे विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई,ताकि दोनों देशों के युवाओं को नए अवसर मिल सकें और मानव संसाधन विकास को गति दी जा सके।
डेलीगेशन स्तर की वार्ता में रक्षा और सुरक्षा सहयोग को भी अहम स्थान मिला। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर विचार साझा किया और इस बात पर सहमति जताई कि लोकतांत्रिक मूल्यों और नियम आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भारत और जर्मनी को मिलकर काम करना चाहिए। इसके अलावा विज्ञान और अनुसंधान,नवाचार,हरित विकास और जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों में सहयोग को और मजबूत करने पर भी बातचीत हुई। दोनों पक्षों ने सतत विकास और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में साझा परियोजनाओं की संभावनाओं पर सकारात्मक रुख दिखाया।
बैठक से पहले का दृश्य भी भारत-जर्मनी मित्रता का जीवंत उदाहरण बना। प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज दिन की शुरुआत साबरमती रिवरफ्रंट पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव में शामिल होकर कर चुके थे। पारंपरिक गुजराती स्कार्फ पहनाकर जर्मन चांसलर का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य और लोक संगीत के माध्यम से अतिथि का अभिनंदन किया,जिससे पूरे माहौल में उत्सव और सांस्कृतिक रंग भर गया।
पतंग महोत्सव के दौरान दोनों नेताओं ने पतंग उड़ाकर उत्सव का आनंद लिया। प्रधानमंत्री मोदी को ‘भारत – वसुधैव कुटुम्बकम’ संदेश वाली विशेष पतंग उड़ाते देखा गया,जो भारत की उस विचारधारा को दर्शाती है,जिसमें पूरी दुनिया को एक परिवार माना जाता है। आसमान में उड़ती रंग-बिरंगी पतंगों पर तिरंगा,हिंदू देवी-देवताओं की आकृतियाँ और दोनों नेताओं के डिजाइन भी नजर आए। नदी किनारे बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे,जो भारतीय और जर्मन झंडे लहराते हुए दोनों देशों की दोस्ती और बढ़ती साझेदारी का उत्साहपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे।
इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज ने महोत्सव में भाग लेने आए कई अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभागियों से बातचीत भी की। प्रधानमंत्री मोदी ने जर्मन चांसलर को उत्तरायण पर्व के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के बारे में बताया और यह समझाया कि किस तरह पतंगबाजी गुजरात की परंपरा और सामूहिक उत्सव की भावना से जुड़ी हुई है। इस संवाद ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान को और गहरा किया और दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर संपर्क को मजबूत करने का संदेश दिया।
इसके अलावा दोनों नेताओं ने साबरमती आश्रम का भी दौरा किया,जहाँ उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। आश्रम में गांधीजी के जीवन,उनके विचारों और स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका को दर्शाने वाली प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया। चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने विजिटर्स बुक में अपने विचार लिखते हुए महात्मा गांधी की अहिंसा और सत्य की विरासत को पूरी दुनिया के लिए प्रेरणास्रोत बताया। यह दौरा न केवल ऐतिहासिक महत्व का था,बल्कि भारत-जर्मनी संबंधों में साझा मूल्यों और नैतिक दृष्टिकोण की झलक भी पेश करता है।
प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज की यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक कूटनीतिक बातचीत तक सीमित नहीं रही,बल्कि इसमें सांस्कृतिक जुड़ाव और आपसी समझ की गहराई भी साफ नजर आई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा और बातचीत से भारत-जर्मनी रिश्तों को नई दिशा और गति मिलेगी। व्यापार,तकनीक और हरित विकास से लेकर लोगों के बीच संपर्क तक,दोनों देश आने वाले समय में साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाने के लिए तैयार दिखाई दे रहे हैं।
