वाशिंगटन,27 अप्रैल (युआईटीवी)- अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में आयोजित व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स एसोसिएशन डिनर के दौरान हुई गोलीबारी की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक आयोजनों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें उस समय कोई डर या घबराहट महसूस नहीं हुई,हालाँकि उन्होंने स्वीकार किया कि फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप इस स्थिति से काफी विचलित हो गई थीं।
एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने कहा कि वे ऐसी परिस्थितियों को समझते हैं और उन्हें पता है कि दुनिया में इस तरह की घटनाएं हो सकती हैं। उन्होंने कहा, “मुझे कोई चिंता नहीं थी। मैं जिंदगी को समझता हूँ। हम एक पागल दुनिया में रहते हैं।” उनके इस बयान से यह संकेत मिलता है कि उन्होंने स्थिति को शांत और संतुलित तरीके से संभालने की कोशिश की।
राष्ट्रपति ने उस क्षण का भी जिक्र किया जब सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए कहा। उन्होंने बताया कि जब गोलीबारी की खबर सामने आई,तो उन्होंने पहले हालात को समझने की कोशिश की,लेकिन जैसे ही सीक्रेट सर्विस के अधिकारियों ने उन्हें निर्देश दिया,उन्होंने तुरंत उसका पालन किया। ट्रंप ने कहा कि सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें नीचे झुकने और फर्श पर लेटने के लिए कहा,जिस पर उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के ऐसा किया। उनके अनुसार,उसी समय मेलानिया ट्रंप भी जमीन पर लेट गईं और दोनों ने सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन किया।
मेलानिया ट्रंप की प्रतिक्रिया के बारे में बात करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यह पूरी तरह स्वाभाविक था कि वे इस घटना से घबरा गई थीं। उन्होंने कहा, “जो कुछ हुआ,उसे लेकर वह बहुत परेशान लग रही थीं। ऐसी स्थिति में कोई भी व्यक्ति घबरा सकता है।” हालाँकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि मेलानिया ने हालात को समझदारी से सँभाला और उन्हें पूरी तरह स्थिति का अंदाजा था।
इस घटना के दौरान सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका की सराहना करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनकी त्वरित कार्रवाई की वजह से एक बड़ी दुर्घटना टल गई। उन्होंने बताया कि संदिग्ध व्यक्ति को बहुत जल्दी काबू में कर लिया गया,जिससे स्थिति को नियंत्रण में रखा जा सका। ट्रंप ने कहा, “वह हमलावर काफी चालाक था,लेकिन हमारे सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत उसे पकड़ लिया।” उनके अनुसार,सुरक्षा एजेंसियाँ इस तरह की परिस्थितियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहती हैं और उन्होंने इस बार भी अपनी दक्षता साबित की है।
राष्ट्रपति ने हमलावर की मंशा और उसकी कार्यशैली पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सुरक्षा घेरा तोड़ना आसान नहीं होता और इसके लिए कुछ योजना की जरूरत होती है, लेकिन साथ ही उन्होंने हमलावर को “अनाड़ी” भी बताया, क्योंकि वह ज्यादा देर तक बच नहीं सका और तुरंत पकड़ लिया गया। ट्रंप के इस बयान से यह साफ होता है कि वे इस घटना को एक गंभीर सुरक्षा चुनौती के साथ-साथ एक असफल प्रयास के रूप में भी देख रहे हैं।
घटना के बावजूद ट्रंप ने यह स्पष्ट किया कि वे नहीं चाहते थे कि इस कार्यक्रम को रद्द किया जाए। उनका मानना है कि इस तरह की घटनाओं से डरकर सार्वजनिक आयोजनों को बंद नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे चाहते थे कि कार्यक्रम किसी न किसी रूप में जारी रहे और भविष्य में इसे फिर से आयोजित किया जाए। इससे पहले भी वे इस बात पर जोर दे चुके हैं कि व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर अमेरिकी लोकतंत्र और प्रेस की स्वतंत्रता का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है।
गौरतलब है कि इस डिनर में लगभग 2,500 से अधिक लोग मौजूद थे,जिनमें राष्ट्रपति, फर्स्ट लेडी,उपराष्ट्रपति,वरिष्ठ सरकारी अधिकारी,राजनयिक और बड़ी संख्या में पत्रकार शामिल थे। इस तरह के उच्चस्तरीय आयोजन में सुरक्षा के कड़े इंतजाम होते हैं,लेकिन इसके बावजूद एक संदिग्ध व्यक्ति का सुरक्षा घेरा तोड़कर अंदर पहुँच जाना चिंता का विषय बन गया है।
जानकारी के अनुसार,31 वर्षीय संदिग्ध ने होटल के पास सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए अंदर प्रवेश किया और गोलीबारी की। हालाँकि,सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। इस घटना में किसी की जान नहीं गई,लेकिन एक अधिकारी के घायल होने की खबर सामने आई है। फिलहाल जाँच एजेंसियाँ आरोपी से पूछताछ कर रही हैं और उसके इरादों तथा पृष्ठभूमि की जांच की जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि इतने उच्चस्तरीय सुरक्षा इंतजामों के बावजूद इस तरह की चूक कैसे हो सकती है। साथ ही,यह भी स्पष्ट हुआ है कि सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता ने एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया।
राष्ट्रपति ट्रंप का यह बयान कि उन्हें डर नहीं लगा,उनके आत्मविश्वास को दर्शाता है, लेकिनसाथ ही यह भी दिखाता है कि ऐसी घटनाएँ कितनी अप्रत्याशित होती हैं। वहीं, मेलानिया ट्रंप की प्रतिक्रिया इस बात की याद दिलाती है कि संकट के समय में मानवीय भावनाएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती हैं।
फिलहाल,यह मामला जाँच के दायरे में है और आने वाले दिनों में इसके कई और पहलू सामने आ सकते हैं,लेकिन इतना तय है कि इस घटना ने अमेरिका में सुरक्षा,सार्वजनिक आयोजनों और लोकतांत्रिक परंपराओं को लेकर नई चर्चा को जन्म दे दिया है।
