अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा (आरसीबी) (तस्वीर क्रेडिट@Lovely92698976)

भारत में कार्यभार सँभालते ही सक्रिय हुए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर,मुंबई से नई दिल्ली तक मजबूत साझेदारी का संदेश

नई दिल्ली,17 जनवरी (युआईटीवी)- भारत में अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने इस हफ्ते की शुरुआत में औपचारिक रूप से अपना कार्यभार सँभाल लिया है और पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने भारत–अमेरिका संबंधों को और मजबूत करने के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। जिम्मेदारी सँभालने के तुरंत बाद गोर ने अपनी पहली आधिकारिक यात्रा मुंबई से शुरू की,जहाँ उन्होंने भारत की आर्थिक,वित्तीय और औद्योगिक नेतृत्व से अहम मुलाकातें कीं। इन बैठकों को दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक और रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने की दिशा में एक मजबूत कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

मुंबई दौरे के दौरान अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सबसे पहले भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा से मुलाकात की। इस बैठक को लेकर गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए लिखा कि आरबीआई गवर्नर से मिलकर उन्हें बेहद अच्छा लगा और दोनों के बीच सहयोग बढ़ाने के संभावित क्षेत्रों पर चर्चा हुई। गोर के अनुसार बातचीत में नई और अत्याधुनिक अमेरिकी तकनीक को भारत में अपनाने और दोनों देशों के बीच वित्तीय व तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है,जब भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था,फिनटेक और आधुनिक बैंकिंग तकनीकों की ओर बढ़ रहा है, और अमेरिका इन क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व रखता है।

आरबीआई गवर्नर से मुलाकात के बाद सर्जियो गोर ने देश के सबसे बड़े औद्योगिक समूहों में से एक टाटा समूह के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन से भी भेंट की। इस मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए अमेरिकी राजदूत ने टाटा समूह की 150 साल पुरानी विरासत की सराहना की और कहा कि यह समूह अमेरिका में भी मजबूत मौजूदगी रखता है। गोर ने अपने संदेश में यह भी संकेत दिया कि अमेरिका और भारत के बीच औद्योगिक सहयोग में टाटा जैसे समूहों की भूमिका बेहद अहम है। माना जा रहा है कि इस बैठक में निवेश,मैन्युफैक्चरिंग,टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई होगी,जो आने वाले समय में द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और मजबूत कर सकते हैं।

मुंबई दौरे को लेकर उत्साह जाहिर करते हुए सर्जियो गोर ने लिखा कि वह अपने पहले दौरे की शुरुआत मुंबई स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास से करके बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि वहाँ की समर्पित टीम अमेरिका–भारत साझेदारी को मजबूत करने के लिए लगातार कड़ी मेहनत कर रही है। इस बयान से यह साफ झलकता है कि गोर भारत में अपने कार्यकाल के दौरान जमीनी स्तर पर भी सक्रिय रहकर कूटनीतिक और आर्थिक रिश्तों को आगे बढ़ाना चाहते हैं।

इससे पहले सोमवार को सर्जियो गोर ने नई दिल्ली में औपचारिक रूप से अपनी जिम्मेदारी सँभाली थी। इसके बाद 14 जनवरी को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भारत में अमेरिका के राजदूत के रूप में अपने क्रेडेंशियल्स सौंपे। इस मौके को लेकर भी गोर ने एक्स पर एक विस्तृत संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा कि राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा उन पर जताए गए भरोसे के लिए वह आभारी हैं और उनकी सरकार की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने पर उन्हें गर्व है। गोर ने यह भी कहा कि अमेरिका और भारत मिलकर सुरक्षा,व्यापार,ऊर्जा और तकनीक जैसे अहम क्षेत्रों में अपनी साझेदारी को और मजबूत करेंगे,ताकि 21वीं सदी को परिभाषित करने वाली अमेरिका–भारत साझेदारी को आकार दिया जा सके।

नई दिल्ली में अपने कामकाज के पहले दिन सर्जियो गोर ने एक संबोधन भी दिया,जिसमें उन्होंने भारत–अमेरिका व्यापार वार्ता को लेकर अहम जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत 13 जनवरी से फिर से शुरू हो चुकी है। गोर ने कहा कि दोनों पक्ष लगातार और सक्रिय रूप से चर्चा कर रहे हैं और अगली ट्रेड वार्ता मंगलवार को होने वाली है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश है और ऐसे में किसी ट्रेड डील को अंतिम रूप तक पहुँचाना आसान काम नहीं है,लेकिन दोनों देश इस दिशा में मजबूत इरादों के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

अपने संबोधन में अमेरिकी राजदूत ने इस बात पर जोर दिया कि व्यापार अमेरिका–भारत रिश्तों का एक बेहद अहम स्तंभ है। उन्होंने कहा कि ट्रेड के अलावा दोनों देश सुरक्षा,काउंटर टेररिज्म,ऊर्जा,तकनीक,शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे कई अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी मिलकर काम करते रहेंगे। यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि अमेरिका भारत को केवल एक व्यापारिक साझेदार के रूप में नहीं,बल्कि एक व्यापक रणनीतिक सहयोगी के रूप में देखता है।

सर्जियो गोर ने भारत को अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए कहा कि भारत से ज्यादा जरूरी कोई पार्टनर नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आने वाले महीनों और वर्षों में राजदूत के तौर पर उनका लक्ष्य एक बड़े और महत्वाकांक्षी एजेंडे को पूरा करना है। गोर के अनुसार यह काम दोनों देश सच्चे रणनीतिक साझेदार के रूप में करेंगे,जहाँ हर पक्ष अपनी ताकत,सम्मान और नेतृत्व लेकर आएगा। इस बयान से यह साफ संकेत मिलता है कि अमेरिका भारत के साथ अपने रिश्तों को दीर्घकालिक और बहुआयामी नजरिए से देख रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सर्जियो गोर का शुरुआती रुख और सक्रियता यह दर्शाती है कि उनके कार्यकाल में भारत–अमेरिका संबंधों को और गहराई मिलने की संभावना है। मुंबई जैसे आर्थिक केंद्र से अपनी पहली यात्रा शुरू करना,आरबीआई गवर्नर और टाटा समूह के चेयरमैन से मुलाकात करना और व्यापार वार्ता को प्राथमिकता देना,यह सभी कदम इस बात की ओर इशारा करते हैं कि आर्थिक और तकनीकी सहयोग उनके एजेंडे में शीर्ष पर रहेगा।

भारत में कार्यभार सँभालते ही सर्जियो गोर ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिका–भारत साझेदारी को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। चाहे वह व्यापार वार्ता हो,तकनीकी सहयोग हो या रणनीतिक सुरक्षा,गोर का संदेश साफ है कि 21वीं सदी में भारत और अमेरिका मिलकर वैश्विक मंच पर एक निर्णायक भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।