नई दिल्ली,9 मई (युआईटीवी)- पीयूष गोयल ने शुक्रवार को फ्रांस की प्रमुख ब्यूटी और पर्सनल केयर कंपनी लॉरियल ग्रुप के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में भारत से सोर्सिंग,मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात को और मजबूत बनाने के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। केंद्र सरकार का मानना है कि भारत तेजी से वैश्विक विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में उभर रहा है और ब्यूटी तथा पर्सनल केयर सेक्टर में भी देश के पास बड़े अवसर मौजूद हैं।
बैठक के बाद पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्होंने लॉरियल ग्रुप के दक्षिण एशिया प्रशांत,मध्य पूर्व और उत्तर अफ्रीका क्षेत्र के अध्यक्ष विस्मय शर्मा के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान भारत से उत्पादन और निर्यात बढ़ाने की संभावनाओं पर सकारात्मक चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि भारत की बढ़ती औद्योगिक क्षमता और उपभोक्ता बाजार को देखते हुए वैश्विक कंपनियाँ यहाँ निवेश और विस्तार में रुचि दिखा रही हैं।
पीयूष गोयल ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि लॉरियल ने हाल ही में हैदराबाद में दुनिया का सबसे बड़ा ब्यूटी टेक ग्लोबल कैपेसिटी सेंटर शुरू किया है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना भारत के तकनीकी और औद्योगिक विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल देश में निवेश बढ़ेगा,बल्कि नई तकनीक,रोजगार और वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रतिभा को भी बढ़ावा मिलेगा।
इस वर्ष जनवरी में लॉरियल ग्रुप ने हैदराबाद में करीब 383.4 मिलियन डॉलर के शुरुआती निवेश के साथ एक बड़े ब्यूटी टेक और इनोवेशन हब की स्थापना की घोषणा की थी। कंपनी का उद्देश्य इस केंद्र को कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ब्यूटी इनोवेशन का वैश्विक केंद्र बनाना है। इसके जरिए वर्ष 2030 तक लगभग 2,000 तकनीकी नौकरियाँ पैदा होने की उम्मीद जताई गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार,यह केंद्र केवल एक टेक्नोलॉजी हब नहीं होगा,बल्कि वैश्विक स्तर पर कंपनी के डिजिटल और इनोवेशन नेटवर्क का प्रमुख हिस्सा बनेगा। यहाँ से टेक्नोलॉजी,डेटा प्रबंधन,डिजिटल सेवाओं और सप्लाई चेन से जुड़े कई कार्य संचालित किए जाएँगे। साथ ही यह केंद्र लॉरियल की कृत्रिम बुद्धिमत्ता,डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन योजनाओं को दुनिया भर के बाजारों में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल इकोसिस्टम और तकनीकी प्रतिभा को देखते हुए कई वैश्विक कंपनियाँ देश को अपने नवाचार और क्षमता विकास केंद्र के रूप में विकसित कर रही हैं। लॉरियल का यह निवेश भी उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अब केवल उपभोक्ता बाजार नहीं,बल्कि वैश्विक टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में भी अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।
बैठक के दौरान भारत और फ्रांस के बीच व्यापारिक संबंधों पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुआ है। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार,भारत और फ्रांस के बीच व्यापार पिछले पाँच वर्षों में 9.17 अरब यूरो से 12.50 अरब यूरो के दायरे में स्थिर बना रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 12.67 अरब यूरो तक पहुँच गया,जिसमें भारत का निर्यात करीब 6.67 अरब यूरो रहा।
भारत सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में यूरोपीय देशों के साथ व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत करना है। विशेष रूप से फ्रांस के साथ रक्षा,प्रौद्योगिकी,ऊर्जा,ब्यूटी और लग्जरी उत्पादों जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा देने की कोशिश की जा रही है। लॉरियल जैसी वैश्विक कंपनी का भारत में विस्तार इस दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
गुरुवार को पीयूष गोयल ने वाणिज्य विभाग और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग यानी उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के अधिकारियों के साथ एक विचार-मंथन बैठक भी की। इस बैठक में भारतीय कारोबारों को वैश्विक स्तर पर ज्यादा अवसर उपलब्ध कराने के उपायों पर चर्चा की गई। सरकार का ध्यान विशेष रूप से निर्यात बढ़ाने,निवेश आकर्षित करने और नए वैश्विक बाजारों तक भारतीय कंपनियों की पहुँच मजबूत करने पर है।
मंत्री के अनुसार,बैठक में नए निर्यातकों को प्रोत्साहित करने,व्यापार प्रक्रियाओं को सरल बनाने और भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने पर विशेष चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल घरेलू माँग तक सीमित नहीं रहना चाहता,बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी को भी तेजी से बढ़ाना चाहता है।
वाणिज्य मंत्रालय के हालिया आँकड़े भी भारत के निर्यात प्रदर्शन में मजबूती का संकेत दे रहे हैं। मंत्रालय के अनुसार,वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल वस्तु और सेवा निर्यात 4.6 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 863.11 अरब डॉलर तक पहुँच गया। पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 825.26 अरब डॉलर था। वैश्विक तनाव,अमेरिका के टैरिफ विवाद और अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत के निर्यात में यह बढ़ोतरी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की निर्यात रणनीति अब केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। सरकार टेक्नोलॉजी,डिजिटल सेवाओं,हेल्थकेयर,ब्यूटी और पर्सनल केयर जैसे नए क्षेत्रों में भी वैश्विक अवसर तलाश रही है। लॉरियल जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनी के साथ बढ़ता सहयोग इस दिशा में भारत की रणनीतिक सोच को दर्शाता है।
ब्यूटी और पर्सनल केयर उद्योग भारत में तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में शामिल है। बदलती जीवनशैली,बढ़ती आय और डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार के कारण इस सेक्टर में उपभोक्ता माँग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में वैश्विक कंपनियों के निवेश से भारतीय बाजार को नई तकनीक,बेहतर उत्पाद और रोजगार के अवसर मिलने की संभावना बढ़ेगी।
सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक विनिर्माण और नवाचार केंद्र के रूप में और मजबूत होगा। पीयूष गोयल की लॉरियल प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है,जिसके जरिए भारत निवेश,रोजगार और निर्यात वृद्धि के नए अवसर तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
