दीपिंदर गोयल

इटरनल ग्रुप में बड़ा नेतृत्व परिवर्तन,दीपिंदर गोयल ने सीईओ पद से दिया इस्तीफा,अलबिंदर ढींढसा सँभालेंगे कमान

नई दिल्ली,22 जनवरी (युआईटीवी)- देश के फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स सेक्टर में एक बड़े बदलाव की घोषणा हुई है। जोमैटो और ब्लिंकिट का संचालन करने वाली कंपनी इटरनल ग्रुप के सह-संस्थापक और सीईओ दीपिंदर गोयल ने अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया है। कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक गोयल का इस्तीफा 1 फरवरी 2026 से प्रभावी होगा। उनकी जगह अलबिंदर ढींढसा को नया सीईओ नियुक्त किया गया है,जो वर्तमान में क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। इस फैसले को कंपनी के भविष्य की रणनीति और बदलते कारोबारी हालात के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

कंपनी की नियामकीय फाइलिंग में इस नेतृत्व परिवर्तन की औपचारिक जानकारी दी गई। इसके साथ ही दीपिंदर गोयल ने शेयरधारकों को एक भावनात्मक और स्पष्ट पत्र लिखकर अपने इस्तीफे के पीछे की वजहें भी बताईं। अपने पत्र में गोयल ने कहा कि हाल के महीनों में उनका रुझान ऐसे नए विचारों की ओर बढ़ा है,जिनमें उच्च स्तर का जोखिम,प्रयोग और अन्वेषण शामिल है। उन्होंने स्वीकार किया कि इस तरह के प्रयोगात्मक और जोखिम भरे विचारों पर काम करना एक सार्वजनिक कंपनी के सीईओ की भूमिका के साथ पूरी तरह मेल नहीं खाता।

गोयल ने आगे लिखा कि इटरनल जैसी सार्वजनिक कंपनी को अपनी मौजूदा व्यावसायिक रणनीति पर केंद्रित और अनुशासित रहना आवश्यक है। ऐसे में नए और अत्यधिक प्रयोगात्मक विचारों को कंपनी के बाहर रहकर आगे बढ़ाना ज्यादा उपयुक्त होगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर ये विचार इटरनल के रणनीतिक दायरे में आते,तो वह निश्चित रूप से कंपनी के भीतर रहकर ही उन पर काम करते। उनके मुताबिक यह फैसला कंपनी के हितों और शेयरधारकों की अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

अपने पत्र के अंत में दीपिंदर गोयल ने यह भी कहा कि व्यक्तिगत रूप से उन्हें लगता है कि उनके पास इटरनल में अपने मौजूदा कार्य को जारी रखने और इसके बाहर नए विचारों को तलाशने के लिए पर्याप्त समय और ऊर्जा है। हालाँकि,भारत में एक सार्वजनिक कंपनी के सीईओ से जुड़ी कानूनी,नियामकीय और अन्य अपेक्षाएँ यह माँग करती हैं कि वह पूरी तरह एक ही लक्ष्य और दिशा पर केंद्रित रहे। इसी वजह से उन्होंने यह कठिन लेकिन जरूरी फैसला लिया है।

दीपिंदर गोयल का इस्तीफा ऐसे समय में सामने आया है,जब फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स इंडस्ट्री कई तरह की चुनौतियों से जूझ रही है। हाल के महीनों में 10 मिनट डिलीवरी मॉडल को लेकर काफी विवाद देखने को मिला। सरकार ने डिलीवरी कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए क्विक कॉमर्स कंपनियों को इस तरह की त्वरित डिलीवरी सेवाएँ बंद करने की सलाह दी थी। इसके बाद कई प्लेटफॉर्म्स ने अपने प्रचार और संचालन से 10 मिनट डिलीवरी के दावों को हटा दिया।

श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से चिंता जताते हुए कहा था कि सख्त डिलीवरी समय सीमा डिलीवरी कर्मचारियों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कर्मचारियों की सुरक्षा और भलाई किसी भी कारोबारी मॉडल से ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसी कड़ी में दिल्ली में मांडविया ने ब्लिंकिट,जेप्टो,स्विगी और जोमैटो सहित प्रमुख फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इस बैठक में उन्होंने कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म और प्रचार सामग्री से सख्त डिलीवरी समय सीमा हटाने की सलाह दी थी।

इन घटनाक्रमों के बीच इटरनल ग्रुप में नेतृत्व परिवर्तन को महज एक नियमित कॉर्पोरेट फैसला नहीं माना जा रहा,बल्कि इसे बदलते नियामकीय माहौल और कारोबारी रणनीतियों से जोड़कर देखा जा रहा है। अलबिंदर ढींढसा,जो अब इटरनल ग्रुप के नए सीईओ होंगे,क्विक कॉमर्स सेक्टर में गहरी समझ और अनुभव रखते हैं। ब्लिंकिट के सीईओ के रूप में उन्होंने कंपनी के विस्तार,परिचालन दक्षता और बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। ऐसे में उनसे उम्मीद की जा रही है कि वह इटरनल ग्रुप को एक स्थिर,सुरक्षित और टिकाऊ विकास की दिशा में आगे ले जाएंगे।

दीपिंदर गोयल का जाना इटरनल ग्रुप के लिए भावनात्मक रूप से भी बड़ा बदलाव है,क्योंकि उन्होंने जोमैटो को एक स्टार्टअप से लेकर देश की अग्रणी फूड डिलीवरी कंपनी बनाने में केंद्रीय भूमिका निभाई है। उनके नेतृत्व में कंपनी ने कई उतार-चढ़ाव देखे,लेकिन साथ ही नए प्रयोगों और नवाचारों के जरिए बाजार में अपनी पहचान मजबूत की। अब उनके इस्तीफे के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि इटरनल ग्रुप नए नेतृत्व में किस तरह अपनी रणनीति को आगे बढ़ाता है और फूड डिलीवरी व क्विक कॉमर्स सेक्टर में आने वाली चुनौतियों का सामना करता है।