वेलिंगटन,22 जनवरी (युआईटीवी)- दुनिया के कई देशों में इस साल चुनावी सरगर्मियां तेज होने जा रही हैं और इसी कड़ी में चुनावी मौसम की शुरुआत युगांडा से हो चुकी है। अब न्यूजीलैंड भी धीरे-धीरे चुनावी माहौल में प्रवेश कर रहा है। हालाँकि,वहाँ आम चुनाव नवंबर 2026 में होने हैं,लेकिन राजनीतिक तैयारियाँ अभी से तेज हो गई हैं। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने बुधवार को औपचारिक रूप से घोषणा करते हुए बताया कि देश में आम चुनाव 7 नवंबर को कराए जाएँगे। इस ऐलान के साथ ही न्यूजीलैंड की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है और सत्तारूढ़ तथा विपक्षी दल रणनीतियाँ बनाने में जुट गए हैं।
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक,प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा कि चुनाव की तारीख तय करने से पहले यह सुनिश्चित किया गया है कि न्यूजीलैंड के लोगों को इस फैसले पर पूरा भरोसा हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार चुनाव से पहले बुनियादी समस्याओं को ठीक करने और देश के भविष्य को मजबूत बनाने पर ध्यान केंद्रित करती रहेगी। प्रधानमंत्री ने यह भी पुष्टि की कि उन्होंने गवर्नर-जनरल को औपचारिक रूप से चुनाव की तारीख की जानकारी दे दी है,जो न्यूजीलैंड की संसदीय प्रणाली में एक जरूरी संवैधानिक प्रक्रिया मानी जाती है।
प्रधानमंत्री लक्सन ने अपने बयान में बीते दो वर्षों के कामकाज का जिक्र करते हुए कहा कि जब उनकी सरकार ने सत्ता संभाली थी,तब देश गलत दिशा में जा रहा था। उन्होंने दावा किया कि उनकी अगुवाई में सरकार ने हालात को सुधारने के लिए कड़ी मेहनत की है और इसके सकारात्मक नतीजे अब दिखने लगे हैं। लक्सन ने कहा कि महँगाई,जो एक समय 7 प्रतिशत तक पहुँच गई थी,अब घटकर 3 प्रतिशत पर आ गई है। उनके मुताबिक यह सरकार की आर्थिक नीतियों और अनुशासित वित्तीय प्रबंधन का परिणाम है।
प्रधानमंत्री ने यह भी साफ किया कि उनकी सरकार का मुख्य फोकस अभी भी “बुनियादी चीजों को ठीक करने और भविष्य बनाने” के एजेंडे पर ही रहेगा। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि देशभर के कीवी नागरिकों को सरकार के फैसलों से ठोस और सकारात्मक परिणाम मिलें। लक्सन के अनुसार,साल के आखिर में होने वाले चुनाव से पहले यही सरकार की प्राथमिकता रहेगी,ताकि जनता के सामने विकास और स्थिरता का स्पष्ट रोडमैप रखा जा सके।
पिछले चुनावों की बात करें तो क्रिस्टोफर लक्सन ने 2023 में हुए आम चुनाव में कानून व्यवस्था और महँगाई जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया था। उस समय न्यूजीलैंड में बढ़ते अपराध और रहने-सहने की लागत को लेकर जनता में काफी नाराजगी थी। लक्सन ने इन मुद्दों को मजबूती से उठाया और मतदाताओं को भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार कानून व्यवस्था को मजबूत करेगी और आम लोगों को महँगाई से राहत दिलाने के लिए ठोस कदम उठाएगी।
हालाँकि,मौजूदा समय में न्यूजीलैंड की आर्थिक स्थिति पूरी तरह से सहज नहीं कही जा सकती। आँकड़ें बताते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था सुस्ती के दौर से गुजर रही है। सितंबर में खत्म हुए पिछले छह क्वार्टर में से तीन में न्यूजीलैंड की आर्थिक स्थिति और कमजोर हुई है। यह संकेत देता है कि विकास की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है। इसके साथ ही बेरोजगारी भी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। नवंबर 2025 में न्यूजीलैंड की बेरोजगारी दर बढ़कर 5.3 प्रतिशत तक पहुँच गई,जो लगभग दो दशकों में सबसे ज्यादा मानी जा रही है। यह आँकड़ा सरकार के लिए चिंता का विषय है और चुनाव से पहले विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बना सकता है।
राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो हाल के ओपिनियन पोल सत्तारूढ़ नेशनल पार्टी के लिए पूरी तरह से उत्साहजनक नहीं हैं। सर्वेक्षणों के अनुसार, प्रधानमंत्री लक्सन की नेशनल पार्टी इस समय क्रिस हिपकिंस के नेतृत्व वाली लेबर पार्टी से पीछे चल रही है। लेबर पार्टी लगातार सरकार की आर्थिक नीतियों,बेरोजगारी और जीवन-यापन की बढ़ती लागत को लेकर हमला बोल रही है। क्रिस हिपकिंस खुद को आम जनता की समस्याओं की आवाज के रूप में पेश कर रहे हैं और यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि मौजूदा सरकार आर्थिक चुनौतियों से निपटने में पूरी तरह सफल नहीं रही है।
इसके बावजूद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेशनल पार्टी के पास अब भी सत्ता में बने रहने का मजबूत मौका है। अनुमान लगाए जा रहे हैं कि नेशनल पार्टी अपने गठबंधन सहयोगियों की मदद से एक बार फिर सरकार बना सकती है। न्यूजीलैंड की राजनीति में गठबंधन सरकारों का लंबा इतिहास रहा है और कई बार कम सीटें मिलने के बावजूद गठबंधन के जरिए सत्ता कायम रखी गई है।
गौरतलब है कि न्यूजीलैंड में हर तीन साल में आम चुनाव कराए जाते हैं और यहाँ संसदीय प्रणाली लागू है। हालाँकि,चुनाव की तारीख तय करने का अधिकार मौजूदा सरकार के पास होता है,लेकिन यह फैसला संवैधानिक प्रक्रियाओं और गवर्नर-जनरल की औपचारिक मंजूरी के साथ किया जाता है। प्रधानमंत्री लक्सन का कहना है कि चुनाव की तारीख का ऐलान समय रहते करने से राजनीतिक स्थिरता बनी रहती है और सभी दलों को अपनी तैयारियों का समान अवसर मिलता है।
अब 7 नवंबर को होने वाले चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आएँगे,न्यूजीलैंड में राजनीतिक गतिविधियाँ और तेज होंगी। सत्तारूढ़ नेशनल पार्टी विकास,महँगाई में कमी और स्थिर शासन को अपनी उपलब्धि के रूप में पेश करेगी,जबकि विपक्ष बेरोजगारी,आर्थिक सुस्ती और जीवन-यापन की चुनौतियों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि कीवी मतदाता किस एजेंडे को ज्यादा अहमियत देते हैं और किसे देश की कमान सौंपने का फैसला करते हैं।
