इस्लामाबाद,7 फरवरी (युआईटीवी)- पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद एक बार फिर खून-खराबे और दहशत की चपेट में आ गई,जब शुक्रवार की नमाज़ के दौरान तरलाई इलाके में स्थित एक इमामबाड़े में हुए भीषण धमाके ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इस हमले में अब तक 15 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है,जबकि 80 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। धमाके के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई,चारों तरफ चीख-पुकार सुनाई देने लगी और इलाके में भय का माहौल फैल गया।
जिला प्रशासन के एक प्रवक्ता ने बताया कि मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है और घायलों को इस्लामाबाद के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पीआईएमएस) अस्पताल के प्रवक्ता के अनुसार,अकेले उनके अस्पताल में 32 घायलों को लाया गया है,जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को इमरजेंसी अलर्ट पर रखा गया है,ताकि ज्यादा-से-ज्यादा जानें बचाई जा सकें।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक,धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि वह काफी दूर तक सुनाई दी। नमाज़ के समय बड़ी संख्या में लोग इमामबाड़े के भीतर मौजूद थे,जिससे हताहतों की संख्या ज्यादा होने की आशंका जताई जा रही है। धमाके के तुरंत बाद पुलिस और सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को घेर लिया और विस्फोट स्थल को पूरी तरह सील कर दिया गया। बम निरोधक दस्ता और फोरेंसिक टीमें मौके पर पहुँचकर सबूत जुटाने में लगी हुई हैं।
शुरुआती रिपोर्टों में इस हमले को आत्मघाती बताया जा रहा है,हालाँकि अधिकारियों ने अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी पुलिस के प्रवक्ता तकी जवाद ने कहा कि फिलहाल धमाके की प्रकृति को लेकर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। उनके अनुसार,फोरेंसिक जाँच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह आत्मघाती हमला था या फिर पहले से लगाया गया कोई विस्फोटक उपकरण था। वहीं जियो न्यूज ने स्थानीय अधिकारियों के हवाले से बताया कि आत्मघाती हमलावर को मस्जिद के प्रवेश द्वार पर रोका गया था,जिसके बाद उसने खुद को विस्फोट से उड़ा लिया।
पाकिस्तान के अख़बार एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि यह हमला ऐसे समय में हुआ है,जब देश के अलग-अलग हिस्सों में,खासकर बलूचिस्तान में,सुरक्षा बलों और आम नागरिकों को निशाना बनाकर लगातार हमले हो रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी याद दिलाया गया कि इससे पहले 11 नवंबर को इस्लामाबाद कोर्ट के बाहर हुए एक हमले में 12 लोगों की मौत हो गई थी और 36 से अधिक लोग घायल हुए थे। उस घटना के बाद भी राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे थे।
इस ताजा हमले ने एक बार फिर पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खास बात यह है कि यह धमाका ऐसे वक्त हुआ है,जब उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्ज़ियोयेव दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर पाकिस्तान में मौजूद हैं। ऐसे में राजधानी में हुए इस हमले ने न सिर्फ स्थानीय प्रशासन,बल्कि केंद्र सरकार की सुरक्षा तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनयिक दौरे के दौरान इस तरह की घटना को पाकिस्तान के लिए बड़ी सुरक्षा चूक के रूप में देखा जा रहा है।
पिछले एक हफ्ते में पाकिस्तान में हिंसक घटनाओं में साफ तौर पर इज़ाफा देखा गया है। खासकर बलूचिस्तान में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। बलूच लड़ाकों द्वारा पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ ‘ऑपरेशन हेरोफ-2’ शुरू किए जाने के बाद स्थिति और ज्यादा बिगड़ गई है। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने दावा किया है कि उसने बलूचिस्तान के नुश्की जिले के अहमद वाल इलाके में एक पाकिस्तानी सेना के कैंप पर कब्ज़ा कर लिया है। इससे पहले संगठन ने गलांगुर इलाके में एक स्थानीय सैन्य बेस पर कब्ज़ा करने का भी दावा किया था।
बीएलए के मुताबिक, ‘ऑपरेशन हेरोफ’ के तहत क्वेटा,नुश्की और बलूचिस्तान के कम-से-कम 12 अन्य शहरों में एक साथ समन्वित हमले किए गए हैं। संगठन का दावा है कि 31 जनवरी से शुरू हुए ऑपरेशन हेरोफ के दूसरे चरण के बाद से कई पाकिस्तानी सैन्यकर्मी मारे गए या घायल हुए हैं। हालाँकि,पाकिस्तानी सेना और सरकार की ओर से इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है,लेकिन लगातार सामने आ रही खबरें इस बात की ओर इशारा करती हैं कि सुरक्षा हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं।
इस बीच,द बलूचिस्तान पोस्ट ने स्थानीय लोगों के हवाले से आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बल आबादी वाले इलाकों को जानबूझकर निशाना बना रहे हैं,जिससे आम नागरिकों के हताहत होने की आशंका बढ़ गई है। इन आरोपों ने पहले से ही संवेदनशील हालात को और ज्यादा जटिल बना दिया है। मानवाधिकार संगठनों की ओर से भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है।
इस्लामाबाद में हुए इस ताजा धमाके के बाद राजनीतिक और धार्मिक संगठनों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आने लगी हैं। कई नेताओं ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और इसे निर्दोष लोगों पर कायराना हमला बताया है। साथ ही सरकार से माँग की जा रही है कि राजधानी समेत पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाए,ताकि आम लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान इस समय एक जटिल सुरक्षा चुनौती का सामना कर रहा है। एक तरफ बलूचिस्तान में विद्रोही गतिविधियां तेज होती जा रही हैं,तो दूसरी तरफ धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर किए जा रहे हमले सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुँचा रहे हैं। इस्लामाबाद जैसे हाई-सिक्योरिटी जोन में इस तरह का हमला यह दिखाता है कि आतंकी और उग्रवादी संगठन सुरक्षा घेरे में भी सेंध लगाने की क्षमता रखते हैं।
फिलहाल पूरे देश की निगाहें जाँच एजेंसियों पर टिकी हैं,जो यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस हमले के पीछे कौन लोग हैं और इसका मकसद क्या था। क्या यह हमला किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा है या फिर यह हालिया हिंसा की कड़ी में एक और घटना भर है,इसका जवाब आने वाले दिनों में सामने आ सकता है,लेकिन इतना तय है कि इस धमाके ने पाकिस्तान में पहले से डगमगाती सुरक्षा स्थिति को और ज्यादा गंभीर बना दिया है और आम लोगों के मन में डर और असुरक्षा की भावना को गहरा कर दिया है।
