वाशिंगटन,7 फरवरी (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आने वाले सामानों पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क हटाने का ऐलान कर दिया है। यह फैसला भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से एक अहम मोड़ के रूप में देखा जा रहा है,क्योंकि यह न केवल व्यापारिक मोर्चे पर राहत देता है,बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को भी नई दिशा देता है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि भारत द्वारा रूस से तेल आयात बंद करने की प्रतिबद्धता और अमेरिका के साथ सुरक्षा व आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने के वादों के बाद यह कदम उठाया गया है।
इस फैसले को औपचारिक रूप देते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए,जिसके तहत अगस्त 2025 में लगाया गया अतिरिक्त शुल्क समाप्त कर दिया गया। यह शुल्क रूस-यूक्रेन युद्ध के मद्देनज़र घोषित राष्ट्रीय आपात स्थिति के अंतर्गत लगाया गया था और इसका मकसद उन देशों पर दबाव बनाना था,जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से रूस के साथ ऊर्जा और व्यापारिक लेन-देन जारी रखे हुए थे। भारत के लिए यह शुल्क कई क्षेत्रों में निर्यात को प्रभावित कर रहा था,ऐसे में इसके हटने से भारतीय उद्योग और व्यापार जगत को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
कार्यकारी आदेश में ट्रंप ने कहा कि भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा,विदेश नीति और आर्थिक मामलों में अमेरिका के साथ पर्याप्त तालमेल बनाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने यह भी माना कि भारत ने न केवल कूटनीतिक स्तर पर सहयोग बढ़ाने की इच्छा दिखाई है,बल्कि व्यावहारिक फैसलों के जरिए इसे जमीन पर उतारने की कोशिश भी की है। इसी आधार पर भारतीय सामानों पर लगाए गए 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क को खत्म करने का निर्णय लिया गया।
आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत ने सीधे या परोक्ष रूप से रूस से तेल आयात न करने की स्पष्ट प्रतिबद्धता जताई है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मची हुई है और कई देशों ने सस्ते रूसी तेल की ओर रुख किया था। भारत भी इस बहस के केंद्र में रहा,लेकिन अब अमेरिकी प्रशासन के अनुसार भारत ने इस दिशा में नीति परिवर्तन का भरोसा दिया है। इसके बदले भारत ने यह भी कहा है कि वह अमेरिका से ऊर्जा उत्पादों की खरीद बढ़ाएगा,जिससे दोनों देशों के बीच ऊर्जा साझेदारी को मजबूती मिलेगी।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने आदेश में यह भी कहा कि भारत और अमेरिका अगले 10 वर्षों में रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए एक व्यापक फ्रेमवर्क पर सहमत हुए हैं। यह फ्रेमवर्क रक्षा तकनीक,सैन्य अभ्यास,हथियारों की खरीद और रणनीतिक समन्वय जैसे क्षेत्रों को कवर करेगा। अमेरिका पहले से ही भारत का एक प्रमुख रक्षा साझेदार है और यह नया समझौता इस रिश्ते को और गहरा कर सकता है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा के लिए भारत की भूमिका बेहद अहम है।
इन सभी कदमों को ध्यान में रखते हुए ट्रंप ने कहा कि भारतीय सामानों पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क अब समाप्त किया जा रहा है। इस आदेश के तहत अमेरिका की टैरिफ सूची में शामिल कुछ विशेष श्रेणियाँ भी खत्म कर दी गई हैं,जो खास तौर पर भारत से जुड़े आयात पर लागू होती थीं। इसके अलावा,आदेश में यह भी कहा गया है कि पहले वसूले गए शुल्क की वापसी मौजूदा सीमा शुल्क प्रक्रियाओं के अनुसार की जाएगी,जिससे उन कंपनियों को भी राहत मिल सकती है,जिन्होंने पहले ही यह शुल्क अदा कर दिया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर दोनों देशों के व्यापार पर सकारात्मक रूप से पड़ेगा। भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार एक बार फिर ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो जाएगा,खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ शुल्क के कारण लागत बढ़ गई थी। वहीं अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत के साथ ऊर्जा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर खुल सकते हैं। यह कदम ऐसे समय पर आया है,जब भारत और अमेरिका पहले ही एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में बातचीत कर रहे हैं।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह फैसला अहम माना जा रहा है। ट्रंप प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि वह अपने रणनीतिक साझेदारों के साथ व्यवहारिक और परिणाम आधारित रिश्ते चाहता है। भारत की ओर से किए गए वादों और कदमों को मान्यता देते हुए शुल्क हटाना इसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि आने वाले समय में भारत-अमेरिका संबंध सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रहेंगे,बल्कि ऊर्जा,रक्षा और वैश्विक राजनीति में भी दोनों देश एक-दूसरे के और करीब आ सकते हैं।
भारतीय सामानों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क हटाने का यह फैसला भारत के लिए आर्थिक और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है। इससे न केवल भारतीय उद्योग को राहत मिलेगी,बल्कि भारत-अमेरिका साझेदारी को भी नई मजबूती मिलेगी। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस फैसले का असर दोनों देशों के व्यापारिक आँकड़ों और रणनीतिक सहयोग पर किस तरह पड़ता है।
