'घुसखोर पंडत' पर एफडब्ल्यूआईसीई ने जताई आपत्ति (तस्वीर क्रेडिट@UnreservedEcho)

‘घूसखोर पंडत’ पर बवाल तेज: नीरज पांडे और नेटफ्लिक्स को एफएमसी का नोटिस,टाइटल इस्तेमाल पर रोक

वाशिंगटन,7 फरवरी (युआईटीवी)- मनोज बाजपेयी की अपकमिंग नेटफ्लिक्स फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के ऐलान के साथ ही जिस विवाद ने जन्म लिया था,वह अब और गहराता जा रहा है। फिल्म पर एक जाति विशेष को निशाना बनाने के आरोप पहले ही लग चुके हैं,जिसके चलते निर्देशक नीरज पांडे के खिलाफ कई जगह एफआईआर दर्ज होने की खबरें सामने आ चुकी हैं। अब इस विवाद में एक नया और अहम मोड़ तब आया है, जब मुंबई स्थित संगठन फिल्म मेकर्स कंबाइन (एफएमसी) ने नीरज पांडे के प्रोडक्शन हाउस और ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स को नोटिस जारी कर दिया है।

एफएमसी ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए साफ तौर पर कहा है कि ‘घूसखोर पंडत’ नाम का टाइटल उनके रिकॉर्ड में रजिस्टर्ड नहीं है और बिना विधिवत मंजूरी के किसी भी फिल्म या कंटेंट के लिए इस टाइटल का इस्तेमाल नियमों का उल्लंघन है। संगठन ने नीरज पांडे के प्रोडक्शन हाउस फ्राइडे स्टोरी टेलर्स को नोटिस भेजते हुए तत्काल जवाब देने को कहा है और साथ ही चेतावनी दी है कि नियमों का पालन न करने की स्थिति में अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

एफएमसी द्वारा भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि नीरज पांडे का प्रोडक्शन हाउस इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईएमपीपीए) का लीगल सदस्य जरूर है,लेकिन फिल्म मेकर्स कंबाइन के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार ‘घूसखोर पंडत’ टाइटल के लिए न तो कोई आवेदन किया गया है और न ही इसकी मंजूरी ली गई है। संगठन ने साफ शब्दों में कहा है कि एफएमसी के नियमों के तहत किसी भी अनधिकृत और अप्रूवल के बिना इस्तेमाल किए जा रहे टाइटल को मान्यता नहीं दी जा सकती।

नोटिस में यह भी कहा गया है कि फिल्म टाइटल का रजिस्ट्रेशन एक अनिवार्य प्रक्रिया है,जिसका मकसद न सिर्फ कानूनी विवादों से बचाव करना है,बल्कि इंडस्ट्री में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखना भी है। एफएमसी के मुताबिक,बिना रजिस्ट्रेशन के टाइटल का इस्तेमाल न केवल नियमों के खिलाफ है,बल्कि इससे भविष्य में गंभीर कानूनी और औद्योगिक विवाद भी खड़े हो सकते हैं।

इस मामले में एफएमसी ने सिर्फ नीरज पांडे के प्रोडक्शन हाउस तक खुद को सीमित नहीं रखा,बल्कि ओटीटी दिग्गज नेटफ्लिक्स को भी अलग से नोटिस जारी किया है। नेटफ्लिक्स को भेजे गए नोटिस में संगठन ने लिखा है कि उन्हें यह जानकारी मिली है कि नीरज पांडे द्वारा निर्मित फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को नेटफ्लिक्स जैसे प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म पर रिलीज करने की तैयारी की जा रही है। एफएमसी ने नेटफ्लिक्स का ध्यान इस ओर दिलाया कि इस फिल्म के टाइटल के लिए किसी भी मान्यता प्राप्त प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन से न तो आवेदन किया गया है और न ही किसी तरह की मंजूरी ली गई है।

नोटिस में साफ तौर पर कहा गया है कि फिल्म मेकर्स कंबाइन के नियमों के अनुसार ‘घूसखोर पंडत’ टाइटल का अनधिकृत उपयोग अवैध है। एफएमसी ने नेटफ्लिक्स से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि वह इस फिल्म के लिए इस विवादित टाइटल का इस्तेमाल न करे। संगठन का मानना है कि बड़े और प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी और भी ज्यादा बढ़ जाती है कि वे कंटेंट रिलीज करने से पहले सभी कानूनी और औद्योगिक प्रक्रियाओं का पालन करें।

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो ‘घूसखोर पंडत’ फिल्म को लेकर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे हैं। फिल्म के टाइटल को लेकर यह आरोप लगाया जा रहा है कि यह एक विशेष समुदाय को नकारात्मक रूप में पेश करता है,जिससे सामाजिक भावनाओं को ठेस पहुंच सकती है। इसी वजह से सोशल मीडिया पर भी फिल्म के खिलाफ विरोध देखने को मिला और कई संगठनों ने इसके नाम और विषयवस्तु पर आपत्ति जताई। बात यहीं नहीं रुकी और मामला कानूनी दायरे में पहुँच गया, जहाँ नीरज पांडे के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज होने की खबरें आईं।

अब एफएमसी के नोटिस के बाद यह विवाद सिर्फ सामाजिक या कानूनी नहीं,बल्कि इंडस्ट्री से जुड़ा औद्योगिक मुद्दा भी बन गया है। फिल्म इंडस्ट्री में टाइटल रजिस्ट्रेशन को लेकर पहले भी कई विवाद सामने आ चुके हैं और ऐसे मामलों में आमतौर पर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन का रुख काफी सख्त रहता है। एफएमसी का यह कदम इसी दिशा में एक उदाहरण माना जा रहा है,जिससे यह संदेश जाए कि नियमों की अनदेखी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

फिलहाल न तो नीरज पांडे के प्रोडक्शन हाउस और न ही नेटफ्लिक्स की ओर से इस नोटिस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। इंडस्ट्री की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या फिल्म का टाइटल बदला जाएगा या फिर निर्माता कानूनी रास्ता अपनाकर इस फैसले को चुनौती देंगे। वहीं मनोज बाजपेयी,जो इस फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं,उन्होंने भी अब तक इस विवाद पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है।

‘घूसखोर पंडत’ को लेकर खड़ा हुआ विवाद लगातार गंभीर होता जा रहा है। एक ओर जातिगत भावनाओं को लेकर विरोध,दूसरी ओर एफआईआर और अब एफएमसी का नोटिस—इन सभी ने मिलकर फिल्म की रिलीज से पहले ही इसे सुर्खियों में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि निर्माता इस विवाद से कैसे निपटते हैं और क्या यह फिल्म मौजूदा टाइटल के साथ दर्शकों तक पहुँच पाएगी या नहीं।