मुंबई,17 फरवरी (युआईटीवी)- फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मंगलवार को भारत पहुँचे, जहाँ उनका भव्य स्वागत किया गया। मुंबई हवाईअड्डे पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और महाराष्ट्र तथा गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने उनका स्वागत किया। यह दौरा भारत और फ्रांस के बीच लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से हो रहा है। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर राष्ट्रपति मैक्रों का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देगी और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार मिलेगा।
भारत रवाना होने से पहले राष्ट्रपति मैक्रों ने ‘एक्स’ पर संदेश साझा करते हुए लिखा था कि वह मुंबई से नई दिल्ली तक तीन दिन की यात्रा पर आ रहे हैं,ताकि दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए कहा, “कल मिलते हैं,मेरे प्यारे दोस्त नरेंद्र मोदी।” उनके इस संदेश को दोनों नेताओं के बीच मजबूत व्यक्तिगत संबंधों और आपसी विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है। मैक्रों के साथ व्यापार,उद्योग,संस्कृति और डिजिटल क्षेत्र से जुड़े प्रमुख प्रतिनिधि भी भारत आए हैं,जो इस दौरे को महज एक औपचारिक मुलाकात से आगे बढ़ाकर ठोस आर्थिक और तकनीकी सहयोग की दिशा में ले जाने का संकेत देता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच मुंबई के लोक भवन में द्विपक्षीय वार्ता आयोजित की गई। इस बैठक में भारत–फ्रांस रणनीतिक साझेदारी के तहत अब तक हुई प्रगति की व्यापक समीक्षा की गई। दोनों नेताओं ने रक्षा,समुद्री सुरक्षा,अंतरिक्ष,साइबर सुरक्षा,जलवायु परिवर्तन,स्वच्छ ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को और सुदृढ़ करने पर चर्चा की। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए दोनों देशों के बीच तालमेल को और बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया।
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार,इस बातचीत में क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ। यूक्रेन संकट,पश्चिम एशिया की स्थिति,आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग जैसे विषयों पर दोनों नेताओं ने अपने विचार साझा किए। भारत और फ्रांस लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के मुद्दे पर एक-दूसरे का समर्थन करते रहे हैं और इस बार भी वैश्विक शासन प्रणाली को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
Welcome to India!
India looks forward to your visit and to advancing our bilateral ties to new heights. I am confident that our discussions will further strengthen cooperation across sectors and contribute to global progress.
See you in Mumbai and later in Delhi, my dear friend… https://t.co/5gDTDt6llp
— Narendra Modi (@narendramodi) February 17, 2026
इस दौरे का एक प्रमुख आकर्षण ‘इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026’ का शुभारंभ रहा। शाम करीब 5 बजकर 15 मिनट पर प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने संयुक्त रूप से इस पहल की शुरुआत की। इस कार्यक्रम में दोनों देशों के उद्योगपति,स्टार्टअप संस्थापक,वैज्ञानिक,शोधकर्ता और नवाचार से जुड़े प्रमुख लोग उपस्थित रहे। इस पहल का उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,डिजिटल टेक्नोलॉजी,ग्रीन एनर्जी,बायोटेक्नोलॉजी और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में संयुक्त शोध और निवेश को प्रोत्साहित करना है।
राष्ट्रपति मैक्रों का यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे भारत सरकार के निमंत्रण पर ‘एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन’ में भाग लेने आए हैं। 19 फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले इस शिखर सम्मेलन में वैश्विक स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभाव,उसके नियमन,नैतिक उपयोग और नवाचार के अवसरों पर चर्चा होगी। भारत और फ्रांस दोनों ही एआई और डिजिटल परिवर्तन को भविष्य की अर्थव्यवस्था का आधार मानते हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में सहयोग से दोनों देशों को तकनीकी बढ़त हासिल करने में मदद मिल सकती है।
राष्ट्रपति मैक्रों का यह भारत का चौथा दौरा है,लेकिन मुंबई में उनका यह पहला आधिकारिक कार्यक्रम है। इससे पहले भी दोनों नेताओं के बीच कई उच्चस्तरीय मुलाकातें हो चुकी हैं,जिनमें रक्षा सौदे,राफेल विमानों की खरीद,समुद्री सहयोग और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर अहम समझौते हुए हैं। इस बार का दौरा इन संबंधों को और व्यापक आयाम देने की दिशा में देखा जा रहा है।
भारत और फ्रांस के संबंध पिछले कुछ वर्षों में तेजी से मजबूत हुए हैं। रक्षा क्षेत्र में सहयोग के अलावा दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र और खुला समुद्री मार्ग सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। इसके साथ ही सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन जैसी पहल भी दोनों देशों के सहयोग का उदाहरण है। नवाचार और स्टार्टअप के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने से दोनों देशों की युवा प्रतिभाओं को वैश्विक मंच पर अवसर मिलेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में,जहाँ भू-राजनीतिक चुनौतियाँ बढ़ रही हैं,भारत और फ्रांस जैसे लोकतांत्रिक देशों के बीच सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह दौरा न केवल आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को गहराई देगा,बल्कि रणनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर भी दोनों देशों के संबंधों को नई मजबूती प्रदान करेगा।
राष्ट्रपति मैक्रों 17 से 19 फरवरी तक भारत के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे नई दिल्ली में विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगे और भारतीय नेतृत्व के साथ विस्तृत चर्चा करेंगे। कुल मिलाकर,यह दौरा भारत-फ्रांस संबंधों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखा जा रहा है,जो आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखता है।
