तेल कंपनियों ने एटीएफ के दाम करीब 5 रुपए प्रति लीटर घटाए (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

एटीएफ हुआ 5 रुपये प्रति लीटर सस्ता,कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से एयरलाइंस को मिलेगी राहत

नई दिल्ली,1 जुलाई (युआईटीवी)- देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने विमानन क्षेत्र को बड़ी राहत देते हुए एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में कटौती की घोषणा की है। बुधवार से लागू इस फैसले के तहत एटीएफ की कीमत में लगभग 5 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के बाद यह निर्णय लिया गया है। पश्चिम एशिया में हाल के दिनों में तनाव कम होने और अमेरिका तथा ईरान के बीच शांति वार्ता आगे बढ़ने के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में राहत का माहौल बना है, जिसका असर अब भारत में विमान ईंधन की कीमतों पर भी दिखाई देने लगा है।

सरकारी अधिसूचना के अनुसार,नई दरें 1 जुलाई से प्रभावी हो गई हैं। राजधानी दिल्ली में एटीएफ की कीमत घटकर लगभग 110 रुपये प्रति लीटर रह गई है। विमानन उद्योग के लिए यह महत्वपूर्ण राहत मानी जा रही है,क्योंकि एयरलाइंस की कुल परिचालन लागत में ईंधन का हिस्सा सबसे अधिक होता है। ऐसे में ईंधन की कीमतों में कमी से कंपनियों के खर्च में कमी आने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एटीएफ की कीमतों में यह कटौती घरेलू विमानन कंपनियों के लिए सकारात्मक संकेत है। हालाँकि,इसका वास्तविक लाभ अलग-अलग एयरलाइंस की ईंधन खरीद नीति और हेजिंग रणनीति पर निर्भर करेगा। कुछ कंपनियाँ भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पहले से ही ईंधन की कीमतों को तय कर लेती हैं,जबकि कई कंपनियाँ मौजूदा बाजार कीमतों के आधार पर खरीद करती हैं। इसलिए सभी एयरलाइंस को इस कटौती का समान लाभ नहीं मिलेगा,लेकिन समग्र रूप से यह फैसला विमानन उद्योग के लिए राहत भरा माना जा रहा है।

हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होने से अंतर्राष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता आगे बढ़ने से निवेशकों की चिंता कम हुई है और तेल की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता भी घटी है। इसका सीधा असर अंतर्राष्ट्रीय बेंचमार्क कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स की कीमत घटकर लगभग 73.21 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गई है। वहीं, डब्ल्यूटीआई क्रूड फ्यूचर्स का भाव भी 70 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आकर लगभग 69.73 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया। कच्चे तेल की कीमतों में आई इस गिरावट का लाभ दुनिया के कई देशों को मिल रहा है और भारत में भी इसका असर विमान ईंधन की कीमतों में कमी के रूप में सामने आया है।

विमानन क्षेत्र लंबे समय से ईंधन की ऊँची कीमतों के दबाव का सामना कर रहा था। एटीएफ महँगा होने से एयरलाइंस की परिचालन लागत बढ़ जाती है,जिसका असर कई बार यात्रियों के किराए पर भी पड़ता है। ऐसे में यदि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं और भविष्य में भी एटीएफ की कीमतों में राहत मिलती है,तो एयरलाइंस के लिए वित्तीय स्थिति बेहतर हो सकती है। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ने की स्थिति में यात्रियों को भी सस्ते हवाई किराए का अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

इसी बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगाए जाने वाले विंडफॉल टैक्स में भी संशोधन किया है। सरकार समय-समय पर अंतर्राष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों और कच्चे तेल की कीमतों को देखते हुए इस कर की समीक्षा करती रहती है। ताजा संशोधन के तहत पेट्रोल,डीजल और एटीएफ के निर्यात शुल्क में बदलाव किया गया है।

नई व्यवस्था के अनुसार पेट्रोल के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क यानी एसएईडी को बढ़ाकर 4 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इससे पहले यह शुल्क 1.5 रुपये प्रति लीटर था। दूसरी ओर डीजल के निर्यात पर शुल्क में राहत दी गई है। इसे पहले के 14 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 8.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसी तरह एटीएफ के निर्यात पर लगने वाले शुल्क को भी 12.5 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 7.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि निर्यात शुल्क में यह बदलाव अंतर्राष्ट्रीय बाजार की मौजूदा परिस्थितियों और घरेलू आपूर्ति को ध्यान में रखकर किया गया है। सरकार का उद्देश्य एक ओर घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना है,वहीं दूसरी ओर निर्यातकों के हितों और वैश्विक बाजार की प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन स्थापित करना भी है।

हालाँकि,सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है। इसका अर्थ यह है कि फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर इस निर्णय का कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा। आम वाहन चालकों के लिए ईंधन की कीमतें पहले की तरह ही बनी रहेंगी।

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में शांति बनी रहती है और कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में स्थिरता रहती है,तो आने वाले समय में भारत के ऊर्जा आयात बिल पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इससे न केवल विमानन उद्योग,बल्कि अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों को भी राहत मिलने की संभावना है।

फिलहाल एटीएफ की कीमतों में की गई यह कटौती घरेलू विमानन क्षेत्र के लिए राहत भरा कदम मानी जा रही है। साथ ही निर्यात शुल्क में किए गए संशोधन यह संकेत देते हैं कि सरकार वैश्विक ऊर्जा बाजार में हो रहे बदलावों पर लगातार नजर बनाए हुए है और परिस्थितियों के अनुरूप नीतिगत फैसले ले रही है। आने वाले समय में अंतर्राष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया की स्थिति पर ही यह निर्भर करेगा कि ईंधन बाजार में राहत का यह दौर कितना लंबा चलता है।