मैक्सिको ने इक्वाडोर को 2-0 से हराकर राउंड ऑफ 16 में बनाई जगह (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

फीफा विश्व कप 2026: मैक्सिको ने इक्वाडोर को 2-0 से हराकर राउंड ऑफ 16 में बनाई जगह, 40 साल बाद नॉकआउट में मिली ऐतिहासिक जीत

मैक्सिको सिटी,1 जुलाई (युआईटीवी)- सह-मेजबान मैक्सिको ने फीफा विश्व कप 2026 में अपने शानदार प्रदर्शन का सिलसिला जारी रखते हुए प्री-क्वार्टर फाइनल में ऐतिहासिक जीत दर्ज की। मैक्सिको सिटी स्टेडियम में खेले गए राउंड ऑफ 16 के मुकाबले में मैक्सिको ने इक्वाडोर को 2-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल की ओर मजबूत कदम बढ़ाया। जूलियन क्विनोनेस और राउल जिमेनेज के पहले हाफ में किए गए गोलों की बदौलत टीम ने मुकाबले पर शुरुआती दौर में ही अपनी पकड़ मजबूत कर ली और अंत तक बढ़त बनाए रखी। इस जीत के साथ मैक्सिको ने 40 वर्षों बाद विश्व कप के नॉकआउट चरण में जीत हासिल कर अपने फुटबॉल इतिहास में एक यादगार अध्याय जोड़ दिया।

यह जीत कई मायनों में विशेष रही। वर्ष 1986 के बाद पहली बार मैक्सिको ने विश्व कप के नॉकआउट मुकाबले में जीत दर्ज की है। दिलचस्प बात यह है कि 1986 में भी मैक्सिको विश्व कप का मेजबान था और उस समय उसने बुल्गारिया को 2-0 से हराकर अगले दौर में प्रवेश किया था। चार दशक बाद एक बार फिर मेजबान के रूप में मैक्सिको ने ठीक उसी स्कोर से जीत दर्ज करते हुए इतिहास को दोहराया और अपने प्रशंसकों को जश्न मनाने का एक और बड़ा अवसर दिया।

मैक्सिको ने इस जीत के साथ एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि अपने नाम की। वह वर्ष 1990 में इटली के बाद पहला मेजबान देश बन गया है जिसने विश्व कप में अपने शुरुआती चारों मुकाबले जीते हैं। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि टीम इस बार खिताब जीतने की प्रबल दावेदार बनकर उभरी है। लगातार चार जीत और चारों मैचों में अनुशासित प्रदर्शन ने मैक्सिको को टूर्नामेंट की सबसे संतुलित टीमों में शामिल कर दिया है।

मुकाबले की शुरुआत निर्धारित समय से लगभग एक घंटे बाद हुई। खराब मौसम के कारण मैच में देरी हुई,लेकिन इसका असर मैक्सिको के खिलाड़ियों के आत्मविश्वास या लय पर बिल्कुल नहीं दिखाई दिया। शुरुआती मिनटों से ही मेजबान टीम ने तेज गति से खेलते हुए इक्वाडोर पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। दर्शकों से खचाखच भरे स्टेडियम में मैक्सिको ने आक्रामक अंदाज अपनाया और लगातार गोल करने के अवसर बनाए।

पहले पंद्रह मिनट में ही मैक्सिको के पास बढ़त बनाने के कई मौके आए। गिलबर्टो मोरा, लुइस रोमो,राउल जिमेनेज और गिलबर्टो मोरा ने गोल करने की कोशिश की,लेकिन इक्वाडोर की रक्षा पंक्ति और गोलकीपर ने शुरुआती हमलों को विफल कर दिया। दूसरी ओर,इक्वाडोर को भी 18वें मिनट में एक अच्छा मौका मिला,जब जॉन येबोआ का जोरदार शॉट गोल पोस्ट से टकराकर बाहर चला गया। यदि यह प्रयास सफल हो जाता तो मुकाबले की दिशा बदल सकती थी।

इक्वाडोर के इस अवसर के कुछ ही मिनट बाद मैक्सिको ने शानदार जवाब दिया। रॉबर्टो अल्वाराडो ने बेहतरीन पास देकर जूलियन क्विनोनेस को मौका बनाया। क्विनोनेस ने अपने ही हाफ से तेज दौड़ लगाते हुए गेंद को आगे बढ़ाया और पेनल्टी बॉक्स में पहुँचकर जोरदार शॉट लगाया। उनका यह शानदार प्रयास सीधे गोल में जाकर समाया और इक्वाडोर के गोलकीपर हर्नान गालिंडेज के पास इसे रोकने का कोई अवसर नहीं था। इस गोल के साथ स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शक खुशी से झूम उठे।

पहला गोल करने के बाद जूलियन क्विनोनेस ने केवल गोल करने तक ही खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने अपनी रचनात्मकता का भी शानदार परिचय दिया। पहले हाफ के आधे घंटे के बाद उन्होंने एक सटीक पास राउल जिमेनेज को दिया,जिन्होंने बिना कोई गलती किए गेंद को गोल में पहुँचाकर मैक्सिको की बढ़त दोगुनी कर दी। इस गोल ने इक्वाडोर की वापसी की उम्मीदों को लगभग समाप्त कर दिया।

मुकाबले में मैक्सिको के युवा खिलाड़ी गिलबर्टो मोरा ने भी इतिहास रच दिया। 17 वर्ष और 259 दिन की उम्र में वह विश्व कप के नॉकआउट मुकाबले की शुरुआत करने वाले पेले के बाद दूसरे सबसे युवा खिलाड़ी बन गए। इससे पहले ब्राजील के महान खिलाड़ी पेले ने 1958 विश्व कप में 17 वर्ष और 239 दिन की उम्र में वेल्स के खिलाफ नॉकआउट मुकाबला खेला था। गिलबर्टो मोरा का यह रिकॉर्ड भविष्य के लिए उनके उज्ज्वल करियर का संकेत माना जा रहा है।

दूसरे हाफ में इक्वाडोर ने वापसी की पूरी कोशिश की। टीम ने गेंद पर अधिक नियंत्रण रखा और लगातार आक्रमण किए,लेकिन मैक्सिको की मजबूत रक्षापंक्ति ने उसे कोई स्पष्ट मौका नहीं दिया। सीजर मोंटेस और जोहान वास्केज ने रक्षा में शानदार तालमेल दिखाते हुए इक्वाडोर के हर हमले को नाकाम कर दिया। दोनों खिलाड़ियों ने न केवल रक्षात्मक जिम्मेदारी निभाई,बल्कि कॉर्नर किक के दौरान हेडर से गोल करने के करीब भी पहुँचे।

मैक्सिको के गोलकीपर राउल रेंगल का प्रदर्शन भी बेहद शानदार रहा। उन्होंने पूरे मैच में आत्मविश्वास के साथ गोलपोस्ट की जिम्मेदारी निभाई और विपक्षी टीम को गोल करने का कोई मौका नहीं दिया। यह लगातार चौथा मुकाबला रहा,जिसमें मैक्सिको ने क्लीन शीट बनाए रखी। किसी भी टीम के लिए लगातार चार मैचों तक गोल न खाना उसकी मजबूत रक्षात्मक रणनीति और खिलाड़ियों के अनुशासन का प्रमाण माना जाता है।

मैच के बाद जूलियन क्विनोनेस को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। उन्होंने कहा कि इस जीत का सबसे बड़ा कारण पूरी टीम का सामूहिक प्रदर्शन रहा। उनके अनुसार कोई भी खिलाड़ी अकेले मैच नहीं जिता सकता,बल्कि पूरी टीम के सहयोग से ही सफलता मिलती है। उन्होंने कहा कि टीम की यही सोच उसे लगातार बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित कर रही है।

क्विनोनेस ने अपने बयान में कहा कि जीवन भी यही सिखाता है कि मंजिल मिलने तक संघर्ष करते रहना चाहिए। उन्होंने टीम के सभी खिलाड़ियों,कोचिंग स्टाफ और प्रशंसकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मैदान पर खिलाड़ियों को मिलने वाला समर्थन उन्हें हर मुकाबले में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने विश्वास जताया कि टीम इसी आत्मविश्वास के साथ आगे भी खेलेगी।

इस जीत के साथ मैक्सिको अब क्वार्टर फाइनल में पहुँचने से केवल एक कदम दूर है। टीम का अगला मुकाबला 6 जुलाई को मैक्सिको सिटी स्टेडियम में खेला जाएगा,जहाँ उसका सामना इंग्लैंड और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के बीच होने वाले मुकाबले की विजेता टीम से होगा। घरेलू मैदान पर लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही मैक्सिको की टीम के आत्मविश्वास को देखते हुए उसके समर्थकों को उम्मीद है कि इस बार टीम विश्व कप में लंबा सफर तय कर सकती है।

लगातार चार जीत,मजबूत रक्षा,प्रभावशाली आक्रमण और टीम के खिलाड़ियों के बीच शानदार तालमेल ने यह साबित कर दिया है कि मैक्सिको इस विश्व कप में किसी भी बड़ी टीम को चुनौती देने की क्षमता रखता है। यदि टीम इसी लय को बनाए रखती है,तो वह न केवल क्वार्टर फाइनल बल्कि विश्व कप के अंतिम चरण तक पहुँचकर नया इतिहास रच सकती है। वर्तमान प्रदर्शन को देखते हुए मैक्सिको को इस टूर्नामेंट की सबसे संतुलित और आत्मविश्वास से भरी टीमों में गिना जा रहा है।