नई दिल्ली,23 फरवरी (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में आयोजित एआई समिट की सफलता को भारत की तकनीकी क्षमता और युवा शक्ति की सोच का प्रतीक बताया है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक समिट में पूरी दुनिया ने भारत के सामर्थ्य की जमकर सराहना की है। सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने लिखा कि दिल्ली में हुए इस ऐतिहासिक एआई समिट ने वैश्विक मंच पर भारत की मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है और यह स्पष्ट किया है कि टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत तेजी से अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
प्रधानमंत्री ने अपने पोस्ट के साथ 55 सेकंड का एक वीडियो भी साझा किया,जिसमें अनुसंधान और प्रयोग की महत्ता पर प्रकाश डाला गया है। वीडियो में बताया गया है कि अज्ञात ज्ञान की खोज के लिए निरंतर प्रयोग और अनुसंधान आवश्यक हैं। ज्ञात तथ्यों पर आधारित निर्णय और विश्लेषण शोध की शुरुआत होते हैं,जबकि अनुभव और अवलोकन के माध्यम से ही किसी ज्ञान को सत्यापित किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई भी इसी वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित है,जिसमें डेटा, विश्लेषण और निरंतर परीक्षण के माध्यम से नई संभावनाओं का निर्माण होता है।
रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में भी प्रधानमंत्री मोदी ने एआई समिट का विशेष उल्लेख किया था। उन्होंने कहा कि इस समिट के माध्यम से दुनिया ने भारत की अद्भुत क्षमताओं को नजदीक से देखा है। उनके अनुसार,एआई की शक्ति के उपयोग की दिशा में यह समिट एक टर्निंग प्वाइंट साबित हुई है। उन्होंने इस आयोजन को भारत के नवाचार,अनुसंधान और डिजिटल बुनियादी ढांचे की मजबूती का प्रमाण बताया।
दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ के दौरान कई देशों के शीर्ष नेता,वैश्विक उद्योग जगत के प्रमुख,टेक्नोलॉजी कंपनियों के सीईओ,इनोवेटर्स और स्टार्ट-अप क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि एकत्र हुए। इस मंच पर एआई के जिम्मेदार उपयोग,नैतिक ढाँचे,डेटा सुरक्षा,नवाचार और वैश्विक सहयोग जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में एआई की शक्ति का उपयोग दुनिया किस प्रकार करेगी,इसकी दिशा तय करने में यह समिट महत्वपूर्ण साबित होगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें समिट के दौरान कई वैश्विक नेताओं और टेक कंपनियों के प्रमुखों से मिलने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी में भारत द्वारा विकसित एआई आधारित समाधानों को देखकर विदेशी प्रतिनिधि काफी प्रभावित हुए। विशेष रूप से भारत द्वारा प्राचीन ग्रंथों,पांडुलिपियों और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में एआई के उपयोग को सराहा गया। उन्होंने कहा कि यह देखकर दुनिया भर के नेता हैरान रह गए कि कैसे आधुनिक तकनीक की मदद से हजारों वर्ष पुराने ज्ञान को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित किया जा रहा है और उसे आज की पीढ़ी के अनुरूप ढाला जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत की युवा पीढ़ी तकनीक को केवल व्यावसायिक लाभ के रूप में नहीं,बल्कि मानवता की सेवा के साधन के रूप में देख रही है। उनका मानना है कि एआई का सही उपयोग स्वास्थ्य,शिक्षा,कृषि, जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
समिट के दौरान एआई के नैतिक उपयोग पर भी जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि तकनीक का विकास तभी सार्थक है जब वह मानव मूल्यों के अनुरूप हो और समाज के सभी वर्गों को लाभ पहुँचाए। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत ‘मानव-केंद्रित एआई’ के दृष्टिकोण के साथ दुनिया को नई दिशा दिखा सकता है।
एआई समिट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं,बल्कि निर्माता और मार्गदर्शक बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वैश्विक मंच पर भारत की सक्रिय भागीदारी और नेतृत्व यह संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में एआई के क्षेत्र में भारत की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होगी। प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार,यह समिट न केवल तकनीकी सहयोग का मंच बनी,बल्कि इसने वैश्विक स्तर पर विश्वास और साझेदारी को भी मजबूत किया है।
दिल्ली में आयोजित एआई समिट ने भारत की वैज्ञानिक सोच,नवाचार क्षमता और डिजिटल प्रतिबद्धता को दुनिया के सामने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। प्रधानमंत्री के शब्दों में,यह आयोजन भविष्य की तकनीकी दिशा तय करने वाला एक ऐतिहासिक पड़ाव है,जो भारत को वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की ओर अग्रसर करता है।
